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नहीं मिल रहा पौष्टिक भत्ता, टीबी से कैसे लड़े मरीज

Thu, 28 Apr 2022 11:36 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2022 11:36 PM IST
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Problem,TB  patient
गोंडा। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की शिथिलता इलाज करा रहे क्षय रोगियों पर भारी पड़ रही है। कुपोषण से मुकाबला कर टीबी के खिलाफ चल रही जंग जीतने के लिए टीबी मरीजों को हर माह मिलने वाली पांच सौ रुपया की पौष्टिक भत्ता राशि बीते तीन माह से नहीं मिल पा रही है। ऐसे में जिले को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त जिला बनाने की मुहिम पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिले में चिह्नित 2834 टीबी मरीज इस बीमारी से छुटकारा पाने को इलाज करा रहे हैं।
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बीते सोमवार को जिले में निरीक्षण को आए सूबे के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी टीबी उन्मूलन पर विशेष तौर पर ध्यान देने की जरूरत जताते हुए वर्ष 2025 तक जिले को टीबी मुक्त जिला बनाने का आह्वान भी किया था। इसके बावजूद जिले में इलाज करा रहे 2834 टीबी के मरीजों के खाते में इस वर्ष जनवरी माह से पोषण भत्ता के रुप में मिलने वाली 500 रुपया की धनराशि नहीं पहुंची है। ऐसे में इन मरीजों को टीबी की बीमारी से लड़ने के लिए पौष्टिक आहार नहीं मिल पाने की परेशानी झेलना पड़ रही है। विभागीय अधिकारी टीबी मरीजों को मिलने वाले पोषण भत्ता के लिए पर्याप्त बजट राशि न होने की बात कह कर चुप्पी साधे हैं।
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मरीजों की निगरानी को घरों पर दस्तक
टीबी मरीजों की देखभाल को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीजों के घर पर दस्तक देकर उनके इलाज की नियमित तौर पर निगरानी कर रही है। इस दौरान उनके दवा खाने व टीबी संक्रमण की स्थिति की जानकारी को भी अपडेट किया जा रहा है। बभनजोत ब्लॉक के विभिन्न गांवों में डॉ. विवेक शरण की अगुवाई में टीम भ्रमण कर रही है।
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860 टीबी मरीजों को लिया गोद
जिलाधिकारी के आह्वान पर अब तक 860 टीबी मरीजों को गोद लेकर उनकी देखरेख की जा रहा है। डीएम डॉ. उज्ज्वल कुमार ने जिलेे की सामाजिक व शैक्षणिक संस्थाओं, अधिकारियों, गणमान्य व्यक्तियों व व्यवसायियों से अपनी इच्छानुसार टीबी मरीजों को गोद लिए जाने की अपील किया था। गोद लेने वाले व्यक्ति को मरीज के लिए कम से कम छह महीने तक पोषण सामग्री की व्यवस्था करनी थी। टीबी क्लीनिक के डॉ. विवेक शरण ने बताया कि जिले के 1000 टीबी मरीजों को गोद लिए जाने का लक्ष्य रखा गया था जिस पर 860 मरीजों को गोद लिया जा चुका है।
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