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यातायात माह में जिम्मेदार ही उड़ा रहे नियमों की धज्जियां 18-55-04
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गोंडा। सड़क सुरक्षा व यातायात नियमों का पालन करने के लिए लोगों को जागरुक करने के इरादे से महीनें भर चला सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान का असर दिखाई नहीं पड़ रहा है। सड़कों पर ट्रिपलिंग करने के साथ वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करते नजर आ रहे हैं। अभियान के दौरान भी लोग यातायात नियमों को तोड़ रहे है।
18 जनवरी से 17 फरवरी तक एक महीने तक चले सड़क सुरक्षा माह में परिवहन विभाग भले ही विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम करने का दावा कर रहा हो। इसके बावजूद यातायात व्यवस्था में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। शहरियों के साथ ही जिम्मेदार लोग भी यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
कहीं बाइक पर लोग तीन व चार सवारी बैठाकर फर्राटे भरते तो कहीं अपनी जान हथेली पर रखकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सैकड़ों लोग यात्रा करते नजर आ रहे हैं। वहीं बाजार में व्यापारियों ने रोड किनारे ही पार्किंग बना रखी है। जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
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यातायात पुलिस इन पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है। शहर में यातायात माह अपने उद्देश्यों से भटकता दिखाई दे रहा है। सिस्टम की लापरवाही के चलते शहर की यातायात व्यवस्था चौपट है। हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। नियम और कानून को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रहे वाहन यातायात माह पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
कुछ स्थानों पर पुलिस की चेकिंग के अलावा शहर में कहीं पर भी ऐसी गतिविधि दिखाई नहीं दे रही, जिससे लोगों को यातायात के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराती हो। यातायात माह का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को मजबूत करने के साथ आम लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करना है।
प्रत्येक वर्ष इसका आगाज होता है ताकि शहर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। मगर एक माह तक चले यातायात माह में जागरूकता अभियान के बाद भी लोग यातायात नियमों को तोड़ने नहीं चूक रहे है।
यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने व लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी जिनके कंधे पर है। वो खुद ही यातायात नियमों को तोड़ रहे हैं। पुलिस विभाग के अधिकांश सिपाही यातायात नियमों का पालन नहीं करते। दूसरों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने वाले खुद बाइक पर तीन सवारी बैठाकर फर्राटे भरते रहते हैं। राहों पर मोबाइल कान में लगाकर सिपाही बाइक चलाते हैं। अगर इनकी गलती से भी किसी वाहन में बाइक छू जाए तो उल्टे उसकी ही पिटाई कर देते हैं।
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18 जनवरी से 17 फरवरी तक एक महीने तक चले सड़क सुरक्षा माह में परिवहन विभाग भले ही विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम करने का दावा कर रहा हो। इसके बावजूद यातायात व्यवस्था में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। शहरियों के साथ ही जिम्मेदार लोग भी यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं।
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कहीं बाइक पर लोग तीन व चार सवारी बैठाकर फर्राटे भरते तो कहीं अपनी जान हथेली पर रखकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सैकड़ों लोग यात्रा करते नजर आ रहे हैं। वहीं बाजार में व्यापारियों ने रोड किनारे ही पार्किंग बना रखी है। जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
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यातायात पुलिस इन पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है। शहर में यातायात माह अपने उद्देश्यों से भटकता दिखाई दे रहा है। सिस्टम की लापरवाही के चलते शहर की यातायात व्यवस्था चौपट है। हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। नियम और कानून को ताक पर रखकर सड़कों पर दौड़ रहे वाहन यातायात माह पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
कुछ स्थानों पर पुलिस की चेकिंग के अलावा शहर में कहीं पर भी ऐसी गतिविधि दिखाई नहीं दे रही, जिससे लोगों को यातायात के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराती हो। यातायात माह का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को मजबूत करने के साथ आम लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करना है।
प्रत्येक वर्ष इसका आगाज होता है ताकि शहर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। मगर एक माह तक चले यातायात माह में जागरूकता अभियान के बाद भी लोग यातायात नियमों को तोड़ने नहीं चूक रहे है।
यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने व लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी जिनके कंधे पर है। वो खुद ही यातायात नियमों को तोड़ रहे हैं। पुलिस विभाग के अधिकांश सिपाही यातायात नियमों का पालन नहीं करते। दूसरों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने वाले खुद बाइक पर तीन सवारी बैठाकर फर्राटे भरते रहते हैं। राहों पर मोबाइल कान में लगाकर सिपाही बाइक चलाते हैं। अगर इनकी गलती से भी किसी वाहन में बाइक छू जाए तो उल्टे उसकी ही पिटाई कर देते हैं।