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Gonda News: अधूरे पड़े काम से पांच साल से पेयजल की दरकार
Wed, 11 Mar 2026 11:14 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 11 Mar 2026 11:14 PM IST
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टिकरी। गर्मी की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की मांग बढ़ने लगी है, लेकिन नवाबगंज क्षेत्र के किशुनदासपुर गांव के लोगों की प्यास पिछले पांच वर्षों से नहीं बुझ सकी है। वर्ष 2020-21 में हर घर नल योजना के तहत शुरू हुई पानी टंकी परियोजना आज भी अधूरी पड़ी है। टंकी का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का काम आधा-अधूरा छोड़कर कार्यदायी संस्था चली गई और तब से निर्माण कार्य ठप पड़ा है।
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि योजना पूरी होने के बाद उन्हें घर-घर शुद्ध पेयजल मिलेगा और हैंडपंपों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी, लेकिन पांच साल बाद भी यह उम्मीद अधूरी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना का लाभ गांव तक नहीं पहुंच पाया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
गांव के प्रधान प्रतिनिधि अभिषेक सिंह अंकित ने बताया कि वर्ष 2020-21 में पानी टंकी का निर्माण शुरू हुआ था। शुरुआती दिनों में तेजी से काम हुआ, जिससे लोगों को लगा कि जल्द ही गांव में पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी। लेकिन कुछ समय बाद निर्माण कार्य अचानक बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि करीब एक वर्ष से पूरी तरह काम बंद है और न तो कोई अधिकारी मौके पर आया और न ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ।
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क्षेत्रीय ग्रामीण जुगुल किशोर ने बताया कि गांव में पानी सप्लाई के लिए पाइपलाइन तो डाल दी गई है, लेकिन घरों तक कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। ऐसे में पूरी व्यवस्था अधूरी पड़ी है और ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।बैरीशाल पुरवा निवासी कैलाश नाथ शुक्ला का कहना है कि टंकी चालू न होने से लोगों को मजबूरी में हैंडपंप और अन्य स्रोतों के दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे बीमारी फैलने का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द निर्माण कार्य पूरा कराकर गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू कराने की मांग की है।
ढाई साल से भुगतान नहीं, इसलिए अटका निर्माण
जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले ढाई साल से भुगतान नहीं हो सका है। इसके कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह गई हैं। बजट के अभाव में काम दोबारा शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि जल्द ही बजट आवंटित होने की उम्मीद है। बजट मिलते ही निर्माण कार्य पूरा कराकर गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू की जाएगी।
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ग्रामीणों को उम्मीद थी कि योजना पूरी होने के बाद उन्हें घर-घर शुद्ध पेयजल मिलेगा और हैंडपंपों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी, लेकिन पांच साल बाद भी यह उम्मीद अधूरी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना का लाभ गांव तक नहीं पहुंच पाया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
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गांव के प्रधान प्रतिनिधि अभिषेक सिंह अंकित ने बताया कि वर्ष 2020-21 में पानी टंकी का निर्माण शुरू हुआ था। शुरुआती दिनों में तेजी से काम हुआ, जिससे लोगों को लगा कि जल्द ही गांव में पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी। लेकिन कुछ समय बाद निर्माण कार्य अचानक बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि करीब एक वर्ष से पूरी तरह काम बंद है और न तो कोई अधिकारी मौके पर आया और न ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ।
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क्षेत्रीय ग्रामीण जुगुल किशोर ने बताया कि गांव में पानी सप्लाई के लिए पाइपलाइन तो डाल दी गई है, लेकिन घरों तक कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। ऐसे में पूरी व्यवस्था अधूरी पड़ी है और ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।बैरीशाल पुरवा निवासी कैलाश नाथ शुक्ला का कहना है कि टंकी चालू न होने से लोगों को मजबूरी में हैंडपंप और अन्य स्रोतों के दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे बीमारी फैलने का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द निर्माण कार्य पूरा कराकर गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू कराने की मांग की है।
ढाई साल से भुगतान नहीं, इसलिए अटका निर्माण
जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले ढाई साल से भुगतान नहीं हो सका है। इसके कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह गई हैं। बजट के अभाव में काम दोबारा शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि जल्द ही बजट आवंटित होने की उम्मीद है। बजट मिलते ही निर्माण कार्य पूरा कराकर गांव में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू की जाएगी।