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कूष्मांडा माता का पूजन कर आरोग्य का मांगा आशीर्वाद
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ोटो-8-गोंडा में परेड सरकार स्थित सम्मय माता मंदिर में पूजन करते श्रद्घालु। -संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को मां भगवती के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। देवी मंदिरों में सुबह से पूजा-अर्चना करने के लिए सुबह से श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। मां को चढ़ावा चढ़ाकर घर में सुख-समृद्धि की कामना की। कूष्मांडा माता को आरोग्य की देवी माना जाता है, मान्यता है कि इनकी पूजा करने से व्यक्ति कुष्ठ जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति पा जाता है।
मंगलवार की सुबह से पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ जो कि देर शाम तक चलता रहा। मंदिरों में जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे। शहर से सटे खैरा भवानी मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। माता के भक्तों ने नारियल, चुनरी व प्रसाद चढ़ाकर माता से धन, वैभव व आरोग्य का आशीर्वाद मांगा। मंदिर के पुजारी के प्रदीप सैनी के अनुसार यहां नवरात्र में हिंदू के अलावा मुस्लिम व अन्य धर्मों के लोग माता के पिंडी रुप का दर्शन करने आते हैं। मां के चरणों का नीर लगाने से आंखों से संबधित रोग दूर हो जाता है।
नगर कोतवाली के पास काली भवानी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर में माता के जयकारे गूंजते रहे। उमरी बेगमगंज के उत्तरी भवानी मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी। ग्रामीण इलाकों की अन्य मंदिरों में पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। देवी भक्तों ने घरों में व्रत रहकर पूजा की तथा घर में सुख-समृद्धि की कामना की। परेड सरकार स्थित सम्मय माता मंदिर के पुजारी ने बताया कि मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों को सभी सिद्धियां मिलती हैं। मां कूष्मांडा की कृपा से लोग निरोग होते हैं और आयु व यश में बढ़ोत्तरी होती।
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राम-भरत मिलन की कथा सुन भावविभोर हुए भक्त
नवाबगंज के कटरा कुटी पीठ पर चल रहे रामकथा के दूसरी दिन राम-भरत मिलन की कथा सुनाई गई। कथावाचक अमरेश्वरानंद महाराज के मुखारविंद से राम-भरत मिलन की कथा सुन भक्त भाव विभोर हो गए।
कथावाचक ने कहा कि राम न सिर्फ अवतारी पुरुष के रूप में पूज्य हैं, बल्कि एक राजा के रूप में आदर्श हैं। उन्होंने जीवन के सबसे कठिन समय में मर्यादा का त्याग नहीं किया। व्यास ने कहा कि राम की पूजा इसलिए नहीं की जाती है कि हमारी भौतिक इच्छाएं पूरी हो जाए बल्कि राम की पूजा हम उनसे यह प्रेरणा लेने के लिए करते हैं कि मुश्किल क्षणों का सामना कैसे धैर्य पूर्वक बिना विचलित हुए सहजता से किया जाए। इस मौके पर राजेंद्र तिवारी, महेंद्र सिंह ,राममणि पांडेय, भुनेश्वरानंद महाराज, पं मिथिला शरण पांडेय, बबलू निषाद, अरुण सिंह, गोपाल सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता, विनोद गुप्ता आदि रहे।
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मंगलवार की सुबह से पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ जो कि देर शाम तक चलता रहा। मंदिरों में जय माता दी के जयकारे गूंजते रहे। शहर से सटे खैरा भवानी मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। माता के भक्तों ने नारियल, चुनरी व प्रसाद चढ़ाकर माता से धन, वैभव व आरोग्य का आशीर्वाद मांगा। मंदिर के पुजारी के प्रदीप सैनी के अनुसार यहां नवरात्र में हिंदू के अलावा मुस्लिम व अन्य धर्मों के लोग माता के पिंडी रुप का दर्शन करने आते हैं। मां के चरणों का नीर लगाने से आंखों से संबधित रोग दूर हो जाता है।
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नगर कोतवाली के पास काली भवानी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर में माता के जयकारे गूंजते रहे। उमरी बेगमगंज के उत्तरी भवानी मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी। ग्रामीण इलाकों की अन्य मंदिरों में पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। देवी भक्तों ने घरों में व्रत रहकर पूजा की तथा घर में सुख-समृद्धि की कामना की। परेड सरकार स्थित सम्मय माता मंदिर के पुजारी ने बताया कि मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों को सभी सिद्धियां मिलती हैं। मां कूष्मांडा की कृपा से लोग निरोग होते हैं और आयु व यश में बढ़ोत्तरी होती।
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राम-भरत मिलन की कथा सुन भावविभोर हुए भक्त
नवाबगंज के कटरा कुटी पीठ पर चल रहे रामकथा के दूसरी दिन राम-भरत मिलन की कथा सुनाई गई। कथावाचक अमरेश्वरानंद महाराज के मुखारविंद से राम-भरत मिलन की कथा सुन भक्त भाव विभोर हो गए।
कथावाचक ने कहा कि राम न सिर्फ अवतारी पुरुष के रूप में पूज्य हैं, बल्कि एक राजा के रूप में आदर्श हैं। उन्होंने जीवन के सबसे कठिन समय में मर्यादा का त्याग नहीं किया। व्यास ने कहा कि राम की पूजा इसलिए नहीं की जाती है कि हमारी भौतिक इच्छाएं पूरी हो जाए बल्कि राम की पूजा हम उनसे यह प्रेरणा लेने के लिए करते हैं कि मुश्किल क्षणों का सामना कैसे धैर्य पूर्वक बिना विचलित हुए सहजता से किया जाए। इस मौके पर राजेंद्र तिवारी, महेंद्र सिंह ,राममणि पांडेय, भुनेश्वरानंद महाराज, पं मिथिला शरण पांडेय, बबलू निषाद, अरुण सिंह, गोपाल सिंह, ओम प्रकाश गुप्ता, विनोद गुप्ता आदि रहे।