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कटान की चपेट में कई गांव
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2015 11:13 PM IST
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पांच दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। राप्ती का जलस्तर तो कम है, लेकिन नदी की कटान तेज हो गई है। इससे कोड़रीघाट पुल के एप्रोच मार्ग सहित कई गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। नेपाली पानी छोड़े जाने की आशंका से प्रशासन सतर्क हो गया है।
सदर एसडीएम व पुलिस की टीम ने कोड़रीघाट पुल का निरीक्षण कर कटान रोकने के उपाय शुरू करवा दिए हैं। पहाड़ी नालों में भी लगातार बारिश से उफान आने की संभावना बढ़ गई है। राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार को सुबह 101.890 मीटर पर था जो कि खतरे के निशान से करीब पौने दो मीटर नीचे है।
केंद्रीय जल आयोग की इकाई सिसई घाट बलरामपुर के मुताबिक नदी के जलस्तर में मामूली वृद्धि पिछले दिनों दर्ज की गई थी। सोमवार को नदी का जलस्तर घट रहा था। इससे नदी में कटान तेज हो गई है। कोड़री घाट पुल के एप्रोच मार्ग व गाइड बांध में हो रही कटान के चलते पुल के अस्तित्व पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है।
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जून के प्रथम सप्ताह में प्रदेश सरकार के लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने कोड़रीघाट का दौरा कर कटान आदि रोकने का निर्देश भी दिया था, लेकिन आज तक कोई काम नहीं हुआ। सोमवार को कटान तेज होने पर सदर एसडीएम इंदुभूषण वर्मा ने मौके का निरीक्षण कर तटबंध सुरक्षित रखने का काम शुरू करवाया है।
पुलिस की टीम भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राप्ती की कटान के कारण उतरौला तहसील क्षेत्र के कुडऊ बौडिहार, बभनपुरवा, अल्लीपुर बुजुर्ग, फत्तेपुर, गोनकोट, महुवाधनी, लालनगर व बिरिदा बनियाभारी समेत दो दर्जन गांव कटान की जद में आ गए हैं।
क्षेत्रवासी शहजाद, मोहम्मद अहमद, निसार, असगर अली, शकील व समीउल्लाह आदि ने बताया कि शासन प्रशासन हर साल नदी की तबाही रोकने का आश्वासन बाढ़ के दौरान तो देता है, लेकिन बाढ़ खत्म होते ही सब चुप्पी साध लेते हैं।
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सदर एसडीएम व पुलिस की टीम ने कोड़रीघाट पुल का निरीक्षण कर कटान रोकने के उपाय शुरू करवा दिए हैं। पहाड़ी नालों में भी लगातार बारिश से उफान आने की संभावना बढ़ गई है। राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार को सुबह 101.890 मीटर पर था जो कि खतरे के निशान से करीब पौने दो मीटर नीचे है।
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केंद्रीय जल आयोग की इकाई सिसई घाट बलरामपुर के मुताबिक नदी के जलस्तर में मामूली वृद्धि पिछले दिनों दर्ज की गई थी। सोमवार को नदी का जलस्तर घट रहा था। इससे नदी में कटान तेज हो गई है। कोड़री घाट पुल के एप्रोच मार्ग व गाइड बांध में हो रही कटान के चलते पुल के अस्तित्व पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है।
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जून के प्रथम सप्ताह में प्रदेश सरकार के लोक निर्माण एवं सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने कोड़रीघाट का दौरा कर कटान आदि रोकने का निर्देश भी दिया था, लेकिन आज तक कोई काम नहीं हुआ। सोमवार को कटान तेज होने पर सदर एसडीएम इंदुभूषण वर्मा ने मौके का निरीक्षण कर तटबंध सुरक्षित रखने का काम शुरू करवाया है।
पुलिस की टीम भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। राप्ती की कटान के कारण उतरौला तहसील क्षेत्र के कुडऊ बौडिहार, बभनपुरवा, अल्लीपुर बुजुर्ग, फत्तेपुर, गोनकोट, महुवाधनी, लालनगर व बिरिदा बनियाभारी समेत दो दर्जन गांव कटान की जद में आ गए हैं।
क्षेत्रवासी शहजाद, मोहम्मद अहमद, निसार, असगर अली, शकील व समीउल्लाह आदि ने बताया कि शासन प्रशासन हर साल नदी की तबाही रोकने का आश्वासन बाढ़ के दौरान तो देता है, लेकिन बाढ़ खत्म होते ही सब चुप्पी साध लेते हैं।