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Gonda News: सर्द रातों में जिला अस्पताल में ठिठुर रहे मरीज
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गोंडा। जिला अस्पताल में मरीजों को ठंड से बचाव के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। यहां भर्ती मरीजों को ठिठुरते हुए पूस की रात काटनी पड़ रही है। वहीं अस्पताल में बना रैन बसेरा मेडिकल कॉलेज के निर्माण की जद में आने के कारण ढहा दिया गया, जिससे तीमारदारों के सामने और भी मुश्किल खड़ी हो गई है।
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए पूस की रात भारी पड़ रही है। दिन में धूप खिली रहती है, लेकिन रात में तापमान गिरकर दस डिग्री तक पहुंच रहा है। जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में 120 मरीज भर्ती हैं। मरीजों को ठंड के हिसाब से दो नए कंबल देने का नियम है, लेकिन इन्हें पुराना और एक ही कंबल दिया जा रहा है। मजबूरी में मरीजों को रात ठंड से कांपते हुए गुजारनी पड़ती है।
जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज के तीमारदार नंदकुमार ने बताया कि यहां मिलने वाला कंबल चादर की तरह हल्का है। इससे सामान्य ठंड में भी राहत नहीं मिल सकती। शनिवार को भर्ती होने के बाद पहली रात किसी तरह ठंड से कांपते हुए बितानी पड़ी उसके बाद घर से रजाई मंगाकर ठंड से बचाव किया गया।
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदार पूरी रात ठिठुरते रहते हैं। इनके लिए अस्पताल में न तो अलाव की व्यवस्था है और न ही आसरा के लिए रैन बसेरा बचा है। अस्पताल परिसर में बना रैन बसेरा निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज की जद में आने के कारण ढहा दिया गया।
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीडी गुप्ता ने बताया कि जिला अस्पताल परिसर में अस्थायी रैन बसेरा बनाने को लेकर मंगलवार को बैठक आयोजित की गई है। बैठक में निर्णय के बाद किसी हाल में रैन बसेरा बनाया जाएगा। अभी तक अलाव जलाकर तीमारदारों को ठंड से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए पूस की रात भारी पड़ रही है। दिन में धूप खिली रहती है, लेकिन रात में तापमान गिरकर दस डिग्री तक पहुंच रहा है। जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों में 120 मरीज भर्ती हैं। मरीजों को ठंड के हिसाब से दो नए कंबल देने का नियम है, लेकिन इन्हें पुराना और एक ही कंबल दिया जा रहा है। मजबूरी में मरीजों को रात ठंड से कांपते हुए गुजारनी पड़ती है।
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जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज के तीमारदार नंदकुमार ने बताया कि यहां मिलने वाला कंबल चादर की तरह हल्का है। इससे सामान्य ठंड में भी राहत नहीं मिल सकती। शनिवार को भर्ती होने के बाद पहली रात किसी तरह ठंड से कांपते हुए बितानी पड़ी उसके बाद घर से रजाई मंगाकर ठंड से बचाव किया गया।
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदार पूरी रात ठिठुरते रहते हैं। इनके लिए अस्पताल में न तो अलाव की व्यवस्था है और न ही आसरा के लिए रैन बसेरा बचा है। अस्पताल परिसर में बना रैन बसेरा निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज की जद में आने के कारण ढहा दिया गया।
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीडी गुप्ता ने बताया कि जिला अस्पताल परिसर में अस्थायी रैन बसेरा बनाने को लेकर मंगलवार को बैठक आयोजित की गई है। बैठक में निर्णय के बाद किसी हाल में रैन बसेरा बनाया जाएगा। अभी तक अलाव जलाकर तीमारदारों को ठंड से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।