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Gonda News: आंगन में फुदके चिड़िया, चोंच में दबाए दाना
Mon, 20 Mar 2023 11:15 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 20 Mar 2023 11:15 PM IST
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हलधरमऊ के स्कूल में गौरैया के लिए पात्र में पानी भरते शिक्षक व बच्चे।
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गोंडा। हलधरमऊ के परिषदीय स्कूलों में सोमवार को विश्व गौरैया दिवस मनाया गया। बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि स्कूलों में परीक्षा से पहले बच्चों को गौरैया को संरक्षित करने का संकल्प दिलाया गया।
हलधरमऊ में एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) राखाराम गुप्त ने पुराने समय की याद दिलायी। कहा कि आंगन में चिड़िया के फुदकने और चोंच में दाना दबाकर फुर्र होते देख मन गदगद होता था। अब ऐसा ही फिर हो, तो अच्छा हो। राखाराम ने कहा कि हमारे बचपन की यादें गौरैया से ही हैं। एक दशक पहले आंगन में फुदकती नन्ही सी चिड़िया से सुबह की शुरुआत होती थी। उसकी चहचहाहट हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी, मगर बढ़ता शहरीकरण, कटते पेड़, तापमान, रेडिएशन और मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें गौरैया के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही हैं। अब नन्ही सी चिरैया घर के आंगन से गुम होती जा रही है। इसके संरक्षण के लिए लोग पहल करें। शिक्षक रवि कुमार पांडेय, सरिता तोमर, अतुल तिवारी ने बच्चों को घरों में पानी से भरा प्याला रखने और लकड़ी का घोंसला रखने के बारे में बताया।
वन विभाग में भी गौरैया दिवस मनाया गया। प्रभागीय वनाधिकारी पंकज शुक्ल व एसडीओ सुदर्शन ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। डीएफओ ने कहा कि पेड़ों से ही पक्षियों का संरक्षण संभव है। गोष्ठी में गौरैया को बचाने पर चर्चा की गई। गोंडा रेंज के रेंजर ओपी लाल श्रीवास्तव ने बताया कि गौरैया प्राकृति का अंग है। धीरे-धीरे इनकी प्रजाति लुप्त हो रही है। ऐसे में इसे बचाना बहुत जरूरी है। लोग अपने घर की छत पर पानी व दाने की व्यवस्था करें। जिससे गौरैया के जीवन की बचाया जा सके। इस दौरान प्रवर्तन दल के प्रभारी अभिषेक वर्मा, वन दरोगा इरशाद खां, अमित वर्मा, दुर्गेश मिश्र व महेंद्र वर्मा मौजूद रहे।
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हलधरमऊ में एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) राखाराम गुप्त ने पुराने समय की याद दिलायी। कहा कि आंगन में चिड़िया के फुदकने और चोंच में दाना दबाकर फुर्र होते देख मन गदगद होता था। अब ऐसा ही फिर हो, तो अच्छा हो। राखाराम ने कहा कि हमारे बचपन की यादें गौरैया से ही हैं। एक दशक पहले आंगन में फुदकती नन्ही सी चिड़िया से सुबह की शुरुआत होती थी। उसकी चहचहाहट हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी थी, मगर बढ़ता शहरीकरण, कटते पेड़, तापमान, रेडिएशन और मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें गौरैया के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही हैं। अब नन्ही सी चिरैया घर के आंगन से गुम होती जा रही है। इसके संरक्षण के लिए लोग पहल करें। शिक्षक रवि कुमार पांडेय, सरिता तोमर, अतुल तिवारी ने बच्चों को घरों में पानी से भरा प्याला रखने और लकड़ी का घोंसला रखने के बारे में बताया।
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वन विभाग में भी गौरैया दिवस मनाया गया। प्रभागीय वनाधिकारी पंकज शुक्ल व एसडीओ सुदर्शन ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। डीएफओ ने कहा कि पेड़ों से ही पक्षियों का संरक्षण संभव है। गोष्ठी में गौरैया को बचाने पर चर्चा की गई। गोंडा रेंज के रेंजर ओपी लाल श्रीवास्तव ने बताया कि गौरैया प्राकृति का अंग है। धीरे-धीरे इनकी प्रजाति लुप्त हो रही है। ऐसे में इसे बचाना बहुत जरूरी है। लोग अपने घर की छत पर पानी व दाने की व्यवस्था करें। जिससे गौरैया के जीवन की बचाया जा सके। इस दौरान प्रवर्तन दल के प्रभारी अभिषेक वर्मा, वन दरोगा इरशाद खां, अमित वर्मा, दुर्गेश मिश्र व महेंद्र वर्मा मौजूद रहे।
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