{"_id":"6402c2ea0cd51d1752051a24","slug":"railway-crossing-gonda-gonda-news-c-13-1-113200-2023-03-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: एक दिन में 17 बार बंद होती क्रॉसिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: एक दिन में 17 बार बंद होती क्रॉसिंग
Sat, 04 Mar 2023 09:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 04 Mar 2023 09:32 AM IST
विज्ञापन
गोंडा। बलरामुपर मार्ग स्थित सुभागपुर रेलवे क्रॉसिंग हर रोज करीब तीन लाख राहगीरों का दर्द बढ़ाती है। कार्यालय जाने वाले लोग, स्कूली बच्चे, एंबुलेंस में गंभीर मरीजों के साथ अफसरों व जनप्रतिनिधियों को जाम की परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। हर रोज 17 बार क्रॉसिंग बंद होती है और खुलने में औसतन 15 मिनट का समय लगता है। औसतन प्रतिदिन साढ़े चार घंटे का समय लोगों का क्रॉसिंग पर बीतता है।
गोंडा से बलरामपुर होते हुए नेपाल बार्डर तक का यात्रा करने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा राह का रोड़ा सुभागपुर रेलवे क्रॉसिंग बन चुकी है। क्रॉसिंग के ठीक बगल मालगोदाम बना दिया है। सवारी गाड़ी के अलावा मालगाड़ी के कई फेरे बढ़ गए। गोंडा की ओर चंटू बाबा मंदिर तक तथा बलरामपुर की ओर आदित्य फ्लोर मिल तक करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है।
सुबह से लेकर शाम तक बार-बार क्रासिंग बंद होती है। सबसे अधिक परेशानी कार्यालय जाने वाले लोग तथा स्कूली बच्चों को होती है। ड्यूटी करने वाले लोग अक्सर कार्यक्षेत्र पर देरी से पहुंचते हैं। इटियाथोक, बहलोलपुर, पड़रीकृपाल क्षेत्र से मुख्यालय पर करीब 50 हजार बच्चे स्कूल आते हैं। जाम की वजह से उन्हें देरी हो जाती तथा,जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
विज्ञापन
एंबुलेंस में तड़पते मरीज, जाम में फंसे रहते विधायक
- बलरामपुर रोड पर दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्थित हैं। जहां से गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। बलरामपुर जिले से भी गंभीर मरीजों को मुख्यालय के निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। सुभागपुर रेलवे क्रॉसिंग उनके जान का जोखिम बढ़ा देती है। बलरामपुर व मेहनौन विधायकों का काफिला भी अक्सर क्रॉसिंग पर फंस जाता है। बलरामपुर विधायक पल्टूराम व मेहनौन विधायक विनय कुमार द्विवेदी अपने गोंडा आवास से विधानसभा क्षेत्र में जाते हैं, जिनको अक्सर क्रॉसिंग के जाम में फंसना पड़ रहा है।
अभी नहीं मिली वित्तीय स्वीकृति
-सुभागपुर रेलवे क्रॉसिंग से लाखों लोग आजिज हैं। करीब पांच साल पहले मालगोदाम बना तभी से ओवरब्रिज की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है। हालांकि गोंडा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ओवरब्रिज के लिए प्रस्ताव भेजने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इस बार भी बजट में राहगीरों को निराशा हाथ लगी।
वर्जन
-- सुभागपुर क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलते ही पुल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
-मनीष कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक रेलवे
विज्ञापन
गोंडा से बलरामपुर होते हुए नेपाल बार्डर तक का यात्रा करने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा राह का रोड़ा सुभागपुर रेलवे क्रॉसिंग बन चुकी है। क्रॉसिंग के ठीक बगल मालगोदाम बना दिया है। सवारी गाड़ी के अलावा मालगाड़ी के कई फेरे बढ़ गए। गोंडा की ओर चंटू बाबा मंदिर तक तथा बलरामपुर की ओर आदित्य फ्लोर मिल तक करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग जाता है।
विज्ञापन
सुबह से लेकर शाम तक बार-बार क्रासिंग बंद होती है। सबसे अधिक परेशानी कार्यालय जाने वाले लोग तथा स्कूली बच्चों को होती है। ड्यूटी करने वाले लोग अक्सर कार्यक्षेत्र पर देरी से पहुंचते हैं। इटियाथोक, बहलोलपुर, पड़रीकृपाल क्षेत्र से मुख्यालय पर करीब 50 हजार बच्चे स्कूल आते हैं। जाम की वजह से उन्हें देरी हो जाती तथा,जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
विज्ञापन
एंबुलेंस में तड़पते मरीज, जाम में फंसे रहते विधायक
- बलरामपुर रोड पर दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्थित हैं। जहां से गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। बलरामपुर जिले से भी गंभीर मरीजों को मुख्यालय के निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। सुभागपुर रेलवे क्रॉसिंग उनके जान का जोखिम बढ़ा देती है। बलरामपुर व मेहनौन विधायकों का काफिला भी अक्सर क्रॉसिंग पर फंस जाता है। बलरामपुर विधायक पल्टूराम व मेहनौन विधायक विनय कुमार द्विवेदी अपने गोंडा आवास से विधानसभा क्षेत्र में जाते हैं, जिनको अक्सर क्रॉसिंग के जाम में फंसना पड़ रहा है।
अभी नहीं मिली वित्तीय स्वीकृति
-सुभागपुर रेलवे क्रॉसिंग से लाखों लोग आजिज हैं। करीब पांच साल पहले मालगोदाम बना तभी से ओवरब्रिज की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है। हालांकि गोंडा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ओवरब्रिज के लिए प्रस्ताव भेजने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इस बार भी बजट में राहगीरों को निराशा हाथ लगी।
वर्जन
-मनीष कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक रेलवे