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साधकों ने जाना प्रकृति का महत्व
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Sun, 17 Apr 2016 11:08 PM IST
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हवन का आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
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आर्य समाज मंदिर पूरब टोला में रविवार को यज्ञ-हवन के साथ आर्य समाज के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के पहले दिन यज्ञ-हवन के साथ प्रवचन में ईश्वर, जीव और प्रकृति के महत्व की जानकारी साधकों को दी गई।
आर्य समाज मंदिर पूरबटोला में बाहर से आए आचार्य संजीव, पंडित युगल किशोर और शंकर मुनि ने यज्ञ हवन कर वार्षिकोत्सव का शुभारंभ किया। आचार्य संजीव ने ईश्वर, जीव एवं प्रकृति के महत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रकृति जड़ है, ईश्वर निराकार है और जीव अल्पज्ञ है।
प्रकृति व जीव का स्वामी ईश्वर कहलाता है क्योंकि वह सर्वज्ञ है। ईश्वर आदि व अनंत है इसलिए उसकी शक्तियां भी अनंत है। पंडित युगल किशोर ने समाज में दुराचार की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के अपराधी रावण से भी अधिक क्रूर है।
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आज का मानव लोभ-मोह के चक्कर में न तो राम बन पा रहा है और न रावण की शक्तियों के बराबर ही पहुंच पा रहा है। शंकर मुनि ने कहा कि आज छात्रों में जिज्ञासा समाप्त हो गई है, इसीलिए वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर पा रहे हैं।
इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान संजय आर्य, मंत्री संजय पांडेय, राजेश्वर मिश्रा, अशोक तिवारी, राज कुमार आदि मौजूद रहे।
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आर्य समाज मंदिर पूरबटोला में बाहर से आए आचार्य संजीव, पंडित युगल किशोर और शंकर मुनि ने यज्ञ हवन कर वार्षिकोत्सव का शुभारंभ किया। आचार्य संजीव ने ईश्वर, जीव एवं प्रकृति के महत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रकृति जड़ है, ईश्वर निराकार है और जीव अल्पज्ञ है।
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प्रकृति व जीव का स्वामी ईश्वर कहलाता है क्योंकि वह सर्वज्ञ है। ईश्वर आदि व अनंत है इसलिए उसकी शक्तियां भी अनंत है। पंडित युगल किशोर ने समाज में दुराचार की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के अपराधी रावण से भी अधिक क्रूर है।
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आज का मानव लोभ-मोह के चक्कर में न तो राम बन पा रहा है और न रावण की शक्तियों के बराबर ही पहुंच पा रहा है। शंकर मुनि ने कहा कि आज छात्रों में जिज्ञासा समाप्त हो गई है, इसीलिए वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति नहीं कर पा रहे हैं।
इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान संजय आर्य, मंत्री संजय पांडेय, राजेश्वर मिश्रा, अशोक तिवारी, राज कुमार आदि मौजूद रहे।