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घपलों से पंचायतों में झूल रही है मनरेगा

Mon, 29 Nov 2021 10:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 29 Nov 2021 10:33 PM IST
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Screws on disturbances in MNREGA, more than two hundred panchayats under siege
गोंडा में रूपईडीह ब्लाक के गांव में मनरेगा योजना से बनी सड़क की नाप करते कर्मचारी। - फोटो : GONDA
गोंडा। श्रमिकों को रोजगार देने और पंचायतों में विकास की गंगा बहाने के लिए चल रही मनरेगा योजना के कार्यों में व्याप्त गड़बड़ी रोकने को प्रशासन का शिकंजा कसने लगा है। इसके तहत हर ब्लाक की पंचायतों में दो वित्तीय वर्ष में हुए कार्यों का स्थलीय सत्यापन कर जांच रिपोर्ट तैयार हो रही है। इसके घेरे में फिलहाल दो सौ ग्राम पंचायतों को लिया गया है। इसकी जानकारी के बाद से पंचायतों में खलबली है।
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पंचायतों में चल रही मनमानी से मनरेगा से जुड़े कार्य भी पटरी से उतरने लगे हैं। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए 200 से अधिक पंचायतों में हुए मनरेगा कार्यों को लिया गया है। इसके तहत ब्लाक स्तर पर गठित टीमों ने वित्तीय वर्ष 2019-2020 व 2020-2021 में हुए मनरेगा कार्यों की सत्यापन जांच भी शुुरू कर दी है।
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इस दौरान कई परियोजनाओं में बिना कार्य कराए ही आवंटित बजट का पैसा निकालने का मामला भी सामने आया है। इसकी अंतिम सत्यापन रिपोर्ट अभी तैयार होना बाकी है। इससे पूर्व पंडरीकृपाल ब्लाक की ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2017-18 व 2018-19 में मनरेगा के तहत हुआ फर्जीवाड़ा ऐसी ही जांच में उजागर हुआ था।
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वहीं मनरेगा में बिना कार्य कराए ही 37.74 लाख रुपये भुगतान करने के मामले में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर मनरेगा (अब बलिया में तैनात) समेत सात के खिलाफ गबन का मुकदमा कराया गया है। इस मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी निलंबित भी हो चुके हैं।
मनरेगा के दौरान कई ग्राम पंचायतों में बेहतर काम काज करने से इसकी सूरत भी बदली है। कटरा बाजार के भगहरिया पंचायत में मनरेगा को जोड़कर पंचायत भवन का निर्माण कराया गया वहीं छावनी सरकार में टेढ़ी नदी की सफाई के साथ ही विकास पार्क का निर्माण कराया जा रहा है।
इसके अलावा इंटियाथोक के करूवा पारा में पूर्व में पंचायत ने एक पर्यटक स्थल का विकास कराया गया है। यही नही बेलसर के बदलेपुर की गौशाला का कार्य भी प्रदेश स्तर पर प्रशंसा पा चुका है।
मनरेगा में साइन बोर्ड कार्य स्थल पर अनिवार्य है। इसके लिए चार हजार से पांच हजार रुपये खर्च अनुमन्य है। जिले में बीते दो सालों में संचालित की गईं परियोजनाओं में पंचायतों ने बड़े खेल किये हैं।

बिना साइन बोर्ड कार्य स्थल पर लगवाए ही भुगतान ले लिया है। यही नही अगर कहीं लगवाया भी है तो उसमें कोई जानकारी भी अंकित नही की गई है। जिससे साइन बोर्ड लगवाए जाने का कोई औचित्य ही नही रह गया है। माना जा रहा है कि मनरेगा कार्य में साइन बोर्ड अनिवार्य है।
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