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मनरेगा के ढाई करोड़ बजट खपाने के खेल में फंसे सात सचिव

Sun, 16 Aug 2020 10:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 16 Aug 2020 10:09 PM IST
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Seven secretaries caught in the game of spending 2.5 crores budget of MNREGA
गोंडा। जिले के बहुचर्चित ब्लॉक नवाबगंज में लॉकडाउन के दौरान ढाई करोड़ के घपले की तैयारी हुई थी। फर्जी बिल बाउचर फीड करके दो करोड़ 52 लाख के भुगतान के तैयारी का खेल हुआ था। भुगतान निकालने के ठीक पहले ऑनलाइन निगरानी से मामला पकड़ में आ गया था और सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने जांच बैठा दी थी। जांच की जानकारी होते ही भुगतान के लिए की गई फीडिंग को ही हड़बड़ी में डिलीट कर दिया गया। इससे घपले के तैयारी की पुष्टि हो गई। इसके बाद सीडीओ ने मनरेगा में बिना काम के भुगतान लेने के प्रयास की जांच की और पूरे खेल में अहम भूमिका निभाने वाले एपीओ अकील अहमद को बर्खास्त कर दिया। इसके साथ ही पूरे खेल में शामिल रहे सात सचिवों को चिहिन्त किया गया है। जिनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि सचिवों के विरुद्ध पंचायत राज व ग्राम्य विकास विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा गया है।
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लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों के बकाए के भुगतान की कार्रवाई प्रदेश सरकार के निर्देश पर शुरू हुई थी। शासन ने लॉकडाउन के चलते उन श्रमिकों को मजदूरी देने का आदेश दिया था, जिन्होंने मनरेगा में काम किया है लेकिन बजट न होने से भुगतान नहीं हो पाया है। इसके लिए ब्लॉकों में बकाए के भुगतान की मनेरगा वेबसाइट पर फीडिंग शुरू हुई। नवाबगंज ब्लॉक में 29 अप्रैल को दो करोड़ 52 लाख रुपये की फीडिंग की गई। इसमें दो करोड़ 11 लाख 46 हजार रुपये की फीडिंग को बाद में डिलीट कर दिया गया।
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बताया जा रहा है कि यह फीडिंग इसलिए डिलीट कर दिया गया क्योंकि बिना काम कराए ही भुगतान लिए जाने की तैयारी थी। यही नही श्रमिकों के भुगतान के बजाए यह सामग्री अंश के भुगतान के लिए की गई फीडिंग थी। इसकी जानकारी होने पर सीडीओ ने उसी समय ब्लॉक के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी अकील अहमद को ब्लॉक से हटाकर विकास भवन से संबद्ध कर दिया था और पूरे मामले की जांच की। जांच में यह बात सामने आई कि भुगतान लेने के इस खेल में ब्लॉक के कर्मचारियों के साथ ही पंचायतों के सचिव भी शामिल हैं। सीडीओ ने अब पूरे खेल में शामिल कर्मियों के विरुद्ध भी कार्रवाई शुरू कर दी है। उनका कहना है कि ठीक है कि फर्जी भुगतान नही हो पाया, लेकिन मनरेेगा के नियमों के विपरीत कार्य करने वालों के विरुद्ध नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभागों को पत्र लिखा गया है।
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ब्लॉक के कर्मियों के साथ ही बीडीओ की भूमिका पर भी सवाल
नवाबगंज ब्लॉक में मनरेगा के भुगतान में हेराफेरी के प्रयास मामले में ब्लाक के कर्मियों की भी मिलीभगत थी। सीडीओ को पहले कर्मचारियों ने स्पष्टीकरण में गुमराह करने का प्रयास भी किया और दबाव भी बनाया। इसके बाद सीडीओ ने बीडीओ के साथ ही अन्य कर्मियों को सीधे विकास भवन तलब किया। सभी से पूछताछ किया तो खेल सामने आया। इसमें तत्कालीन बीडीओ कृष्ण कुमार सिंह बीडीओ की भूमिका भी संदिग्ध मिली है जो इस समय रायबरेली जनपद में तैनात हैं। उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है, इसके अलावा लेखाकार कन्हैया लाल व सहायक लेखाकार राकेश चक्रवर्जी को भी प्रतिकूल प्रविष्टि मिली है। इनके साथ ही सात सचिवों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए जिला पंचायत अधिकारी व जिला विकास अधिकारी ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
नहीं होती सतर्कता तो मनरेगा में फिर होता बड़ा घोटाला
नवाबगंज ब्लॉक में जिस तरह मनरेगा के बजट से फर्जीवाड़ा करके ढाई करोड़ के करीब का भुगतान लेने का प्रयास हुआ वह सतर्कता के चलते पूरा नहीं हो पाया था। लॉकडाउन के समय ऐसी कोशिश का किसी को आभास नही था। लेकिन नवाबगंज ब्लॉक में कुछ खेल हो रहा है, इसकी भनक पहले से ही प्रशासन को लग गई थी। जिसके चलते घोटाला होने से बच गया। जिले को एक बार बड़ी बदनामी का दाग लगने से तो मुक्ति मिल गई लेकिन घोटालेबाजों की निगाहें अभी भी टिकी हुई हैं।

मनरेगा में गड़बड़ी करने का प्रयास तो विफल हो गया था, लेकिन जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई किया जाना आवश्यक है। एपीओ की सीधी भूमिका थी इसलिए उसे बर्खास्त किया गया है और तत्कालीन बीडीओ व अन्य कर्मियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। सात सचिव भी दंडित होंगे। इसके लिए ब्लॉक के कामकाज पर नोडल अधिकारी की नजर रहेगी। -शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
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