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लोगों को करेंगे सावधान, स्वच्छता का रखें ध्यान
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Feb 2016 11:10 PM IST
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प्रदेश व भारत सरकार स्वच्छता अभियान को लेकर गंभीर है। मगर इससे कहीं अधिक गंभीर गोंडा के डीएम दिखते नजर आ रहे हैं। शनिवार को डीएम गोंडा का मास्टर प्लान सुनकर प्रदेश के मुख्य सचिव भी अपने आप को नहीं रोक पाए और उसी मास्टर प्लान पर जिले को ओडीएफ गोंडा-स्वच्छ गोंडा बनाने की रूप रेखा तय की गई है। मास्टर प्लान पर यदि अमल हुआ तो न केवल अधिकारी-कर्मचारी, बल्कि गांव का हर व्यक्ति इस अभियान को सफल बनाने की मुहिम में जुट जाएगा। इस मुहिम को सात फरवरी तक गांव-गांव तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पंचायत विभाग के अधिकारियों को सौंपी गई है।
बेस लाइन सर्वे के अनुसार जिले में चार लाख 22 हजार परिवार खुले में शौच जाते हैं। इन परिवारों को 2020 तक खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य तैयार किया गया था। लेकिन जिला प्रशासन व पंचायत विभाग इस लक्ष्य को दो साल पहले यानि 2018 तक ही पूरा करने की रणनीति तय कर चुके हैं।
एक अप्रैल 2015 तक जिले में 16000 परिवारों को खुले में शौच जाने से मुक्त कर दिया गया है। इस अभियान की गंभीरता इसी बात से लगाई जा रही है कि मार्च 2016 तक 61 गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने की तैयारी है।
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इन 61 गांवों में चार गांव ओडीएफ (ओपेन डेफीकेशन फ्री) यानि खुले में शौच मुक्त ग्राम पंचायत कर दिया गया है। सात गांव में 80 प्रतिशत परिवारों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया गया है। 34 समग्र गांव व 14 सामान्य गांव में फंक्शनल शौचालय बनाने की रणनीति तय हो गई है।
डीएम गोंडा अजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि जिले के प्रत्येक गांव के रहने वालों को खुले में शौच से रोकने के लिए जागरूकता मुहिम की शुरुआत कर दी गई है।
अब इसे जनांदोलन का रूप देना है, जिससे हर व्यक्ति चाहे वह कर्मचारी हो, अधिकारी हो, सामाजिक कार्यकर्ता हो या फिर गांव का आम आदमी। सबको साथ लेकर गांव-गांव, न्याय पंचायत व ब्लॉक स्तर पर चौपाल लगाई जाएगी।
ये है मास्टर प्लान
- हर गांव में निगरानी समिति का गठन होगा, जो खुले में शौच जाने वाले को टोकेगा।
- परिषदीय, माध्यमिक व डिग्री कॉलेजों में प्रार्थना के समय खुले में शौच मुक्त बनाने का संकल्प दिलाया जाएगा।
- शिक्षक अभिभावक के साथ बैठक कर प्रेरक की भूमिका निभाएंगे।
- नारी ज्ञान स्थली महाविद्यालय व अन्य महाविद्यालयों की छात्राओं का गांव में भ्रमण कराया जाएगा, जो महिलाओं को जागरूक करेंगी।
- गांव में रहने वाले सरकारी, संविदा या अन्य कर्मचारियों को अपने घर में शौचालय निर्माण व प्रयोग का प्रमाण पत्र देना होगा।
- जिला स्तरीय अधिकारी जिन्होंने गांव को गोद लिया है, उन्हें भी गांव को खुले में शौच से मुक्त कराने का प्रमाणपत्र देना होगा।
- गांव में नियमित रूप से स्वच्छता समिति की बैठक होगी।
- महिला ग्राम प्रधान, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री गांव की महिलाओं की चौपाल लगाकर उन्हें जागरूक व प्रेरित करेंगी।
- पहले से बने निष्प्रयोज्य शौचालयों को उपयोगी बनाना।
- विद्यालयों में बने शौचालयों को सबसे पहले दुरुस्त कराकर उपयोगी बनाना।
अलग से दिया जा सकता है आवेदन
यदि गांव में कोई व्यक्ति शौचालय बनवाना चाहता है और उसकी प्रधान से नहीं पटती है तो वह व्यक्ति शौचालय निर्माण के लिए एडीओ पंचायत, बीडीओ या डीपीआरओ को आवेदन कर सकता है। इसके लिए एक आवेदन पत्र मिलेगा, जिसे भरकर व्यक्ति शौचालय निर्माण के लिए धनराशि की मांग कर सकता है। इसमें 12000 की राशि दो किश्तों में दी जाएगी।
होंगे सम्मानित
गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए प्रेरक की भूमिका निभाने वाले व्यक्ति को जिला, मंडल व प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इसमें कर्मचारी, प्रधान, आम व्यक्ति या अधिकारी भी हो सकता है।
मंडी मजदूरों को किया जाएगा प्रशिक्षित
गोंडा नगर में दो स्थानों पर प्रतिदिन मजदूरों की मंडी लगती है। इसमें काम ढूंढने आने वाले मजदूरों को शौचालय निर्माण के लिए प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र दिया जाएगा। प्रशिक्षित कर इन मजदूरों को काम के साथ मजदूरी भी दी जाएगी और उनका श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन भी कराया जाएगा।
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बेस लाइन सर्वे के अनुसार जिले में चार लाख 22 हजार परिवार खुले में शौच जाते हैं। इन परिवारों को 2020 तक खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य तैयार किया गया था। लेकिन जिला प्रशासन व पंचायत विभाग इस लक्ष्य को दो साल पहले यानि 2018 तक ही पूरा करने की रणनीति तय कर चुके हैं।
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एक अप्रैल 2015 तक जिले में 16000 परिवारों को खुले में शौच जाने से मुक्त कर दिया गया है। इस अभियान की गंभीरता इसी बात से लगाई जा रही है कि मार्च 2016 तक 61 गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने की तैयारी है।
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इन 61 गांवों में चार गांव ओडीएफ (ओपेन डेफीकेशन फ्री) यानि खुले में शौच मुक्त ग्राम पंचायत कर दिया गया है। सात गांव में 80 प्रतिशत परिवारों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया गया है। 34 समग्र गांव व 14 सामान्य गांव में फंक्शनल शौचालय बनाने की रणनीति तय हो गई है।
डीएम गोंडा अजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि जिले के प्रत्येक गांव के रहने वालों को खुले में शौच से रोकने के लिए जागरूकता मुहिम की शुरुआत कर दी गई है।
अब इसे जनांदोलन का रूप देना है, जिससे हर व्यक्ति चाहे वह कर्मचारी हो, अधिकारी हो, सामाजिक कार्यकर्ता हो या फिर गांव का आम आदमी। सबको साथ लेकर गांव-गांव, न्याय पंचायत व ब्लॉक स्तर पर चौपाल लगाई जाएगी।
ये है मास्टर प्लान
- हर गांव में निगरानी समिति का गठन होगा, जो खुले में शौच जाने वाले को टोकेगा।
- परिषदीय, माध्यमिक व डिग्री कॉलेजों में प्रार्थना के समय खुले में शौच मुक्त बनाने का संकल्प दिलाया जाएगा।
- शिक्षक अभिभावक के साथ बैठक कर प्रेरक की भूमिका निभाएंगे।
- नारी ज्ञान स्थली महाविद्यालय व अन्य महाविद्यालयों की छात्राओं का गांव में भ्रमण कराया जाएगा, जो महिलाओं को जागरूक करेंगी।
- गांव में रहने वाले सरकारी, संविदा या अन्य कर्मचारियों को अपने घर में शौचालय निर्माण व प्रयोग का प्रमाण पत्र देना होगा।
- जिला स्तरीय अधिकारी जिन्होंने गांव को गोद लिया है, उन्हें भी गांव को खुले में शौच से मुक्त कराने का प्रमाणपत्र देना होगा।
- गांव में नियमित रूप से स्वच्छता समिति की बैठक होगी।
- महिला ग्राम प्रधान, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री गांव की महिलाओं की चौपाल लगाकर उन्हें जागरूक व प्रेरित करेंगी।
- पहले से बने निष्प्रयोज्य शौचालयों को उपयोगी बनाना।
- विद्यालयों में बने शौचालयों को सबसे पहले दुरुस्त कराकर उपयोगी बनाना।
अलग से दिया जा सकता है आवेदन
यदि गांव में कोई व्यक्ति शौचालय बनवाना चाहता है और उसकी प्रधान से नहीं पटती है तो वह व्यक्ति शौचालय निर्माण के लिए एडीओ पंचायत, बीडीओ या डीपीआरओ को आवेदन कर सकता है। इसके लिए एक आवेदन पत्र मिलेगा, जिसे भरकर व्यक्ति शौचालय निर्माण के लिए धनराशि की मांग कर सकता है। इसमें 12000 की राशि दो किश्तों में दी जाएगी।
होंगे सम्मानित
गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए प्रेरक की भूमिका निभाने वाले व्यक्ति को जिला, मंडल व प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इसमें कर्मचारी, प्रधान, आम व्यक्ति या अधिकारी भी हो सकता है।
मंडी मजदूरों को किया जाएगा प्रशिक्षित
गोंडा नगर में दो स्थानों पर प्रतिदिन मजदूरों की मंडी लगती है। इसमें काम ढूंढने आने वाले मजदूरों को शौचालय निर्माण के लिए प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र दिया जाएगा। प्रशिक्षित कर इन मजदूरों को काम के साथ मजदूरी भी दी जाएगी और उनका श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन भी कराया जाएगा।