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थर्मल स्क्रीनिंग बंद, बिना मास्क लगाए झुंड में खड़े रहते मरीज
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गोंडा। कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर की चेतावनी से बेखबर लोग अप्रैल-मई में कोरोना की दूसरी लहर के कहर से सबक नहीं ले रहे हैं। जिला महिला अस्पताल में कोरोना प्रोटोकाल की अनदेखी की जा रही है।
कोविड हेल्प डेस्क खाली रहा। अस्पताल में आने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग बंद रही। ओपीडी से लेकर पैथोलॉजी सेंटर व अल्ट्रासाउंड कक्ष तक के सामने मरीजों की भीड़ लगी रही। अधिकांश लोगों ने मास्क नहीं पहने रखा था।
कोरोना की बेकाबू दूसरी लहर को बीते महज एक माह हुए हैं। उन दिनों के गहरे दर्द की पीड़ा आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है। जिन कारणों से ऐसे हालात बने थे, आज फिर से वही हालात पैदा करने की कोशिश हो रही है। संक्रमण कम जरूर हुआ है, लेकिन खतरा बरकरार है।
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लोग इस खतरे को भूलकर फिर से न तो मास्क लगा रहे है, न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे है। इस लापरवाही में अफसर से लेकर आम आदमी तक सब बेफिक्र है। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी भीड़ उमड़ रही है मानो यह लोग कोरोना को समझते ही नहीं है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने महिला अस्पताल के व्यवस्थाओं की हकीकत परखी।
प्रशासन ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी सरकारी कार्यालयों व निजी प्रतिष्ठानों के बाहर कोविड हेल्प डेस्क अनिवार्य रुप से बनाए जाने का आदेश दिया है, लेकिन शुक्रवार को महिला अस्पताल गेट पर कोविड हेल्प डेस्क के नाम पर मेज व कुर्सी तो रखी थी, लेकिन कर्मचारी नदारद रहा। लोग बिना रोक-टोक अस्पताल में आते-जाते रहे, न ही किसी की थर्मल स्क्रीनिंग होती न लोगों का सैनिटाइजेशन किया जा रहा था।
शुक्रवार को महिला अस्पताल में मरीज व तीमारदारों की भारी भीड़ रही। ओपीडी से लेकर पैथालॉजी व अस्ट्रासाउंड कक्ष के सामने मरीजों व तीमारदारों का तांता लगा रहा लोग कोरोना संक्रमण से बिल्कुल बेखौफ दिखे।
अधिकांश लोगों ने न तो मास्क पहन रखा था, न ही सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा था। मरीज की तीमारदार पुष्पा ने बताया कि सुबह से जांच करवाने के लिए लाइन में लगी हैं अभी तक जांच नही हो पाई है। अब डॉक्टर उठ जाएंगी तो कल फिर आना पड़ेगा रिपोर्ट दिखाने।
महिला अस्पताल में जांच करवाने के लिए लोग भीड़ लगाए खड़े थे। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में कोई ऐसा सुरक्षाकर्मी नहीं है जो लोगों को कतार में लगाने व सोशल डिस्ट्रेसिंग का पालन करने को कह सके।
सुनीता बताती हैं कि जो लोग लैब के कर्मचारियों से मिलकर आगे चले जाते हैं उनका पहले नंबर आ जाता है बाकी लोग पीछे खड़े होकर सुबह से जांच करवाने का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों की मनमानी ही चलती है।
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कोविड हेल्प डेस्क खाली रहा। अस्पताल में आने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग बंद रही। ओपीडी से लेकर पैथोलॉजी सेंटर व अल्ट्रासाउंड कक्ष तक के सामने मरीजों की भीड़ लगी रही। अधिकांश लोगों ने मास्क नहीं पहने रखा था।
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कोरोना की बेकाबू दूसरी लहर को बीते महज एक माह हुए हैं। उन दिनों के गहरे दर्द की पीड़ा आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है। जिन कारणों से ऐसे हालात बने थे, आज फिर से वही हालात पैदा करने की कोशिश हो रही है। संक्रमण कम जरूर हुआ है, लेकिन खतरा बरकरार है।
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लोग इस खतरे को भूलकर फिर से न तो मास्क लगा रहे है, न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे है। इस लापरवाही में अफसर से लेकर आम आदमी तक सब बेफिक्र है। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी भीड़ उमड़ रही है मानो यह लोग कोरोना को समझते ही नहीं है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने महिला अस्पताल के व्यवस्थाओं की हकीकत परखी।
प्रशासन ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी सरकारी कार्यालयों व निजी प्रतिष्ठानों के बाहर कोविड हेल्प डेस्क अनिवार्य रुप से बनाए जाने का आदेश दिया है, लेकिन शुक्रवार को महिला अस्पताल गेट पर कोविड हेल्प डेस्क के नाम पर मेज व कुर्सी तो रखी थी, लेकिन कर्मचारी नदारद रहा। लोग बिना रोक-टोक अस्पताल में आते-जाते रहे, न ही किसी की थर्मल स्क्रीनिंग होती न लोगों का सैनिटाइजेशन किया जा रहा था।
शुक्रवार को महिला अस्पताल में मरीज व तीमारदारों की भारी भीड़ रही। ओपीडी से लेकर पैथालॉजी व अस्ट्रासाउंड कक्ष के सामने मरीजों व तीमारदारों का तांता लगा रहा लोग कोरोना संक्रमण से बिल्कुल बेखौफ दिखे।
अधिकांश लोगों ने न तो मास्क पहन रखा था, न ही सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा था। मरीज की तीमारदार पुष्पा ने बताया कि सुबह से जांच करवाने के लिए लाइन में लगी हैं अभी तक जांच नही हो पाई है। अब डॉक्टर उठ जाएंगी तो कल फिर आना पड़ेगा रिपोर्ट दिखाने।
महिला अस्पताल में जांच करवाने के लिए लोग भीड़ लगाए खड़े थे। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में कोई ऐसा सुरक्षाकर्मी नहीं है जो लोगों को कतार में लगाने व सोशल डिस्ट्रेसिंग का पालन करने को कह सके।
सुनीता बताती हैं कि जो लोग लैब के कर्मचारियों से मिलकर आगे चले जाते हैं उनका पहले नंबर आ जाता है बाकी लोग पीछे खड़े होकर सुबह से जांच करवाने का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों की मनमानी ही चलती है।