{"_id":"607331348ebc3ec39f5dcb4c","slug":"solidarity-is-necessary-for-country-and-religion-giani-satnam-singh-gonda-news-lko573758417","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश और धर्म के लिए एकजुटता जरुरी...ज्ञानी सतनाम सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देश और धर्म के लिए एकजुटता जरुरी...ज्ञानी सतनाम सिंह
विज्ञापन
गोंडा। गुरु श्री गुरु तेगबहादुर जी महाराज की 400वीं जन्म शताब्दी कस्बे के गुरुद्वारे में धूमधाम के साथ मनाई गई। इस उपलक्ष्य में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर (पंजाब) के तत्वावधान में प्रचारकों का एक जत्था स्थानीय गुरुद्वारा पहुंचा।
जत्थे में अंतर राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथावाचक ज्ञानी सतनाम सिंह जी, रुद्रपुर (उत्तराखंड) तथा अमृतसर (पंजाब) के दरबारी कीर्तनी जत्था भाई इंदरजीत सिंह सादिक की सरपरस्ती में गुरु तेग बहादुर जी की जीवन यात्रा का सारगर्भित उल्लेख किया।
एक ओंकार गुरमत सेवा ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश के संयोजक सरदार तेजपाल सिंह के दिशा निर्देश में उतर प्रदेश के विभिन्न शहरों, कस्बों तथा ग्रामीण अंचल के गुरुद्वारों में शताब्दी समारोह की लड़ी के क्रम में कथावाचक ज्ञानी सतनाम सिंह ने हिन्द की चादर गुरु तेग बहादुर जी द्वारा कश्मीरी पंडितों की गुहार पर धर्म के लिए दिए गए बलिदान का उल्लेखनीय वर्णन किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मौजूदा काल में भी देश और धर्म के लिए एकजुटता आवश्यक है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इस अवसर पर पधारे कथाकार, कीर्तनीय जत्थे तथा संगत का इस्तकबाल किया और ज्ञापित किया। अरदास के उपरांत गुरु का अटूट लंगर वितरित हुआ, जिसमें सैकड़ों की संख्या में संगतों ने प्रसाद ग्रहण किया।
विज्ञापन
जत्थे में अंतर राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथावाचक ज्ञानी सतनाम सिंह जी, रुद्रपुर (उत्तराखंड) तथा अमृतसर (पंजाब) के दरबारी कीर्तनी जत्था भाई इंदरजीत सिंह सादिक की सरपरस्ती में गुरु तेग बहादुर जी की जीवन यात्रा का सारगर्भित उल्लेख किया।
विज्ञापन
एक ओंकार गुरमत सेवा ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश के संयोजक सरदार तेजपाल सिंह के दिशा निर्देश में उतर प्रदेश के विभिन्न शहरों, कस्बों तथा ग्रामीण अंचल के गुरुद्वारों में शताब्दी समारोह की लड़ी के क्रम में कथावाचक ज्ञानी सतनाम सिंह ने हिन्द की चादर गुरु तेग बहादुर जी द्वारा कश्मीरी पंडितों की गुहार पर धर्म के लिए दिए गए बलिदान का उल्लेखनीय वर्णन किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मौजूदा काल में भी देश और धर्म के लिए एकजुटता आवश्यक है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इस अवसर पर पधारे कथाकार, कीर्तनीय जत्थे तथा संगत का इस्तकबाल किया और ज्ञापित किया। अरदास के उपरांत गुरु का अटूट लंगर वितरित हुआ, जिसमें सैकड़ों की संख्या में संगतों ने प्रसाद ग्रहण किया।