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खून नहीं मिलने से गर्भवती की मौत

Tue, 20 Sep 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा
अमर उजाला ब्यूरो/गोंडा Updated Tue, 20 Sep 2016 11:53 PM IST
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pregnant,s death not meet the blood
टांग कर मरीज ले जाते तीमारदार - फोटो : अमर उजाला
क्या जिला अस्पताल और क्या सीएचसी, पीएचसी, मंगलवार को हर जगह मरीजों को स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से पूरे दिन परेशान रहना पड़ा। जिला अस्पताल में फार्मासिस्टों सहित लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स व आप्टोमेट्रिस्ट की हड़ताल से हालात यहां तक बिगड़ गए कि प्रशासन को पूरे जिला अस्पताल परिसर को छावनी में तब्दील कर देना पड़ा। देर शाम मनकापुर सीएचसी से जिला महिला अस्पताल रेफर की गई गर्भवती महिला की घंटों इलाज व खून नहीं मिलने से मौत हो गई। सीएमएस डॉ. अनिल सिंह ने महिला की मौत की पुष्टि की है। 
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18 सूत्री मांगों पर आश्वासन नहीं आदेश चाहिए को लेकर मंगलवार से शुरू हुई कर्मचारी, शिक्षक संयुक्त मोर्चा की हड़ताल का असर जिले में पहले दिन स्वास्थ्य सेवाओं के बेपटरी होने से दिखाई देने लगा है। मंगलवार को इस हड़ताल के पहले दिन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े फार्मासिस्टों, स्टाफ नर्सों, लैब टेक्नीशियनों व आप्टोमेट्रिस्ट के खुलकर हड़ताल को समर्थन देने से जहां पूरे दिन जिला अस्पताल सहित जिले भर की सभी 16 सीएचसी-पीएचसी में दवा वितरण से लेकर लैब में होने वाला कोई काम नहीं हो सका तो वहीं जिला अस्पताल के वार्डों में स्टाफ नर्सों से मिलने वाली सेवाओं से भी यहां भर्ती होने वाले मरीज पूरी तरह से वंचित रहे। 
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सुबह 10 बजते ही जिला अस्पताल में फार्मासिस्टों सहित स्टाफ नर्सों, आप्टोमेट्रिस्ट व लैब टेक्नीशियनों का हुजूम इकट्ठा होना शुरू हो गया। जिसके चलते जिला अस्पताल में अपना इलाज कराने आए मरीजों को घंटो इधर-उधर भटकने के बाद लौट जाना पड़ा। स्वास्थ्य कर्मियों की इस हड़ताल से डॉक्टर और इमरजेंसी सेवा पूरी तरह से अलग थी। लेकिन इसके बाद भी उनकी इस हड़ताल का असर जिला व महिला अस्पताल में लगने वाली डॉक्टरों की ओपीडी पर भी दिखाई दिया।
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जहां महिला अस्पताल में तीन घंटे तो जिला अस्पताल में डॉक्टरों के गायब रहने से करीब दो घंटे के लिए ओपीडी सेवा में व्यवधान का सामना मरीजों को करना पड़ा। जबकि इमरजेंसी में भी पूरे दिन हड़ताल के चलते मरीजों की भीड़ लगी रही। 

स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से अस्पताल में कामकाज के हालात कुछ ही मिनटों में इतने बिगड़ गए कि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए जब तक अस्पताल प्रशासन कुछ सोच पाता कि हड़ताली स्वास्थ्यकर्मी देखते ही देखते जिला अस्पताल की सेवाओं पर भी हावी होने लगे। जिस पर सीएमएस को फोर्स बुलानी पड़ी। 

मनकापुर की रहने वाली मनोज की पत्नी मंशा को मंगलवार को सीएचसी मनकापुर से महिला अस्पताल रेफर के लिए किया गया, लेकिन हड़ताल के यहां उसे घंटों उपचार नहीं मिला। पति उसे लेकर जाने लगा, तभी रास्ते में सूरज सिंह मिल गए। 


उन्होंने उसे ले जाकर महिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पता चला कि महिला के पेट में बच्चे की मौत हो चुकी है, इसलिए ऑपरेशन करके बच्चे को बाहर निकालना जरूरी है। मगर ब्लड बैंक बंद होने के कारण ऑपरेशन के लिए खून नहीं मिल पाया, जिससे महिला की जान चली गई। 
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