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राजघराने के कुंवर ने केले की खेती में लहराया परचम

Wed, 26 Aug 2020 09:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2020 09:42 PM IST
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The kunwar of the royal family waved in banana cultivation
गोंडा के मनकापुर में तैयार केले की फसल को दिखाते कुंवर अतुल सिंह। - फोटो : GONDA
मनकापुर (गोंडा)। किसानी का जुनून इस तरह चढ़ा कि न धूप न छांव बस कुछ कर गुजरने की ललक ने मनकापुर मंगल भवन के राजघराने में पले बढ़े कुंवर अतुल कुमार सिंह को किसान बना दिया। वर्ष 1974 से पूर्ण रूप से किसान बनकर खेती-किसानी में उतरकर पूरे मंडल में परचम लहरा दिया। सिंह ने खेती की दशा ही नहीं दिशा भी बदल दी है। ब्लॉक क्षेत्र के फिरोजपुर गांव में इन्होंने शुरुआती दौर में 30 एकड़ खेतिहर भूमि में गेहूं, धान, गन्ना व नर्सरी की खेती के साथ-साथ सह फसली खेती करके जिला स्तर पर सुर्खियां बटोरने के अतिरिक्त कई बार पुरस्कृत भी हुए। आज कुंवर अतुल कुमार सिंह (छोटे भैया) की अच्छे किसान के रूप में पहचान बन गई है।
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कुंवर अतुल सिंह ने बताया कि बचपन से ही खेती-किसानी में रुचि रही है लेकिन बीए, एलएलबी शिक्षा ग्रहण करने के बाद सेना या फॉरेस्ट विभाग में जाने मन था। प्रकृति के साथ जुड़ाव होने के कारण वर्ष 1974 में पूर्ण रूप से किसानी में आ गए। शुरुआती दौर में काफी दिक्कतें आईं, लेकिन उन्होंने हमेशा कदम आगे ही बढ़ाया। खेती किसानी में प्रथम स्थान प्राप्त किए वर्ष 2013-14 में श्री विधि से धान के उत्तम पैदावार में जनपद में प्रथम स्थान मिला। वर्ष 2017-18 में गेहूं के पैदावार में जिला स्तर पर प्रथम स्थान, वर्ष 1997- 98 में गन्ना में जनपद में प्रथम स्थान, वर्ष 2019-20 में केला व आम के फसल में राज्य स्तर पर सम्मान मिला है।
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उन्होंने बताया कि दस एकड़ भूमि में टिशू कल्चर से केला की खेती कर रहे है। 15 जुलाई से 15 अगस्त तक टिशू कल्चर विधि से जी 9 प्रजाति के पौध रोपण करते है। खेत मे 7.5 फीट की दूरी पर केले के पौध लगा कर एकड़ में 11 सौ पौध रोपड़ किए जाते हैं। इसकी फसल 15 माह में तैयार होती है। जिसमें प्रति एकड़ डेढ़ लाख की शुद्ध आय होती है। इन्होंने बताया कि स्थानीय व जिला से तमाम किसान आकर व्यावसायिक खेती के संबंध में जानकारी हासिल करते है तथा उनको ऐसी खेती करने के लिए सहयोग के साथ साथ प्रोत्साहित भी किया जाता है।
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खेती के साथ-साथ करते है पौध नर्सरी का काम
फिरोजपुर गांव में खेती के साथ साथ पौधों का कलम के जरिए आम, अमरूद, आवंला, नींबू, पपीता, लीची, अंगूर व फूलों के अतिरिक्त शो प्लांट, छाया दार पौधों की हाइब्रिड नर्सरी तैयार करके अच्छे दामों में विक्रय करके आय बढ़ाने का कार्य करते है। लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित भी करते हैं।
सोलर प्लांट से खेती की लागत की कम
खेती की लागत कम करने के लिए सोलर प्लांट का उपयोग किया। पांच किलोवाट का सोलर प्लांट लगा कर तीन एकड़ खेत की सिंचाई होती है मुफ्त। किसान श्री सिंह ने बताया कि 32 सोलर प्लेट की एसेंबली स्थापित करके पांच किलोवाट बिजली का उत्पादन होता है जिससे समरसेबल पंप के जरिये बना ईंधन के तीन एकड़ खेत की सिंचाई सुचारु रूप से होती है। इससे साल में काफी धन की बचत हो जाती है।

वर्मी कंपोस्ट खाद का प्रयोग करके दी नई दिशा
कुंवर अतुल कुमार सिंह ने बताया कि इंडियन बेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईबीआरआई) इज्जत नगर बरेली से प्रशिक्षण लेकर जय गोपाल वर्मी टेक्निक द्वारा निर्मित केचुआ खाद का उत्पादन करके स्वयं अपने खेती में प्रयोग करते हैं। आसपास के किसान व अन्य जनपद के किसान भी प्रयोग करते हैं। इस वर्मी कंपोस्ट की खाद से बिना किसी साइड इफेक्ट के अच्छी फसल का लाभ मिलता है। इसके अलावा केले की फसल लेने के बाद उसके पेड़ को भी काट कर खेत के मिट्टी में मिला दिया जाता है जिससे वह सड़ कर खाद के काम आती है। वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए गोबर, गोमूत्र व केचुआ का प्रयोग करते हैं।
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