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बिना प्रधानाध्यापक के एक हजार स्कूल,पढ़ाई दांव पर

Thu, 29 Sep 2022 10:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Sep 2022 10:51 PM IST
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गोंडा। परिषदीय स्कूलों में पठन पाठन बेहतर बनाने से जुड़ी परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही। जिले में संचालित करीब एक हजार परिषदीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की तैनाती न होने को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। स्कूलों में स्थायी प्रधानाध्यापक न होने के साथ ही करीब तीन सौ विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी बच्चों की पढ़ाई में अड़चन पैदा कर रही है। इन परिषदीय विद्यालयों में बीते छह सालों से पदोन्नति प्रक्रिया अटकी पड़ी है। इस कारण योग्यता पूरी करने के बाद भी स्कूलों में तैनात सहायक अध्यापकों को खाली पदों पर तैनाती नहीं मिल पा रही है।
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प्रधानाध्यापक की तैनाती न होने वाले विद्यालयों में संचालन की पूरी जिम्मेदारी शिक्षण कार्य के साथ ही सहायक अध्यापकों को संभालनी पड़ती है। इसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त भत्ता भी नहीं दिया जाता है। जिले में 2612 परिषदीय स्कूलों में एक हजार के करीब स्कूलों में प्रधानाध्यापक ही नहीं हैं। जूनियर हाईस्कूलों में भी प्रधानाध्यापकों की कमी है। 421 जूनियर हाईस्कूलों में 387 में ही प्रधानाध्यापक हैं। 34 जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। पदोन्नति न होने से प्राथमिक स्कूलों को प्रधानाध्यापक ही नहीं मिल पा रहे हैं।
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करीब 966 स्कूलों में सहायक अध्यापकों को ही प्रधानाध्यापक का प्रभार दे दिया गया है। इससे स्कूलों के संचालन से जुड़े प्रशासनिक काम काज में भी बढ़ा अनावश्यक विवाद विद्यालयों में शिक्षण कार्य के साथ अन्य इंतजाम में परेशानी बढ़ा रहा है। ऐसे एक दर्जन से अधिक स्कूलों के मामलों की जांच का कार्य भी बीएसए स्तर पर लंबित है।
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छह साल में बनी नीति, क्रियान्वयन बाकी
करीब छह साल की लंबी समयावधि में परिषदीय विद्यालयों में सहायक शिक्षकों की प्रोन्नति को लेकर बस नीति ही तैयार हो पाई है। जिले के अंदर तबादला व समायोजन की तैयार इस नीति का क्रियान्वयन करना शायद जिम्मेदार भूल गए हैं। परेशानी से राहत दिलाने के लिए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार ने बीती 27 जुलाई को ऑनलाइन स्थानांतरण व समायोजन का आदेश भी जारी किया था, लेकिन दो माह बाद भी यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों के तबादले निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के मानक पर होने हैं। तबादलों में विद्यालय के सरप्लस शिक्षकों को ही विकल्प का मौका देने का प्रावधान है।

स्कूलों की स्थिति पर एक नजर
परिषदीय स्कूलों की संख्या - 2612
प्राथमिक विद्यालय - 1710
उच्च प्राथमिक विद्यालय - 421
कंपोजिट विद्यालय - 481
शिक्षकों की स्थिति पर एक नजर
प्रधानाध्यापक (उच्च प्राथमिक स्कूल) - 347
प्रधानाध्यापक प्राथमिक स्कूल -- 2127
सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक स्कूल - 2127
सहायक अध्यापक प्राथमिक स्कूल 5512
शिक्षामित्र 2781
अनुदेशक 444
शासन स्तर से आदेश जारी होने पर ही समायोजन या स्थानांतरण की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए शासन स्तर से एक नीति बनी भी थी। उसके आधार पर ही कार्रवाई के लिए आदेश मिलने पर इसकी प्रक्रिया को शुरू कराया जाएगा। अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए
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