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प्रदूषण जांच के नाम पर वाहन मालिकों की कट रही जेब

Thu, 19 Sep 2019 10:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 10:45 PM IST
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Recovery from vehicle owners in the name of pollution investigation
गोंडा में आरटीओ कार्यालय के निकट बाबा प्रदूषण जांच केंद्र पर लगी वाहन मालिकों व चालकों की भीड़। - फोटो : GONDA
गोंडा। मोटर वाहन अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार के निर्णय के बाद फ्रेंचाइजी संचालकों की चांदी हो गई है। केंद्र सरकार ने नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने की रकम भी बढ़ा दी। इससे फ्रेंचाइजी संचालक वाहन मालिकों को प्रदूषण की जांच के नाम पर लूट रहे हैं। सरकारी फीस से कई गुना अधिक रकम वाहन मालिकों से वसूली जा रही है। इनमें सरकारी फीस के अलावा जांच की अलग से कीमत वसूली जा रही है। जानकारी के अभाव में वाहन मालिकों व चालकों की जेब कट रही है।
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बता दें कि केंद्र सरकार ने हाल ही में सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर नियंत्रण के लिए यातायात नियमों में बदलाव करते हुए यातायात नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने की रकम बढ़ा दी है। हालांकि सूबे में अभी भी केंद्र सरकार का यह आदेश लागू नहीं हुआ है। मगर उससे पहले ही चेकिंग के नाम पर वसूली की शिकायतें आने लगीं। वाहन मालिक व चालक अवैध वसूली से बचने के लिए अपने वाहनों के कागजात दुरुस्त करने में लगे हैं। जनपद में अधिकांश वाहन मालिक व चालक अभी तक बिना प्रदूषण जांच के सड़कों पर अपने वाहन दौड़ा रहे थे। मगर अब जांच के डर से सभी वाहनों के कागजात दुरुस्त करने में जुटे हैं। सबसे ज्यादा प्रदूषण जांच केंद्रों पर जांच प्रमाण पत्र पाने को वाहन मालिकों व चालकों की भीड़ जुटने लगी है।
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अमर उजाला ने प्रदूषण जांच केंद्रों का हाल जानने को गुरुवार को पड़ताल की तो चौंकाने वाली बात सामने आई। प्रदूषण जांच केंद्रों पर वाहन मालिकों एवं चालकों से केंद्र संचालक सरकारी फीस से कई गुना अधिक रकम वसूलते पाए गए। सिविल लाइंस स्थित एक प्रदूषण जांच केंद्र पर पेट्रोल कार की सरकारी फीस 30 के बजाए 50 रुपये की वसूली होते मिली। इसके अलाव प्रदूषण की जांच के लिए वाहन मालिक को 100 रुपये अलग से देने पड़े। ऐसी ही शिकायतें जिले के पांचों प्रदूषण केंद्रों पर मिल रही हैं। यहां वाहन मालिकों व चालकों से अधिक वसूली की जा रही है। मगर किसी भी केंद्र की संभागीय परिवहन अधिकारियों ने चेकिंग नहीं की है।
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फैक्ट फाइल-
प्रदूषण प्रमाण पत्र की सरकारी फीस
बाइक एवं स्कूटी-30 रुपये
पेट्रोल वाहन-30 रुपये
डीजल वाहन-50 रुपये
प्रदूषण जांच की कीमत
बाइक एवं स्कूटी-60 रुपये
पेट्रोल वाहन-100 रुपये
डीजल वाहन-150 रुपये
नहीं आया शासनादेश
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाहन चेकिंग में वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए भले ही पुलिस से वाहन चेकिंग करने का अधिकार छीन लिया है। मगर अभी भी पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही है। चेकिंग में जुर्माने से अधिक रकम से देने से बचने के लिए वाहन मालिक व चालक अपने कागजात पूरे करने में लगे हैं। हालांकि की सीएम का आदेश का शासनादेश अभी जनपद में आया नहीं है। यही कारण है कि अभी पुलिस वाहनों की चेकिंग कर रही है।
आईजीआरएस में कर सकते हैं शिकायत
वाहन मालिक व चालक प्रदूषण के नाम अधिक वसूली की शिकायत आईजीआरएस में कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें किसी भी साइबर ढाबे पर जाकर सीएम के पोर्टल की साइट खोलकर अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी। इस पर शिकायत के बाद उन्हें शिकायत के निस्तारण की रिपोर्ट ऑनलाइन मिलेगी। इसके साथ ही शिकायतकर्ता अपने मोबाइल फोन से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैँ।

वाहनों के प्रदूषण की जांच के लिए जनपद में पांच प्रदूषण जांच केंद्र खोले गए हैं। जहां वाहन मालिक अपने वाहनों की जांच कराते हैं। सभी पांचों केंद्रों पर टाइप एप्रूव मशीन लगी है। जिससे जांच की जाती है। जांच के बाद केंद्र संचालक वाहन मालिक को प्रदूषण प्रमाण पत्र देते हैं। जांच केंद्रों पर सरकारी फीस से अधिक रुपये वसूलने की अभी तक किसी वाहन मालिक ने लिखित शिकायत नहीं की है। शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -संजीव कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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