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Gonda News: भागवत कथा के प्रति श्रोता के मन में होनी चाहिए श्रद्धा

Mon, 06 Feb 2023 11:06 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Mon, 06 Feb 2023 11:06 PM IST
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There should be reverence in the mind of the listener towards Bhagwat Katha
बलरामपुर। वीर विनय चौराहा स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर में चल रहे श्रीरामजानकी प्राण प्रतिष्ठा दिवस समारोह के दूसरे दिन श्रीमद्भागवत कथा में राजा परीक्षित पर कलयुग के प्रभाव का वर्णन किया गया। कथा व्यास भीष्म पितामह महाराज ने भक्ति व श्रद्घाभाव को आवश्यक बताते हुए भक्तों को ईश आराधना के लिए प्रेरित किया। श्रीरामजानकी प्राण प्रतिष्ठा दिवस समारोह के दूसरे दिन रविवार की रात हनुमानगढ़ी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत महेंद्र दास जी महाराज ने व्यास गद्दी की पूजा-अर्चना कर श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ कराया। कथा व्यास भीष्म पितामह महाराज ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना स्वाभाविक है, लेकिन गलती का प्रायश्चित करना और उसमें सुधार लाना बड़ी बात होती है। जो लोग गलती करके उसका प्रायश्चित नहीं करते हैं, उन्हें उसका पाप दंड भुगतना पड़ता है।
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राजा परीक्षित पर कलयुग के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा कि कलयुग के प्रभाव के कारण ही राजा परीक्षित ऋषि के श्राप से श्रापित हो जाते हैं। उसके पश्चाताप में वे शुकदेव जी के पास जाते हैं और श्राप से मुक्ति का उपाय पूछते हैं। वे बताते हैं कि भक्ति ही एक ऐसा माध्यम है, जिससे जीवन की सभी परेशानियां दूर होती हैं। कथा व्यास ने कहा कि भागवत कथा का पुण्य तभी मिलता है, जब श्रोता के मन में उसके प्रति जिज्ञासा व श्रद्घा हो। भक्त को यह समझना चाहिए कि परमात्मा दिखाई नहीं देते हैं, बल्कि सच्चे भक्त के मन में वह बस जाते हैं।
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कथा व्यास ने पांडवों के जीवन में भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान हमेशा धर्म का साथ देते हैं। महाभारत युद्ध में उन्होंने पांडवों का साथ इसीलिए दिया, क्योंकि पांडव धर्म का पालन कर रहे थे। अधर्मी को दंड देना भी भगवान का कर्तव्य है और भगवान श्रीकृष्ण ने अपने इसी कर्तव्य का पालन किया।
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इस अवसर पर नरेश शेहरावत, डीपी सिंह, उद्धव दास, आनंद, संदीप, हैप्पी मिश्रा, डब्बू मिश्रा, राघवेंद्र कांत सिंह मंटू, पवन शुक्ला व ओमप्रकाश मिश्रा सहित तमाम श्रद्घालु मौजूद रहे।
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