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बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र तय करने के लिए प्रक्रिया शुरू
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गोंडा। यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र तय करने की कवायद शुरू हो गई है। केंद्र निर्धारण नीति तय होने के साथ ही यूपी बोर्ड 2022 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए केंद्र निर्धारण की कवायद तेज हो गई है।
जिले के 483 स्कूलों को केंद्र बनाने के लिए मानक के साथ ही इस बार उनकी मेरिट की सूची तैयार होगी। आधारभूत सूचनाओं के आधार पर विद्यालयों को अंक मिलेंगे। अंकों से ही राजकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन विद्यालयों की मेरिट सूची बनेगी।
जिन विद्यालयों के मेरिट अंक समान होंगे, उनमें यह देखा जाएगा कि किस विद्यालय में हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की अधिक संख्या है। इसी से विद्यालय को सूची में वरीयता दी जाएगी।
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मेरिट सूची तैयार करते समय स्कूलों को सूचनाओं के आधार पर अंक मिलेंगे। इसमें इंटरमीडिएट स्तर के स्कूलों को 20 व केवल हाईस्कूल स्तर के स्कूल रहने पर 10 अंक मिलेंगे। इसी प्रकार अंक के लिए स्कूलों को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय को 50, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय को 30 तथा वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय को 10 अंक दिए जाएंगे। यदि स्कूल में पठन.पाठन सीसी टीवी कैमरे की निगरानी में होता है तो 10 अंक, यदि स्कूल 2020 में परीक्षा केंद्र था तो 20 अंक तथा यदि वर्ष 2020 की बोर्ड परीक्षा में स्कूल का हाईस्कूल व इंटर का परीक्षाफल 90 फीसद रहा है तो भी दस दस अंक मिलेंगे। मेरिट सूची तैयार करते समय सभी मानकों व आधारभूत सूचनाओं को देखा जाएगाए ताकि मानक पर खरा उतरने वाले स्कूल ही केंद्र बन सकें।
परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया रविवार से शुरू हो गई। जिले के 483 स्कूलों की ओर से जानकारी वेबसाइट पर अपलोड़ कर दिया है। अब तहसील स्तीय समिति दो दिसंबर तक स्कूलों की जियो टैगिंग करेगी। इसके बाद अंतिम सूची 24 जनवरी को जारी कर दी जाएगी।
तहसील स्तरीय कमेटी में नामित राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को विभाग की ओर से जारी किए गए एप के माध्यम से जियो टैगिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत ही केंद्र निर्धारण होगा। जिले में दो कमेटी बनाई गई हैं। पहली कमेटी तहसील स्तरीय है, जिसमें एसडीएम अध्यक्ष हैं।
नामित अभियंता सदस्य, तहसीलदार सदस्य, डीआईओएस की ओर से नामित अधिकारी व राजकीय विद्यालय के प्रधानाचार्य शामिल हैं। इसके अलावा जिला स्तरीय समिति में डीएम अध्यक्ष, डीआईओएस सदस्य सचिव, बीएसए, एसडीएस सदस्य, दो वरिष्ठ प्रधानाचार्य सदस्य के तौर पर शामिल हैं।
राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को 16 ब्लाकों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह बोर्ड के मोबाइल एप को अपने एंड्रॉयड फोन में डाउनलोड कर आवंटित विद्यालयों का दौरा करेंगे। वहीं से जियो लोकेशन अपलोड करेंगे। जिस विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, उसके सामने कम से कम दस फीट चौड़ी सड़क होना अनिवार्य है।
ऐसे किसी भी विद्यालय को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा, जिसे पूर्व में ब्लैक लिस्ट किया हो। जिनकी प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य के बीच विवाद चल रहा होगा। साथ ही ऐसे विद्यालय भी केंद्र नहीं बनाए जाएंगे, जिन निजी विद्यालयों में हॉस्टल सुविधा होगी। एक केंद्र पर कम से कम 250 और क्षमता के अनुसार अधिकतम 1200 परीक्षार्थियों को रखा जाएगा। परीक्षार्थियों के बीच छह-छह फीट की दूरी के हिसाब से बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इसका सत्यापन होगा।
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जिले के 483 स्कूलों को केंद्र बनाने के लिए मानक के साथ ही इस बार उनकी मेरिट की सूची तैयार होगी। आधारभूत सूचनाओं के आधार पर विद्यालयों को अंक मिलेंगे। अंकों से ही राजकीय, सहायता प्राप्त व वित्तविहीन विद्यालयों की मेरिट सूची बनेगी।
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जिन विद्यालयों के मेरिट अंक समान होंगे, उनमें यह देखा जाएगा कि किस विद्यालय में हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की अधिक संख्या है। इसी से विद्यालय को सूची में वरीयता दी जाएगी।
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मेरिट सूची तैयार करते समय स्कूलों को सूचनाओं के आधार पर अंक मिलेंगे। इसमें इंटरमीडिएट स्तर के स्कूलों को 20 व केवल हाईस्कूल स्तर के स्कूल रहने पर 10 अंक मिलेंगे। इसी प्रकार अंक के लिए स्कूलों को तीन श्रेणियों में रखा जाएगा।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय को 50, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय को 30 तथा वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय को 10 अंक दिए जाएंगे। यदि स्कूल में पठन.पाठन सीसी टीवी कैमरे की निगरानी में होता है तो 10 अंक, यदि स्कूल 2020 में परीक्षा केंद्र था तो 20 अंक तथा यदि वर्ष 2020 की बोर्ड परीक्षा में स्कूल का हाईस्कूल व इंटर का परीक्षाफल 90 फीसद रहा है तो भी दस दस अंक मिलेंगे। मेरिट सूची तैयार करते समय सभी मानकों व आधारभूत सूचनाओं को देखा जाएगाए ताकि मानक पर खरा उतरने वाले स्कूल ही केंद्र बन सकें।
परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया रविवार से शुरू हो गई। जिले के 483 स्कूलों की ओर से जानकारी वेबसाइट पर अपलोड़ कर दिया है। अब तहसील स्तीय समिति दो दिसंबर तक स्कूलों की जियो टैगिंग करेगी। इसके बाद अंतिम सूची 24 जनवरी को जारी कर दी जाएगी।
तहसील स्तरीय कमेटी में नामित राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को विभाग की ओर से जारी किए गए एप के माध्यम से जियो टैगिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत ही केंद्र निर्धारण होगा। जिले में दो कमेटी बनाई गई हैं। पहली कमेटी तहसील स्तरीय है, जिसमें एसडीएम अध्यक्ष हैं।
नामित अभियंता सदस्य, तहसीलदार सदस्य, डीआईओएस की ओर से नामित अधिकारी व राजकीय विद्यालय के प्रधानाचार्य शामिल हैं। इसके अलावा जिला स्तरीय समिति में डीएम अध्यक्ष, डीआईओएस सदस्य सचिव, बीएसए, एसडीएस सदस्य, दो वरिष्ठ प्रधानाचार्य सदस्य के तौर पर शामिल हैं।
राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को 16 ब्लाकों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह बोर्ड के मोबाइल एप को अपने एंड्रॉयड फोन में डाउनलोड कर आवंटित विद्यालयों का दौरा करेंगे। वहीं से जियो लोकेशन अपलोड करेंगे। जिस विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, उसके सामने कम से कम दस फीट चौड़ी सड़क होना अनिवार्य है।
ऐसे किसी भी विद्यालय को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा, जिसे पूर्व में ब्लैक लिस्ट किया हो। जिनकी प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य के बीच विवाद चल रहा होगा। साथ ही ऐसे विद्यालय भी केंद्र नहीं बनाए जाएंगे, जिन निजी विद्यालयों में हॉस्टल सुविधा होगी। एक केंद्र पर कम से कम 250 और क्षमता के अनुसार अधिकतम 1200 परीक्षार्थियों को रखा जाएगा। परीक्षार्थियों के बीच छह-छह फीट की दूरी के हिसाब से बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इसका सत्यापन होगा।