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प्रिंसिपल ने दो बाल मजदूरों को स्कूल में दिया दाखिला
अमर उजाला/गोंडा।
Updated Sun, 28 Aug 2016 11:19 PM IST
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दाखिला पाने वाले बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
गरीब बच्चों की शिक्षा को लेकर वैसे तो तमाम स्वयंसेवी संगठन व समाज के ऊंचे तबके के लोग जागरूकता फैलाने व उन बच्चों की मदद करने का दावा करते हैं, लेकिन इस दावे को हकीकत में बदलने का जज्बा कम ही लोग रखते हैं। ऐसे में एक सुखद खबर जिले के मनकापुर क्षेत्र से है, जहां शिक्षा के प्रति अपनी जागरूकता के चलते मनकापुर स्थित एपी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ने इस दावे को हकीकत में बदल दिया है।
मुफलिसी की मार से अपनी पढ़ाई छोड़कर कॉलेज में मजदूरी करने आए दो बच्चों को उन्होंने न सिर्फ अपने कॉलेज में दाखिला दिलाया, बल्कि उन्हें पढ़ाई करने के लिए कॉपी, किताब, ड्रेस व अन्य जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रधानाचार्य के इस उदार रवैये से समाज में शिक्षा की जागरूकता को तो बल मिला ही है, साथ ही दो गरीब बच्चों का भविष्य भी संवरने के रास्ते पर आ गया है। शिक्षा के प्रति प्रधानाचार्य की इस जागरूकता को लेकर लोग उनकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं।
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मनकापुर क्षेत्र के बल्लीपुर झलहा गांव में बाबूलाल भारती व सोमई का परिवार रहता है। दोनों ही परिवार गरीबी की मार से जूझ रहे हैं और मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। बाबूलाल मनकापुर कोतवाली में चौकीदार हैं। बाबूलाल के तीन संतानें दुर्गेश (11), गणेश (9) व ममता (6) हैं।
बाबूलाल की पगार से परिवार को सिर्फ दो जून की रोटी मिल पाती है। वह बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा पाने में सक्षम नहीं हैं। जिससे बेटे दुर्गेश ने सरकारी स्कूल से कक्षा 6 पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी और परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी कर रहा है।
इसी तरह सोमई के भी दो बेटे मातादीन (14), पवन (12) व एक बेटी खुशबू (7) है। सोमई परिवार को पालन पोषण करने के लिए पत्नी समेत दूसरे के खेतों में मजदूरी करता है। गरीबी के कारण सोमई के बेटे पवन की भी पढ़ाई छूट चुकी है और वह भी परिवार की मदद के लिए मजदूरी करता है। करीब चार दिन पहले दुर्गेश व पवन काम की तलाश में मनकापुर आए थे। यहां एपी इंटर कॉलेज में हो रहे भवन निर्माण के काम में दोनों बच्चे मजदूरी करने लगे।
शुक्रवार को कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अवध शरन मिश्रा जब निर्माण कार्य का जायजा ले रहे थे, तभी उनकी नजर ईंट ढो रहे इन दो बच्चों पर पड़ी। प्रधानाचार्य ने दोनों से पढ़ाई करने की उम्र में मजदूरी करने का कारण पूछा। दोनों बच्चों ने घर की हालत बताई तो प्रधानाचार्य का मन द्रवित हो उठा।
उन्होंने ठेकेदार को बुलाकर दोनों बच्चों की मजदूरी दिलवाई और अपने साथ स्कूल ले आए। यहां उन्होंने दोनों बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और उनका नामांकन कक्षा सात में कॉलेज में कराया। इसके साथ ही प्रधानाचार्य ने उन्हें अपनी तरफ से कॉपी, किताब, स्कूल बैग व विद्यालय की ड्रेस भी उपलब्ध कराई। प्रधानाचार्य ने दोनों बच्चों को इंटर तक की शिक्षा मुफ्त दिलाने का आश्वासन उनके अभिभावकों को दिया है।
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मुफलिसी की मार से अपनी पढ़ाई छोड़कर कॉलेज में मजदूरी करने आए दो बच्चों को उन्होंने न सिर्फ अपने कॉलेज में दाखिला दिलाया, बल्कि उन्हें पढ़ाई करने के लिए कॉपी, किताब, ड्रेस व अन्य जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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प्रधानाचार्य के इस उदार रवैये से समाज में शिक्षा की जागरूकता को तो बल मिला ही है, साथ ही दो गरीब बच्चों का भविष्य भी संवरने के रास्ते पर आ गया है। शिक्षा के प्रति प्रधानाचार्य की इस जागरूकता को लेकर लोग उनकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं।
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मनकापुर क्षेत्र के बल्लीपुर झलहा गांव में बाबूलाल भारती व सोमई का परिवार रहता है। दोनों ही परिवार गरीबी की मार से जूझ रहे हैं और मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। बाबूलाल मनकापुर कोतवाली में चौकीदार हैं। बाबूलाल के तीन संतानें दुर्गेश (11), गणेश (9) व ममता (6) हैं।
बाबूलाल की पगार से परिवार को सिर्फ दो जून की रोटी मिल पाती है। वह बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा पाने में सक्षम नहीं हैं। जिससे बेटे दुर्गेश ने सरकारी स्कूल से कक्षा 6 पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी और परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी कर रहा है।
इसी तरह सोमई के भी दो बेटे मातादीन (14), पवन (12) व एक बेटी खुशबू (7) है। सोमई परिवार को पालन पोषण करने के लिए पत्नी समेत दूसरे के खेतों में मजदूरी करता है। गरीबी के कारण सोमई के बेटे पवन की भी पढ़ाई छूट चुकी है और वह भी परिवार की मदद के लिए मजदूरी करता है। करीब चार दिन पहले दुर्गेश व पवन काम की तलाश में मनकापुर आए थे। यहां एपी इंटर कॉलेज में हो रहे भवन निर्माण के काम में दोनों बच्चे मजदूरी करने लगे।
शुक्रवार को कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अवध शरन मिश्रा जब निर्माण कार्य का जायजा ले रहे थे, तभी उनकी नजर ईंट ढो रहे इन दो बच्चों पर पड़ी। प्रधानाचार्य ने दोनों से पढ़ाई करने की उम्र में मजदूरी करने का कारण पूछा। दोनों बच्चों ने घर की हालत बताई तो प्रधानाचार्य का मन द्रवित हो उठा।
उन्होंने ठेकेदार को बुलाकर दोनों बच्चों की मजदूरी दिलवाई और अपने साथ स्कूल ले आए। यहां उन्होंने दोनों बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और उनका नामांकन कक्षा सात में कॉलेज में कराया। इसके साथ ही प्रधानाचार्य ने उन्हें अपनी तरफ से कॉपी, किताब, स्कूल बैग व विद्यालय की ड्रेस भी उपलब्ध कराई। प्रधानाचार्य ने दोनों बच्चों को इंटर तक की शिक्षा मुफ्त दिलाने का आश्वासन उनके अभिभावकों को दिया है।