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सुप्रीम कोर्ट ले जाएंगे तुलसीदास की जन्मस्थली केस : प्रो. शैलेंद्र

Sat, 19 Aug 2023 10:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sat, 19 Aug 2023 10:45 PM IST
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Tulsidas birthplace case will be taken to the Supreme Court
एलबीएस डिग्री कॉलेज में पत्रकारों से वार्ता करते प्रो. शैलेंद्रना​थ मिश्र, साथ में अ​धिवक्ता गण
गोंडा। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से झटका मिलने के बाद एलबीएस शोध केंद्र के निदेशक प्रोफेसर शैलेंद्र नाथ मिश्र जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। शनिवार को एलबीएस शोध केंद्र कार्यालय पर अपने अधिवक्ता गणेश नाथ मिश्र के साथ उन्होंने साहित्य ग्रंथों की भाषा, विधानसभा में प्रश्नों व पूर्ववर्ती सरकारों के साथ ही अब महाकवि तुलसीदास के ग्रंथों पर शोध हो लेकर अपनी बात रखी।
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शोध केंद्र के निदेशक प्रोफेसर शैलेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि माध्यमिक और एनसीईआरटी समेत अलग-अलग बोर्डों के लिए प्रकाशित पुस्तकों में महाकवि तुलसीदास की जन्मस्थली के बाबत गोंडा, एटा और बांदा पढ़ाया जा रहा है। जबकि किसी एक स्थान पर ही महाकवि तुलसीदास का जन्म हुआ है। उन्होंने कहा कि तमाम साहित्यिक ग्रंथों व विद्वानों ने महाकवि का जन्मस्थल अवध को ही माना है। इस पर देश और दुनिया में हजारों की संख्या में शोध हो चुके हैं। श्रीरामचरित मानस को अलग-अलग भाषाओं में पढ़ा जा रहा है। ऐसे में जन्मस्थल एक स्थान न होने पर अपमानित महसूस किया जा रहा है। अधिवक्ता गणेश नाथ मिश्र ने कहा कि 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधानसभा के अपने जवाब में गोंडा को महाकवि की जन्मस्थली मानते हुए पर्यटन के तौर पर विकसित करने का भरोसा दिया था। श्रीरामचरित मानस के शब्द अवध क्षेत्र से मिलते जुलते हैं। इन तमाम तथ्यों के साथ आगामी 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
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प्रोफेसर शैलेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि 1857 के आसपास गांवों के इतिहास को फारसी भाषा में वाजबुल अर्ज लिखा गया था। महाकवि के जन्मस्थली राजापुर पसका का इतिहास 20 पन्नों में लिखा है। इसे राज्य सरकार के अधिकृत सेंटर लखनऊ के नदवा कॉलेज के अनुवाद के लिए भेजा गया है। जहां से जानकारी दी गई है कि इसमें चार पन्ने गायब हैं। अनुवाद पूरा होने के बाद रखरखाव करने वालों के खिलाफ एफआईआर के लिए सरकार से मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने वाजबुल अर्ज को गांवों के इतिहास के लिए प्रमाणित माना है।
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प्रोफेसर शैलेंद्र नाथ मिश्र ने ज्ञानवापी की तरह यहां सर्वे की बात कही है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर डेट ऑफ प्लेसेस के लिए सिविल सूट दायर करेंगे। इसके अलावा ज्ञानवापी व श्रीराम मंदिर की तरह ही महाकवि तुलसीदास की जन्मस्थली को लेकर सर्वे की मांग कर रहे हैं। अधिवक्ता ने कहा कि हाईस्कूल व इंटर की पुस्तकों में जन्मस्थली को लेकर सरकारी निर्देशों के आधार को लेकर कई बार अपनी मांग कर चुके हैं लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया है।
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