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चार प्रधान व 3987 पंचायत पद सदस्यों के पद हैँ रिक्त
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गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चार प्रधानों के साथ ही 3987 पंचायत सदस्य के पद रिक्त रह गए हैं। मतदान से पहले दो प्रधान प्रत्याशियों के निधन से दो गांवों में स्थगित की गई चुनाव प्रक्रिया अंतिम चरण में पूरी करा ली गई थी।
मतदान और मतगणना के बाद भी बीमारी से चार प्रधानों के निधन से जो पद रिक्त हैं उनके लिए अभी इंतजार करना होगा। वहीं पंचायत सदस्यों के रिक्त पदों के लिए भी अभी कोई आदेश नहीं आया है। पंचायत सदस्यों के पद रिक्त होने से तो करीब 500 पंचायतों का गठन ही नहीं हो पाएगा। शपथ के बाद प्रधानों को पहली बैठक केे लिए इंतजार करना होगा।
जिले में मतगणना के बाद चार प्रधानों के निधन से वहां पद अभी रिक्त ही रहेंगे। करनैलगंज ब्लाक के धनावा पंचायत से विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैय्या की बहन राजकुवंरि प्रधान चुनी गईं थीं। उनका बीमारी से निधन हो गया है। इसी तरह परसपुर के चरौहा ग्राम पंचायत से प्रधान प्रत्याशी रहीं पूर्व ब्लाक प्रमुख स्वर्गीय शीतला शुक्ल की पत्नी सावित्री शुक्ला का निधन मतगणना के ठीक पहले हो गया था।
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इसी तरह गौहानी के प्रधान सत्यपाल पांडेय का निधन भी बीमारी से बीते शुक्रवार को हो गया है। इसके अलावा कटरा बाजार के टेढ़ी रायपुर के प्रधान राजेंद्र सिंह का निधन शनिवार को कोरोना संक्रमण से हो गया है। इससे इन पंचायतों में अभी प्रधान के पद का चुनाव होना है।
इसके लिए इंतजार करना होगा। वहीं सदस्यों के पद रिक्त होने से पंचायतों के अस्तित्व में आने पर संकट है। पंचायतों में प्रधान पद का चुनाव जीत गया और उसके गांव में दो कुल पदों के सापेक्ष दो तिहाई पदों पर सदस्य निर्वाचित नहीं हुए हैं तो वहां समिति का गठन नहीं होगा।
ऐसे में न तो प्रधान कोई कार्य नहीं कर सकेंगे। लोकतंत्र के सबसे छोटे पद पर निर्वाचन को लेकर बेरुखी मुसीबत बढ़ा सकती है। भले ही ये पद छोटा हो लेकिन, उसके अधिकार कम नहीं हैं। डीपीआरओ सभाजीत पांडेय का कहना है कि ग्राम पंचायत सदस्यों की भूमिका ग्राम पंचायतों में महत्वपूर्ण होती है।
उनके पास प्रधान से सवाल पूछने का अधिकार है। इसके बावजूद वे अपने अधिकारों का कम इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत सदस्यों के अधिकार बहुत होते हैं। समिति में यदि किसी बिंदु पर एक राय करनी हो तो ग्राम पंचायत सदस्य का एक मत होना अनिवार्य है।
ग्राम पंचायत में छह समितियों का गठन कर इनकी भूमिका निर्धारित की गई हैं। ये समितियां हैं, जल संसाधन समिति, स्वास्थ्य समिति, प्रशासनिक समिति, निर्माण समिति, विकास एवं नियोजन समिति है। इन समितियों के अधिकारों के मुताबिक यदि हैड पंप लगाना हो तो जल संसाधन समिति के प्रस्ताव पर लगेगा। इसी प्रकार मिड-डे मील, मरम्मत आदि क्रिया कलापों पर इनके प्रस्ताव और निगरानी सुनिश्चित की गई है।
ज्यादातर प्रधान ही अपने मन मुताबिक ग्राम पंचायत सदस्य बनवाते हैं। इसके बाद भ्रष्टाचार के खेल में सभी मिलकर सरकारी धन की बंदरबांट करते हैं। चुनाव के जानकारों के अनुसार एक ग्राम पंचायत सदस्य को चुनाव लड़ने में मात्र 1000 रुपये का खर्च आता है। इनमें नामांकन फार्म का मूल्य, जमानत राशि आने-जाने का खर्च सब समाहित है।
बताया जा रहा है कि पहले ग्राम पंचायत सदस्यों को प्रधानों को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार था। लेकिन 2005 से यह अधिकार मतदाताओं के पास चला गया है। यही कारण है कि ग्राम पंचायत सदस्य पद के प्रति लोगों का रुझान कम रहता है। चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्यों की 3987 सीटें रिक्त रह गई है।
इनसेट
ग्राम पंचायतों में 9 से 15 के बीच होती है सदस्यों की संख्या
किसी भी ग्रामसभा में 2000 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना आवश्यक है। हर गांव में एक ग्राम प्रधान होता है। 1000 तक की आबादी वाले गांवों में 9 ग्राम पंचायत सदस्य, 2000 तक में 11 तथा 3000 की आबादी तक 15 सदस्य होने चाहिए। ग्राम सभा की बैठक साल में दो बार होनी जरूरी है। इसकी सूचना 15 दिन पहले नोटिस के माध्यम से देनी होती है। ग्रामसभा की बैठक बुलाने का अधिकार ग्राम प्रधान को होता है। बैठक के लिए कुल सदस्यों की संख्या के 5वें भाग की उपस्थिति जरूरी होती है।
इनसेट
आंकड़ों पर एक नजर
16-ब्लॉक
1214-ग्राम पंचायत
15410-ग्राम पंचायत सदस्य पद
15293-सदस्य पद के चुनाव की जारी हुई थी अधिसूचना
9222-पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए प्रतिनिधि
2084-पदों के लिए हुआ चुनाव
5072-प्रत्याशी लड़ रहे थे चुनाव
3987-पद के लिए नहीं हुआ नामांकन
इनसेट
ब्लॉक में कितने पद रिक्त
पंडरीकृपाल-157
झंझरी-400
मुजेहना-141
इटियाथोक-279
रुपईडीह-432
हलधरमऊ-280
परसपुर-322
कटराबाजार-265
कर्नलगंज-239
बेलसर-145
तरबगंज-136
वजीरगंज-208
मनकापुर-297
छपिया-431
बभनजोत-255
इनसेट
- पंचायतों में रिक्त पदों पर चुनाव के लिए अभी कोई आदेश नही आया है। अभी उप चुनाव के लिए इंतजार करना होगा। आयोग को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
- नारायण, सहायक निवाचन अधिकारी
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मतदान और मतगणना के बाद भी बीमारी से चार प्रधानों के निधन से जो पद रिक्त हैं उनके लिए अभी इंतजार करना होगा। वहीं पंचायत सदस्यों के रिक्त पदों के लिए भी अभी कोई आदेश नहीं आया है। पंचायत सदस्यों के पद रिक्त होने से तो करीब 500 पंचायतों का गठन ही नहीं हो पाएगा। शपथ के बाद प्रधानों को पहली बैठक केे लिए इंतजार करना होगा।
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जिले में मतगणना के बाद चार प्रधानों के निधन से वहां पद अभी रिक्त ही रहेंगे। करनैलगंज ब्लाक के धनावा पंचायत से विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैय्या की बहन राजकुवंरि प्रधान चुनी गईं थीं। उनका बीमारी से निधन हो गया है। इसी तरह परसपुर के चरौहा ग्राम पंचायत से प्रधान प्रत्याशी रहीं पूर्व ब्लाक प्रमुख स्वर्गीय शीतला शुक्ल की पत्नी सावित्री शुक्ला का निधन मतगणना के ठीक पहले हो गया था।
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इसी तरह गौहानी के प्रधान सत्यपाल पांडेय का निधन भी बीमारी से बीते शुक्रवार को हो गया है। इसके अलावा कटरा बाजार के टेढ़ी रायपुर के प्रधान राजेंद्र सिंह का निधन शनिवार को कोरोना संक्रमण से हो गया है। इससे इन पंचायतों में अभी प्रधान के पद का चुनाव होना है।
इसके लिए इंतजार करना होगा। वहीं सदस्यों के पद रिक्त होने से पंचायतों के अस्तित्व में आने पर संकट है। पंचायतों में प्रधान पद का चुनाव जीत गया और उसके गांव में दो कुल पदों के सापेक्ष दो तिहाई पदों पर सदस्य निर्वाचित नहीं हुए हैं तो वहां समिति का गठन नहीं होगा।
ऐसे में न तो प्रधान कोई कार्य नहीं कर सकेंगे। लोकतंत्र के सबसे छोटे पद पर निर्वाचन को लेकर बेरुखी मुसीबत बढ़ा सकती है। भले ही ये पद छोटा हो लेकिन, उसके अधिकार कम नहीं हैं। डीपीआरओ सभाजीत पांडेय का कहना है कि ग्राम पंचायत सदस्यों की भूमिका ग्राम पंचायतों में महत्वपूर्ण होती है।
उनके पास प्रधान से सवाल पूछने का अधिकार है। इसके बावजूद वे अपने अधिकारों का कम इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत सदस्यों के अधिकार बहुत होते हैं। समिति में यदि किसी बिंदु पर एक राय करनी हो तो ग्राम पंचायत सदस्य का एक मत होना अनिवार्य है।
ग्राम पंचायत में छह समितियों का गठन कर इनकी भूमिका निर्धारित की गई हैं। ये समितियां हैं, जल संसाधन समिति, स्वास्थ्य समिति, प्रशासनिक समिति, निर्माण समिति, विकास एवं नियोजन समिति है। इन समितियों के अधिकारों के मुताबिक यदि हैड पंप लगाना हो तो जल संसाधन समिति के प्रस्ताव पर लगेगा। इसी प्रकार मिड-डे मील, मरम्मत आदि क्रिया कलापों पर इनके प्रस्ताव और निगरानी सुनिश्चित की गई है।
ज्यादातर प्रधान ही अपने मन मुताबिक ग्राम पंचायत सदस्य बनवाते हैं। इसके बाद भ्रष्टाचार के खेल में सभी मिलकर सरकारी धन की बंदरबांट करते हैं। चुनाव के जानकारों के अनुसार एक ग्राम पंचायत सदस्य को चुनाव लड़ने में मात्र 1000 रुपये का खर्च आता है। इनमें नामांकन फार्म का मूल्य, जमानत राशि आने-जाने का खर्च सब समाहित है।
बताया जा रहा है कि पहले ग्राम पंचायत सदस्यों को प्रधानों को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार था। लेकिन 2005 से यह अधिकार मतदाताओं के पास चला गया है। यही कारण है कि ग्राम पंचायत सदस्य पद के प्रति लोगों का रुझान कम रहता है। चुनाव में ग्राम पंचायत सदस्यों की 3987 सीटें रिक्त रह गई है।
इनसेट
ग्राम पंचायतों में 9 से 15 के बीच होती है सदस्यों की संख्या
किसी भी ग्रामसभा में 2000 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना आवश्यक है। हर गांव में एक ग्राम प्रधान होता है। 1000 तक की आबादी वाले गांवों में 9 ग्राम पंचायत सदस्य, 2000 तक में 11 तथा 3000 की आबादी तक 15 सदस्य होने चाहिए। ग्राम सभा की बैठक साल में दो बार होनी जरूरी है। इसकी सूचना 15 दिन पहले नोटिस के माध्यम से देनी होती है। ग्रामसभा की बैठक बुलाने का अधिकार ग्राम प्रधान को होता है। बैठक के लिए कुल सदस्यों की संख्या के 5वें भाग की उपस्थिति जरूरी होती है।
इनसेट
आंकड़ों पर एक नजर
16-ब्लॉक
1214-ग्राम पंचायत
15410-ग्राम पंचायत सदस्य पद
15293-सदस्य पद के चुनाव की जारी हुई थी अधिसूचना
9222-पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए प्रतिनिधि
2084-पदों के लिए हुआ चुनाव
5072-प्रत्याशी लड़ रहे थे चुनाव
3987-पद के लिए नहीं हुआ नामांकन
इनसेट
ब्लॉक में कितने पद रिक्त
पंडरीकृपाल-157
झंझरी-400
मुजेहना-141
इटियाथोक-279
रुपईडीह-432
हलधरमऊ-280
परसपुर-322
कटराबाजार-265
कर्नलगंज-239
बेलसर-145
तरबगंज-136
वजीरगंज-208
मनकापुर-297
छपिया-431
बभनजोत-255
इनसेट
- पंचायतों में रिक्त पदों पर चुनाव के लिए अभी कोई आदेश नही आया है। अभी उप चुनाव के लिए इंतजार करना होगा। आयोग को रिपोर्ट भेजी जा रही है।
- नारायण, सहायक निवाचन अधिकारी