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बजाज चीनी मिल कुन्दरखी की 252 करोड़ की देनदारी
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गोंडा। किसानों की आय दुगुना करने में लगी सरकार के सारी कवायदों पर कुंदरखी चीनी मिल की अड़ंगेबाजी भारी पड़ रही है। देवी पाटन मंडल की दस चीनी मिलों में एक मात्र चीनी मिल कुंदरखी ने किसानों का 300 करोड़ का भुगतान नहीं किया है। इसमें 40 करोड़ रुपये बीते पेराई सत्र का शामिल है। मिल का संचालन 24 फरवरी को बंद हो जाएगा।
गोंडा स्थित बजाज चीनी मिल कुंदरखी किसानों का दर्द नहीं मिटा पाई। वर्तमान पेराई सत्र बुधवार को समाप्त हो जाएगी। लेकिन किसानों द्वारा आपूर्ति किए गए गन्ने के एवज में चीनी मिल पर 252 करोड़ की देनदारी हो गई। मिल ने चालू पेराई सत्र का एक पाई भी भुगतान नहीं किया है, जबकि पुराने सत्र का 40 करोड़ बकाया है।
उल्लेखनीय है कि गोंडा में धान, गेहूं छोड़ कर मुख्य नगदी फसल गन्ना है जिस पर किसानों का आर्थिक विकास टिका हुआ है। इसी के पैसे से किसान बैंक का कर्ज, बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी, भवन निर्माण वा त्यौहार निपटाते हैं, लेकिन मिल की प्रबंधकीय व्यवस्था व अधिकारियों की लाचारी से किसानों के बकाए भुगतान में रोड़ा ही रोड़ा दिख रहा है।
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चीनी मिल वर्तमान पेराई सत्र में 25 नवंबर से 24 फरवरी तक चली है, जिसमें लगभग 82 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की है और लगभग 252 करोड़ की देनदारी है।
मिल संचालन के समय कई संगठनों ने पिछले साल के भुगतान के लिए धरना प्रदर्शन भी किया था और मिल प्रबंधन ने 20 फरवरी तक का भुगतान करने के लिए कहा था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वहीं क्षेत्र के डड़वा कानूनगो निवासी अरूण शुक्ल ने कहा कि गन्ना नकदी फसल होने के बावजूद यदि यही हाल रहा तो गन्ने की खेती करने से मोहभंग हो जाएगा।
सोनभरिया के दूधनाथ वर्मा ने कहा कि अब किसानों की पीड़ा लेने वाला कोई नेता नहीं है। वहीं किसान नेता बब्बू सिंह विसेन का कहना है कि बजाज चीनी मिल संवेदनहीन है और किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
बजाज चीनी मिल कुंदरखी यूनिट के महाप्रबंधक गन्ना योगेंद्र सिंह ने बताया कि चीनी मिल का संचालन 24 फरवरी को बंद कर दिया जाएगा। पिछले सत्र का भुगतान 10 मार्च तक कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद मौजूदा सत्र का भुगतान किया जाएगा।
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गोंडा स्थित बजाज चीनी मिल कुंदरखी किसानों का दर्द नहीं मिटा पाई। वर्तमान पेराई सत्र बुधवार को समाप्त हो जाएगी। लेकिन किसानों द्वारा आपूर्ति किए गए गन्ने के एवज में चीनी मिल पर 252 करोड़ की देनदारी हो गई। मिल ने चालू पेराई सत्र का एक पाई भी भुगतान नहीं किया है, जबकि पुराने सत्र का 40 करोड़ बकाया है।
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उल्लेखनीय है कि गोंडा में धान, गेहूं छोड़ कर मुख्य नगदी फसल गन्ना है जिस पर किसानों का आर्थिक विकास टिका हुआ है। इसी के पैसे से किसान बैंक का कर्ज, बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी, भवन निर्माण वा त्यौहार निपटाते हैं, लेकिन मिल की प्रबंधकीय व्यवस्था व अधिकारियों की लाचारी से किसानों के बकाए भुगतान में रोड़ा ही रोड़ा दिख रहा है।
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चीनी मिल वर्तमान पेराई सत्र में 25 नवंबर से 24 फरवरी तक चली है, जिसमें लगभग 82 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की है और लगभग 252 करोड़ की देनदारी है।
मिल संचालन के समय कई संगठनों ने पिछले साल के भुगतान के लिए धरना प्रदर्शन भी किया था और मिल प्रबंधन ने 20 फरवरी तक का भुगतान करने के लिए कहा था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वहीं क्षेत्र के डड़वा कानूनगो निवासी अरूण शुक्ल ने कहा कि गन्ना नकदी फसल होने के बावजूद यदि यही हाल रहा तो गन्ने की खेती करने से मोहभंग हो जाएगा।
सोनभरिया के दूधनाथ वर्मा ने कहा कि अब किसानों की पीड़ा लेने वाला कोई नेता नहीं है। वहीं किसान नेता बब्बू सिंह विसेन का कहना है कि बजाज चीनी मिल संवेदनहीन है और किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
बजाज चीनी मिल कुंदरखी यूनिट के महाप्रबंधक गन्ना योगेंद्र सिंह ने बताया कि चीनी मिल का संचालन 24 फरवरी को बंद कर दिया जाएगा। पिछले सत्र का भुगतान 10 मार्च तक कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद मौजूदा सत्र का भुगतान किया जाएगा।