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4 किमी बांध पर चार साल में खर्च किए 80 करोड़

Fri, 12 Aug 2016 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा Updated Fri, 12 Aug 2016 11:22 PM IST
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Rs80 crore spent in the four years at the 4 km dam
बाढ़ के बीच पानी निकालता ‌ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं जब बर्तन में छेद हो जाए तो उसमेे चाहे जितना भी पानी क्यों न डाला जाए. पानी का बहना बंद नहीं होता। कुछ ऐसा ही हाल 4 दिन पहले रायपुर गांव के पास कटे एल्गिन-चरसड़ी बांध का भी रहा है।
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जिसके 4 किलोमीटर डेंजर जोन की मरम्मत बीते चार साल के भीतर तकरीबन 80 करोड़ रुपये से की गई। लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार बंधे को नहीं बचा पाए और अंतत: बंधा कट ही गया।
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जबकि 52 किलोमीटर लंबे इस बांध के बाकी हिस्सों की मरम्मत महज 15 करोड़ रुपये में हुई जो अभी तक बरकरार है। साल 2007 में एल्गिन-चरसड़ी के नाम से पूर्व राज्यमंत्री योगेश प्रताप के प्रयासों से बंधा बनने जाने के तीन साल बाद ही वर्ष 2010 में कट गया। जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी।
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जबकि बाढ़ की त्रासदी से 60 गांवों की डेढ़ लाख आबादी को महीनों पानी कम होने तक जूझना पड़ा। वहीं 2011 में एल्गिन-चरसड़ी और उसे महफूज करने के लिए बनाया गया एल्गिन रिंग बांध फिर टूट गया। जिसकी चपेट में आने से कुल 11 लोगों की जानें गई। हालांकि वर्ष 2012, 13 और 2014 में नदी की धाराओं का रुख शांत रहा। जिससे बंधा कटा नहीं।

लेकिन 2015 की शुरुआत में बंधा एक तिहाई से ज्यादा कट गया। लेकिन तभी नदी का जलस्तर एकदम से शांत हो गया, जिससे सब कुछ ठीक रहा। जबकि इस साल वर्ष 2011 की ही तरह एक बार फिर से एल्गिन-चरसड़ी बांध दो बार कटा। पहली बार नदी ने एल्गिन-चरसड़ी मुख्य बांध को निशाना बनाया तो दूसरी बार उसके किनारे बने रिंगबांध को भी काट दिया।

वर्ष 2010 से वर्ष 2016 के बीच बंधे के कटने की यह सारी घटनाएं महज केवल 4 किलोमीटर की दूरी में रायपुर से परसावल गांव के बीच हुई। जिसकी मरम्मत के नाम पर चार साल में तकरीबन 80 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग ने बहा डाले।  

5 साल पहले एडीएम ने बांध बचाव को ठहराया था गलत
पांच साल पहले तत्कालीन अपर जिलाधिकारी सुखलाल भारती ने एल्गिन-चरसड़ी बांध के मरम्मत की योजना और उसके नाम पर होने वाली धांधली का पर्दाफाश करते हुए इसकी पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। जिसमें बांध बचाव के नाम पर होने वाली लूट का भंडाफोड़ किया गया था।


साथ ही बांध बचाव के नाम पर की जा रही खानापूरी से होने वाली तबाही का मुद्दा भी उठाया था। लेकिन उनकी इस रिपोर्ट पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई। वहीं गुरुवार को जब सिंचाई मंत्री जिले में बाढ़ पीड़ितों का हाल लेने आए तो उन्होंने भी पहले से तय इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई के अपने प्लान को बदल दिया और बस जांच का आश्वासन देकर चलते बने।
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