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जातिवाद, भ्रष्टाचार ने बदल दिए स्वाधीनता के मायने
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
Updated Thu, 11 Aug 2016 11:45 PM IST
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वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी गया प्रसाद पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
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अंग्रेजों से लड़कर आजादी दिलाने वाले रणबांकुरों में गया प्रसाद पांडेय 100 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं लेकिन आज तक उन्हें यह बात सालती है कि यहां तो आजादी के मायने ही बदल गए हैं।
जातिवाद व भ्रष्टाचार ने पूरे तंत्र को ही ध्वस्त कर दिया है और अंग्रेजों की गुलामी से अधिक अब गुलामी की जंजीर विकसित हो गई है। विकास खंड छपिया के नगरा बुर्जुग गांव के 102 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. गया प्रसाद पांडेय का दर्द आजादी की 70वीं सालगिरह पर छलक उठा।
उनका कहना है कि आजादी के लिए लड़ने वाले शहीदों का सपना साकार करने के लिए हमें देश को भ्रष्टाचार, जातिवाद से मुक्त कराना होगा तभी भारत गांधी, सुभाष और भगत सिंह के सपनों का भारत बन पाएगा। 26 दिसंबर 1914 में जन्मे स्वतंत्रता सेनानी पं. गया प्रसाद पांडेय की उम्र 102 वर्ष के करीब है लेकिन उनके अंदर देश प्रेम का वही जज्बा बरकरार है।
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उम्र के ढलान पर होने के कारण स्वतंत्रता सेनानी पं. गया प्रसाद पांडेय के पौत्र वैभव पांडेय ने बताया कि उनके बाबा 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन में तथा अन्य आंदोलनों में दो बार जेल जाकर 19 माह तक जेल में बिताया। उन्होंने बभनजोतिया गांव में हाल्ट तथा अपने पैतृक गांव नगरा बुजुर्ग में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना करायी।
सड़क, विद्युत व्यवस्था के लिए भी सक्रिय रहे। पं. गया प्रसाद पांडेय का कहना है कि पहले अंग्रेज सत्ताधारी देशवासियों का उत्पीड़न करते थे वहीं आज आजादी के बाद आने वाली सरकारें भी उत्पीड़न कर रही हैं।
देश में स्वतंत्रता सेनानियों व उनके परिवारीजनों की उपेक्षा की जा रही है। आज भी भारत में बेरोजगारी भ्रष्टाचार चरम पर है। जिसे खत्म करने के लिए छात्र, नौजवान, मजदूर, किसान व प्रबुद्ध वर्ग के लोगों को एकजुट होना पड़ेगा।
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जातिवाद व भ्रष्टाचार ने पूरे तंत्र को ही ध्वस्त कर दिया है और अंग्रेजों की गुलामी से अधिक अब गुलामी की जंजीर विकसित हो गई है। विकास खंड छपिया के नगरा बुर्जुग गांव के 102 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. गया प्रसाद पांडेय का दर्द आजादी की 70वीं सालगिरह पर छलक उठा।
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उनका कहना है कि आजादी के लिए लड़ने वाले शहीदों का सपना साकार करने के लिए हमें देश को भ्रष्टाचार, जातिवाद से मुक्त कराना होगा तभी भारत गांधी, सुभाष और भगत सिंह के सपनों का भारत बन पाएगा। 26 दिसंबर 1914 में जन्मे स्वतंत्रता सेनानी पं. गया प्रसाद पांडेय की उम्र 102 वर्ष के करीब है लेकिन उनके अंदर देश प्रेम का वही जज्बा बरकरार है।
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उम्र के ढलान पर होने के कारण स्वतंत्रता सेनानी पं. गया प्रसाद पांडेय के पौत्र वैभव पांडेय ने बताया कि उनके बाबा 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन में तथा अन्य आंदोलनों में दो बार जेल जाकर 19 माह तक जेल में बिताया। उन्होंने बभनजोतिया गांव में हाल्ट तथा अपने पैतृक गांव नगरा बुजुर्ग में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना करायी।
सड़क, विद्युत व्यवस्था के लिए भी सक्रिय रहे। पं. गया प्रसाद पांडेय का कहना है कि पहले अंग्रेज सत्ताधारी देशवासियों का उत्पीड़न करते थे वहीं आज आजादी के बाद आने वाली सरकारें भी उत्पीड़न कर रही हैं।
देश में स्वतंत्रता सेनानियों व उनके परिवारीजनों की उपेक्षा की जा रही है। आज भी भारत में बेरोजगारी भ्रष्टाचार चरम पर है। जिसे खत्म करने के लिए छात्र, नौजवान, मजदूर, किसान व प्रबुद्ध वर्ग के लोगों को एकजुट होना पड़ेगा।