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1204 पंचायत सहायकों के चयन की प्रक्रिया तेज, जल्द होगी नियुक्ति
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गोंडा। पंचायतों में कामकाज देखने के लिए 1204 गांवों में पंचायत सहायकों की नियुक्ति इसी माह होनी तय मानी जा रही है। पंचायत स्तर से पंचायत सहायकों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति प्रस्तावों का परीक्षण करके सूची जारी करेगी। इसके लिए कार्रवाई शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि अभी पंचायत सहायकों की नियुक्ति एक साल के लिए होगी। प्रधान व सचिव कार्य पर संतोष जताएंगे तो भी दो साल के लिए ही सेवाओं को बढ़ा सकेंगे।
पंचायतों की ओर से सहायकों के चयन का प्रस्ताव किया गया है। कई पंचायतों में चयन के लिए गोलमाल किए जाने की शिकायतें भी बढ़ गई हैं। कोरोना से मृतक के परिजनों को चयन में प्राथमिकता देनी थी, ऐसे में कई के प्रमाण पत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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करनैलगंज के जहांगिरवा गांव का एक मामला चर्चा मे हैं। मेरिट में शामिल युवक को बाहर करने के लिए साजिश किए जाने की चर्चा है। अधिकारियों का कहना है हर बिंदुु की गहराई से पड़ताल करके ही चयन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
हाईस्कूल और इंटर के अंकों पर मेरिट तय करके चयन की कार्रवाई प्रधान की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक कमेटी करेगी और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी अनुमोदन करेगी।
भर्ती की प्रक्रिया शिक्षामित्रों और रोजगार सेवकों की तरह ही है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि पंचायत सहायक को ही कंप्यूटर ऑपरेटर और लेखाकार का भी कार्य करना होगा। सचिवालय में उपलब्ध भी रहना होगा और मानदेय छह हजार ही मिलेगा।
पंचायतों की योजनाओं के कामकाज में सहायकों की अहम भूमिका रहेगी। वर्तमान समय में एक सचिव के जिम्मे करीब आठ गांवों का प्रभार है। सहायक मिलने के बाद उन्हेें कार्य करने में सुगमता मिलेगी और पंचायत के लोगों को राहत मिलेगी।
जरूरी कार्य वह पंचायत सहायक से कह सकेंगे और पंचायत सहायक सचिव तक बात पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही पंचायतों के डाटा अपडेट रहेंगे। इससे पंचायत सहायकों की भूमिका आम लोगों और पंचायत के बीच एक सेतु की तरह होगी।
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अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति प्रस्तावों का परीक्षण करके सूची जारी करेगी। इसके लिए कार्रवाई शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि अभी पंचायत सहायकों की नियुक्ति एक साल के लिए होगी। प्रधान व सचिव कार्य पर संतोष जताएंगे तो भी दो साल के लिए ही सेवाओं को बढ़ा सकेंगे।
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पंचायतों की ओर से सहायकों के चयन का प्रस्ताव किया गया है। कई पंचायतों में चयन के लिए गोलमाल किए जाने की शिकायतें भी बढ़ गई हैं। कोरोना से मृतक के परिजनों को चयन में प्राथमिकता देनी थी, ऐसे में कई के प्रमाण पत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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करनैलगंज के जहांगिरवा गांव का एक मामला चर्चा मे हैं। मेरिट में शामिल युवक को बाहर करने के लिए साजिश किए जाने की चर्चा है। अधिकारियों का कहना है हर बिंदुु की गहराई से पड़ताल करके ही चयन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
हाईस्कूल और इंटर के अंकों पर मेरिट तय करके चयन की कार्रवाई प्रधान की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक कमेटी करेगी और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी अनुमोदन करेगी।
भर्ती की प्रक्रिया शिक्षामित्रों और रोजगार सेवकों की तरह ही है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि पंचायत सहायक को ही कंप्यूटर ऑपरेटर और लेखाकार का भी कार्य करना होगा। सचिवालय में उपलब्ध भी रहना होगा और मानदेय छह हजार ही मिलेगा।
पंचायतों की योजनाओं के कामकाज में सहायकों की अहम भूमिका रहेगी। वर्तमान समय में एक सचिव के जिम्मे करीब आठ गांवों का प्रभार है। सहायक मिलने के बाद उन्हेें कार्य करने में सुगमता मिलेगी और पंचायत के लोगों को राहत मिलेगी।
जरूरी कार्य वह पंचायत सहायक से कह सकेंगे और पंचायत सहायक सचिव तक बात पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही पंचायतों के डाटा अपडेट रहेंगे। इससे पंचायत सहायकों की भूमिका आम लोगों और पंचायत के बीच एक सेतु की तरह होगी।