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Gonda News: मजार में खोदाई के दौरान मिट्टी की नीचे दबने से तीन की मौत
Thu, 22 May 2025 11:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 22 May 2025 11:44 PM IST
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इसी गड्ढे में गिरकर तीन लोगों की गई जान।
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खोड़ारे/मसकनवा (गोंडा)। छपिया के पिपरा माहिम गांव में बुधवार देर रात मासूम-ए-मिल्लत मजार के पास हो रही खोदाई के दौरान चार लोग गड्ढे में गिरकर मिट्टी के नीचे दब गए। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने चारों को बलरामपुर के सादुल्लाहनगर सीएचसी पहुंचाया, जहां किशोर समेत तीन की मौत हो गई। एक को लखनऊ रेफर किया गया है।
थानाध्यक्ष संजीव वर्मा ने बताया कि बुधवार रात करीब नौ बजे मो. फरजान मजार का पुर्ननिर्माण करा रहे थे। वह जेसीबी से मजार के अगल-बगल खोदाई करा रहे थे। उनके साथ खोड़ारे के अब्बनजोत निवासी शकील अहमद (60), मनकापुर के मछली बाजार दुल्हिया नानकार निवासी फकीर हुसैन (20) और छपिया के पिपरा माहिम निवासी अशद मोहम्मद (13) भी मौजूद थे। चारों लोग गड्ढे से निकाली गई मिट्टी के ढेर पर खड़े होकर नीचे देखने लगे तभी मिट्टी भरभरा गई। चारों लोग गड्ढे में गिरकर मिट्टी के नीचे दब गए।
इससे अफरातफरी मच गई। शोर सुनकर एकजुट हुए ग्रामीणों ने किसी तरह मिट्टी में दबे लोगों को बाहर निकाला और बलरामपुर जिले के साहदुल्लाहनगर सीएचसी ले गए लेकिन तब तक शकील, फकीर और अशद की मौत हो चुकी थी। मो. फरजान को गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया, जहां अब हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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एएसपी (पूर्वी) मनोज कुमार रावत ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है। उधर, गौरा विधायक प्रभात वर्मा का कहना है कि प्रकरण संज्ञान में है। वैधानिक कार्रवाई हो रही है। प्रशासन जांच कर रहा है। मृतक के परिजनों को अहेतुक सहायता दिलाई जाएगी।
मृतकों को शहीद बताते रहे ग्रामीण पोस्टमार्टम से किया इन्कार
खोड़ारे (गोंडा)। पिपरा माहिम गांव में मासूम-ए-मिल्लत की मजार के पुनर्निर्माण के दौरान बुधवार को हुए हादसे के बाद बृहस्पतिवार सुबह गांव वालों ने बाहरी लोगों के आने पर पाबंदी लगा रखी थी। करीब 10:30 बजे जब चौकी के पुलिसकर्मी पहुंचे हैं, तब बाहरी लोगों को गांव में घुसने दिया जा सका। हादसे के बाद कोई भी इस मामले में बोलने को तैयार नहीं था। गांव वाले मृतकों को शहीद बता रहे थे। शवों का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया।
मौत के बाद परिजन कुछ भी बोलने से कतराते रहे। सिर्फ यही कहा कि जो कुछ हुआ वह अल्लाह ने किया। हादसे में जान गंवाने वालों को शहीद बताया। उनका कहना था कि धर्म से संबंधित मामला है। इसके बाद पुलिस भी बेबस नजर आई। सादुल्लाहनगर पुलिस का कहना है कि अस्पताल से मेमो की सूचना पर पुलिस गई थी, लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम से मना कर दिया। एसओ छपिया संजीव वर्मा ने पोस्टमार्टम न कराने की पुष्टि की है। हादसे के बाद बृहस्पतिवार सुबह मनकापुर एसडीएम अवनीश त्रिपाठी व सीओ उदित नारायण पालीवाल मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि राजस्व टीम ने मौके की जांच की है।
बेटा करवा रहा था पुनर्निर्माण
पिपरा माहिम गांव में मासूम-ए-मिल्लत की मजार के दोनों तरफ उनके पुत्र फरजान रजा की देखरेख में काम हो रहा था। मजार गांव से सटी हुई है। सामने मदरसा भी है। आरोप है कि बिना किसी सुरक्षा उपायों व बैरीकेडिंग के जेसीबी के माध्यम से गड्ढा खोदा गया। इस दौरान वहां पहुंचे लोग हादसे का शिकार हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि निजी भूमि पर करीब दो साल पहले मजार बनाई गई थी। यहां हर बृहस्पतिवार मेला लगता है। बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। मजार का संबंध पीलीभीत जिले से है।
मजार के पुनर्निर्माण को लेकर कोई अनुमति नहीं ली गई थी। यह निजी भूमि है। अनुमति वैसे मिट्टी खनन की ली जाती है। करीब दस से 15 फीट का गड्ढा किया गया था लेकिन टीम के आने से पहले ही गड्ढे को पाट दिया गया था। उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
-अवनीश त्रिपाठी, एसडीएम
थानाध्यक्ष संजीव वर्मा ने बताया कि बुधवार रात करीब नौ बजे मो. फरजान मजार का पुर्ननिर्माण करा रहे थे। वह जेसीबी से मजार के अगल-बगल खोदाई करा रहे थे। उनके साथ खोड़ारे के अब्बनजोत निवासी शकील अहमद (60), मनकापुर के मछली बाजार दुल्हिया नानकार निवासी फकीर हुसैन (20) और छपिया के पिपरा माहिम निवासी अशद मोहम्मद (13) भी मौजूद थे। चारों लोग गड्ढे से निकाली गई मिट्टी के ढेर पर खड़े होकर नीचे देखने लगे तभी मिट्टी भरभरा गई। चारों लोग गड्ढे में गिरकर मिट्टी के नीचे दब गए।
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इससे अफरातफरी मच गई। शोर सुनकर एकजुट हुए ग्रामीणों ने किसी तरह मिट्टी में दबे लोगों को बाहर निकाला और बलरामपुर जिले के साहदुल्लाहनगर सीएचसी ले गए लेकिन तब तक शकील, फकीर और अशद की मौत हो चुकी थी। मो. फरजान को गंभीर हालत में लखनऊ रेफर किया गया, जहां अब हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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एएसपी (पूर्वी) मनोज कुमार रावत ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है। उधर, गौरा विधायक प्रभात वर्मा का कहना है कि प्रकरण संज्ञान में है। वैधानिक कार्रवाई हो रही है। प्रशासन जांच कर रहा है। मृतक के परिजनों को अहेतुक सहायता दिलाई जाएगी।
मृतकों को शहीद बताते रहे ग्रामीण पोस्टमार्टम से किया इन्कार
खोड़ारे (गोंडा)। पिपरा माहिम गांव में मासूम-ए-मिल्लत की मजार के पुनर्निर्माण के दौरान बुधवार को हुए हादसे के बाद बृहस्पतिवार सुबह गांव वालों ने बाहरी लोगों के आने पर पाबंदी लगा रखी थी। करीब 10:30 बजे जब चौकी के पुलिसकर्मी पहुंचे हैं, तब बाहरी लोगों को गांव में घुसने दिया जा सका। हादसे के बाद कोई भी इस मामले में बोलने को तैयार नहीं था। गांव वाले मृतकों को शहीद बता रहे थे। शवों का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया।
मौत के बाद परिजन कुछ भी बोलने से कतराते रहे। सिर्फ यही कहा कि जो कुछ हुआ वह अल्लाह ने किया। हादसे में जान गंवाने वालों को शहीद बताया। उनका कहना था कि धर्म से संबंधित मामला है। इसके बाद पुलिस भी बेबस नजर आई। सादुल्लाहनगर पुलिस का कहना है कि अस्पताल से मेमो की सूचना पर पुलिस गई थी, लेकिन परिजनों ने पोस्टमार्टम से मना कर दिया। एसओ छपिया संजीव वर्मा ने पोस्टमार्टम न कराने की पुष्टि की है। हादसे के बाद बृहस्पतिवार सुबह मनकापुर एसडीएम अवनीश त्रिपाठी व सीओ उदित नारायण पालीवाल मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि राजस्व टीम ने मौके की जांच की है।
बेटा करवा रहा था पुनर्निर्माण
पिपरा माहिम गांव में मासूम-ए-मिल्लत की मजार के दोनों तरफ उनके पुत्र फरजान रजा की देखरेख में काम हो रहा था। मजार गांव से सटी हुई है। सामने मदरसा भी है। आरोप है कि बिना किसी सुरक्षा उपायों व बैरीकेडिंग के जेसीबी के माध्यम से गड्ढा खोदा गया। इस दौरान वहां पहुंचे लोग हादसे का शिकार हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि निजी भूमि पर करीब दो साल पहले मजार बनाई गई थी। यहां हर बृहस्पतिवार मेला लगता है। बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं। मजार का संबंध पीलीभीत जिले से है।
मजार के पुनर्निर्माण को लेकर कोई अनुमति नहीं ली गई थी। यह निजी भूमि है। अनुमति वैसे मिट्टी खनन की ली जाती है। करीब दस से 15 फीट का गड्ढा किया गया था लेकिन टीम के आने से पहले ही गड्ढे को पाट दिया गया था। उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
-अवनीश त्रिपाठी, एसडीएम