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श्याम तू मेरे सपनों में आया...
अमर उजाला/गोंडा
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:48 PM IST
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छपिया महोत्सव में जुटे भक्त
- फोटो : अमर उजाला
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मोहे कांकरिया मार के जगाया, श्याम तू मेरे सपनों में आया... मधुर गीत के साथ गुजराती लोक कलाकारों ने मंगलवार को भगवान घनश्याम के अनुयायिओं को भावविभोर कर दिया। गुजराती लोक कलाकार मायाभाई के भक्ति गीतों पर पर कथा पंडाल में मौजूद हरिभक्त झूम उठे। इसके पहले कथावाचक स्वामी नित्य स्वरूपानंद जी महराज ने हरिभक्तों को जप, तप, नियम व संयम की शिक्षा दी। महोत्सव में चौथे दिन शाम को हरिभक्तों ने मंदिर परिसर से कथा पंडाल तक भगवान की शोभायात्रा निकाली।
भगवान घनश्याम के 235वें जन्मोत्सव पर स्वामी नारायण छपिया में चार दिनों से श्रद्धा व भक्ति की अविरल धारा बह रही है। यहां आयोजित नौ दिवसीय छपिया महोत्सव में मंगलवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। गुजरात से आए लोक कलाकार माया भाई अहिर व उनकी मंडली ने गुजराती लोक गीत मोर बनी धनघाट करे व कोयल बैठी अंबालिया के डाल जैसे गीत प्रस्तुत कर लोगों को भावविभोर कर दिया।
गीतों में धर्म के महत्व का वर्णन करते हुए माया भाई ने श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति आस्था व विश्वास रखने की शिक्षा दी। गुजराती कलाकारों के तबले व ढोलक की थाप पर कथा पंडाल में हरिभक्त झूम उठे और अपने आराध्य के जन्मोत्सव में जमकर गरबा नृत्य किया। सुबह देश के कोने-कोने से आए हरिभक्तों ने पवित्र नारायण सरोवर में स्नान किया और भगवान घनश्याम की पूजा-अर्चना करते हुए विशेष आरती कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
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पूजा के बाद कथावाचक स्वामी नित्य स्वरूपानंद जी महराज ने लोगों को व्यसनों से बचने व नियम संयम के दायरे में रहकर अपना जीवन निर्वहन करने की शिक्षा दी। स्वामी जी ने कहा कि भगवान घनश्याम मदिरा व मांसाहार के घोर विरोधी थे। मदिरा पान से व्यक्ति की बुद्धि का नाश होता है और साथ ही पैसे की बर्बादी होती है।
उन्होंने स्वामी नारायण संप्रदाय के पांच प्रमुख नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि मदिरापान, मांसाहार, चोरी व व्याभिचार पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके अलावा इस संप्रदाय में वर्णाश्रम धर्म का पालन करना अनिवार्य है।
स्वामी नारायण मंदिर के महंत वासुदेवानंद जी ने कहा कि शाकाहार से मनुष्य में सात्विक बुद्धि का विकास होता है। शाम को स्वामी नारायण संप्रदाय के अनुयायिओं ने स्वामी नारायण मंदिर से कथा पंडाल तक भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा मेें दौरान स्वामी नित्य स्वरूपानंदजी, मंदिर के महंत वासुदेवानंद जी, स्वामी हरिस्वरूपानंद जी, पवित्रानंद, कथा के मुख्य यजमान आशीष भाई, रमेश भाई, मानसेता, सरजू भगत, अंबालाल, शैलेंद्र तिवारी आदि ने भाग लिया।
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भगवान घनश्याम के 235वें जन्मोत्सव पर स्वामी नारायण छपिया में चार दिनों से श्रद्धा व भक्ति की अविरल धारा बह रही है। यहां आयोजित नौ दिवसीय छपिया महोत्सव में मंगलवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। गुजरात से आए लोक कलाकार माया भाई अहिर व उनकी मंडली ने गुजराती लोक गीत मोर बनी धनघाट करे व कोयल बैठी अंबालिया के डाल जैसे गीत प्रस्तुत कर लोगों को भावविभोर कर दिया।
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गीतों में धर्म के महत्व का वर्णन करते हुए माया भाई ने श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति आस्था व विश्वास रखने की शिक्षा दी। गुजराती कलाकारों के तबले व ढोलक की थाप पर कथा पंडाल में हरिभक्त झूम उठे और अपने आराध्य के जन्मोत्सव में जमकर गरबा नृत्य किया। सुबह देश के कोने-कोने से आए हरिभक्तों ने पवित्र नारायण सरोवर में स्नान किया और भगवान घनश्याम की पूजा-अर्चना करते हुए विशेष आरती कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
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पूजा के बाद कथावाचक स्वामी नित्य स्वरूपानंद जी महराज ने लोगों को व्यसनों से बचने व नियम संयम के दायरे में रहकर अपना जीवन निर्वहन करने की शिक्षा दी। स्वामी जी ने कहा कि भगवान घनश्याम मदिरा व मांसाहार के घोर विरोधी थे। मदिरा पान से व्यक्ति की बुद्धि का नाश होता है और साथ ही पैसे की बर्बादी होती है।
उन्होंने स्वामी नारायण संप्रदाय के पांच प्रमुख नियमों की जानकारी देते हुए बताया कि मदिरापान, मांसाहार, चोरी व व्याभिचार पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके अलावा इस संप्रदाय में वर्णाश्रम धर्म का पालन करना अनिवार्य है।
स्वामी नारायण मंदिर के महंत वासुदेवानंद जी ने कहा कि शाकाहार से मनुष्य में सात्विक बुद्धि का विकास होता है। शाम को स्वामी नारायण संप्रदाय के अनुयायिओं ने स्वामी नारायण मंदिर से कथा पंडाल तक भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा मेें दौरान स्वामी नित्य स्वरूपानंदजी, मंदिर के महंत वासुदेवानंद जी, स्वामी हरिस्वरूपानंद जी, पवित्रानंद, कथा के मुख्य यजमान आशीष भाई, रमेश भाई, मानसेता, सरजू भगत, अंबालाल, शैलेंद्र तिवारी आदि ने भाग लिया।