{"_id":"6340639f2f9409442f74241b","slug":"rain-gonda-flud-heavy-gonda-news-lko651812650","type":"story","status":"publish","title_hn":"आफत बनी बारिश, धान व गन्ने की फसलों को भारी नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आफत बनी बारिश, धान व गन्ने की फसलों को भारी नुकसान
विज्ञापन
गोंडा। जिले में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश से जन जीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया। इस बारिश से धान व गन्ना की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इससे करीब 80 हजार हेक्टेयर में लगी धान की फसल पानी में डूबी है, वही करीब एक लाख हेक्टेयर में लगी गन्ने की फसल खेतों में धराशायी हो गई। जिले के पांच लाख किसानों की मुसीबत को इस बरसात ने कई गुना बढ़ा दिया है।
जिले में चार लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान रबी, खरीफ व जायद की खेती करते हैं। इसमें दो लाख हेक्टेयर में इस बार धान की रोपाई की गई थी। एक जून से लेकर 15 सितंबर तक मात्र तीस फीसदी ही बारिश होने और सिंचाई के पर्याप्त संसाधन न होने से खेतों में लगी फसलें पहले सूखने की कगार पा आ गई थी। किसी तरह महंगा डीजल खर्च कर फसल को खेतों में खड़ा किया है। अब जब फसल के पक कर तैयार होने का समय आया तो बेमौसम हुई इस भारी बारिश ने किसानों के बची हुई उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।
तीन दिनों में 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश से किसानों के धान की फसल खेतों में गिर कर पानी में डूब गई है। साथ ही करीब एक लाख हेक्टेयर में लगी गन्ने की फसल खेतों में गिर गई है। मनकापुर के नवड़ीहवा के किसान रामभवन मौर्य ने बताया कि धान की फसल कटने के लिए तैयार है, ऐसे में बारिश के चलते धान खेतों में गिर गया है। मनकापुर के किसुनदासपुर निवासी बाबूराम वर्मा ने बताया कि उनका पांच बीघा धान कटने के लिए तैयार था। फसल खेत में गिरकर नष्ट हो गई है। इंद्रापुर के किसान रामजनम ने बताया कि तीन दिनों से हो रही बारिश ने सारी फसल चौपट कर दी। लगभग 50 प्रतिशत धान बेकार हो गया है। वहीं बारिश के चलते धान की फसल अब बर्बादी की कगार पर पहुंचने से नुकसान के साथ चारे का संकट भी गहराने की आशंका है। भूसा वर्तमान में करीब 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है।
विज्ञापन
तीसरे दिन भी गुल रही गांवों में बिजली
मंगलवार रात से जारी बारिश के कारण ध्वस्त हुई बिजली सप्लाई व्यवस्था पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है। तारों पर गिरे दर्जनों पेड़ व क्षतिग्रस्त हुए 150 से अधिक बिजली पोलों के कारण बाधित हुई बिजली आपूर्ति को शहरी इलाकों में तो 24 घंटे के दौरान शुरू करा दी गई लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट अभी भी व्याप्त है।
बेमौसम हुई भारी बरसात ने खेती किसानी को पूरी तरह चौपट कर दिया है। सबसे अधिक नुकसान धान गन्ना व मौसमी सब्जियों की खेती को हुआ है। फिलहाल 11 अक्तूबर तक मौसम खराब रहने की आशंका है। डॉ. उपेंद्र सिंह, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम
विज्ञापन
जिले में चार लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान रबी, खरीफ व जायद की खेती करते हैं। इसमें दो लाख हेक्टेयर में इस बार धान की रोपाई की गई थी। एक जून से लेकर 15 सितंबर तक मात्र तीस फीसदी ही बारिश होने और सिंचाई के पर्याप्त संसाधन न होने से खेतों में लगी फसलें पहले सूखने की कगार पा आ गई थी। किसी तरह महंगा डीजल खर्च कर फसल को खेतों में खड़ा किया है। अब जब फसल के पक कर तैयार होने का समय आया तो बेमौसम हुई इस भारी बारिश ने किसानों के बची हुई उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।
विज्ञापन
तीन दिनों में 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश से किसानों के धान की फसल खेतों में गिर कर पानी में डूब गई है। साथ ही करीब एक लाख हेक्टेयर में लगी गन्ने की फसल खेतों में गिर गई है। मनकापुर के नवड़ीहवा के किसान रामभवन मौर्य ने बताया कि धान की फसल कटने के लिए तैयार है, ऐसे में बारिश के चलते धान खेतों में गिर गया है। मनकापुर के किसुनदासपुर निवासी बाबूराम वर्मा ने बताया कि उनका पांच बीघा धान कटने के लिए तैयार था। फसल खेत में गिरकर नष्ट हो गई है। इंद्रापुर के किसान रामजनम ने बताया कि तीन दिनों से हो रही बारिश ने सारी फसल चौपट कर दी। लगभग 50 प्रतिशत धान बेकार हो गया है। वहीं बारिश के चलते धान की फसल अब बर्बादी की कगार पर पहुंचने से नुकसान के साथ चारे का संकट भी गहराने की आशंका है। भूसा वर्तमान में करीब 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है।
विज्ञापन
तीसरे दिन भी गुल रही गांवों में बिजली
मंगलवार रात से जारी बारिश के कारण ध्वस्त हुई बिजली सप्लाई व्यवस्था पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है। तारों पर गिरे दर्जनों पेड़ व क्षतिग्रस्त हुए 150 से अधिक बिजली पोलों के कारण बाधित हुई बिजली आपूर्ति को शहरी इलाकों में तो 24 घंटे के दौरान शुरू करा दी गई लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट अभी भी व्याप्त है।
बेमौसम हुई भारी बरसात ने खेती किसानी को पूरी तरह चौपट कर दिया है। सबसे अधिक नुकसान धान गन्ना व मौसमी सब्जियों की खेती को हुआ है। फिलहाल 11 अक्तूबर तक मौसम खराब रहने की आशंका है। डॉ. उपेंद्र सिंह, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम