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लोकतंत्र उत्सव के लिए बूथों पर पोलिंग पार्टियों ने संभाला मोर्चा
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फोटो-21-गोंडा में पोलिंग बूथों के लिए रवाना होते सुरक्षाकर्मी। (संवाद)
- फोटो : GONDA
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गोंडा। विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में रविवार को होने वाले मतदान के लिए जिले की सातों विधानसभा सीटों पर पोलिंग पार्टियों की रवानगी शनिवार को हुई। इस दौरान जिले के 1661 मतदान केंद्रों के लिए शहीदे आजम भगत सिंह इंटर कॉलेज परिसर में बने रवानगी स्थल से 2918 पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों के लिए रवाना हुई। चुनाव आयोग के प्रेक्षकों व जिला निर्वाचन अधिकारी व डीएम की निगरानी में मतदान टोलियों को ईवीएम व वीवीपैट के साथ मतदान में इस्तेमाल होने वाली अन्य जरूरी सामग्री के बस्ते के साथ पुलिस टीम के साथ बूथों पर मोर्चा संभालने को भेजा गया।
रवानगी से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी ने मतदान टोलियों से पूरी निष्पक्षता के साथ मतदान कार्य को संपन्न कराने का आह्वान करते हुए अपील की कि इस दौरान पोलिंग पार्टी का कोई भी सदस्य किसी का आतिथ्य स्वीकार नहीं करेगा। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने बताया कि मतदान कर्मियों को रवाना स्थलों पर सुबह आठ बजे से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। सुबह से ही कर्मचारियों एवं उन्हें ड्यूटी के लिए रवानगी स्थल तक छोड़ने के लिए साथ में आने वाले परिजनों का आना शुरू हो गया था। पोलिंग पार्टियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल एवं होमगार्ड भेजे गए हैं। पोलिंग स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अर्द्धसैनिक बल की 100 कंपनी, एक प्लाटून सिविल पुलिस, कई जिलों से आए 520 निरीक्षक व दरोगा, 5441 आरक्षी, 5180 होमगार्ड की ड्यूटी लगाई गई है। मतदान कार्य को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए जिले को 29 जोन और 197 सेक्टर में बांटा गया है। इसके लिए सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में 1661 मतदान केंद्रों में 2918 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।
अव्यवस्था से जूझते रहे मतदान कार्मिक
विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में रविवार 26 फरवरी को जिले की सातों सीटों के लिए होने वाले मतदान कार्य के लिए शनिवार को 2918 मतदेय स्थलों के लिए 12587 मतदान कर्मियों की टोलियों को रवाना किया गया। मतदान कर्मियों एवं उनके साथ निर्धारित संख्या में पुलिस बल को रवाना करने के लिए शहर में एलबीएस के विज्ञान संकाय व शहीदे आजम भगत सिंह इंटर कॉलेज परिसर में व्यवस्था की गई थी। दोनों जगह अव्यवस्थाओं से भी कर्मचारी जूझते दिखाई पड़े। हेल्प डेस्क के संचालन के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं दिखा। इसके चलते ही कोविड प्रोटोकाल का अनुपालन पूरी तरह हाशिए पर दिखा। परिसर में अनुमानित संख्या से काफी ज्यादा कार्मिकों की मौजूदगी रही। इनमें मतदान कर्मियों के अलावा सुरक्षाकर्मी, वाहन चालक, हेल्पर के साथ ही इन कर्मियों को परिसर तक छोड़ने के लिए आने वाले परिजन भी शामिल थे। सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर मास्क का प्रयोग तक दर किनार दिखा।
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पानी के लिए भटकती रही मतदान टोलियां
तेज धूप के कारण लोगों को पानी के लिए लिए सबसे ज्यादा दिक्कतें हुईं। कहीं पानी के टैंकरों में पानी नहीं था, तो कहीं इसके अलावा पोलिंग पार्टियों के वाहन एवं स्थान को जानने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिला प्रशासन द्वारा यदि दोनों परिसरों में चाय पानी एवं फास्ट फूड के स्टालों की व्यवस्था न कराई गई होती, तो काफी मुश्किल होती। इन स्टालों से पानी आदि खरीद कर लोगों ने किसी तरह काम चलाया।
अंतिम समय तक रही ड्यूटी कटवाने की जोड़-तोड़
मतदान कार्य से अपना नाम हटवाने की जोड़ तोड़ रवानगी से पहले अंतिम समय तक चलती रही। इस दौरान ड्यूटी पर आए कार्मिकों की समस्याओं की सुनवाई करने वाले अधिकारी मौके से घंटों गायब दिखे। सभी का जोर पार्टियों की रवानगी पर दिखा। इसके चलते रवानगी स्थलों पर ड्यूटी कटवाने को लेकर महिलाएं और परिजन परेशानहाल इधर उधर भटकते रहे। इस दौरान तमाम लोगों ने ड्यूटी कटने की आस छोड़ते हुए अपनी पोलिंग पार्टी के साथ मतदान केंद्रों की राह पकड़ना ही बेहतर समझा। रवानगी के दौरान पूरे समय जिलाधिकारी की ओर से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी माइक से गूंजती रही। डीएम डॉ. उज्जवल कुमार ने निरीक्षण करते हुए मतदान कर्मियों से लोकतंत्र में मतदान ड्यूटी को अपना पुनीत कर्तव्य समझते हुए निश्चिंत होकर निष्पक्ष मतदान करवाने का आह्वान भी किया।
रिजर्व कार्मिक भी रहे मौजूद
विधानसभा के सभी 2918 बूथों के लिए पोलिंग पार्टियां भले ही रवाना हो गयी हों, लेकिन रिजर्व पार्टियों को चारों तहसील मुख्यालयों पर रिटर्निंग अधिकारियों की देखरेख में रखा गया। बूथों पर तैनात पोलिंग पार्टियों में से किसी को भी कोई गंभीर चिकित्सीय समस्या होती है, तो इस रिजर्व टीम के सदस्यों को बदल दिया जाएगा।
नेटवर्क फाल्ट से करनी पड़ी मशक्कत
पोलिंग पार्टियों को इकट्ठा करने में पीठासीन व सेक्टर मजिस्ट्रेट को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान मोबाइल नेटवर्क की कमजोर कनेक्टिविटी के कारण पोलिंग पार्टियों को ईवीएम और स्टेशनरी वितरित करने के दौरान टीम को अपने साथियों को ढूंढने में काफी परेशानी हुई। मोबाइल फोन न मिल पाने से मतदान अधिकारी व कर्मचारी अपनी टीम में शामिल सदस्यों को अपनी लोकेशन बताने को लेकर परेशानहाल दिखे।
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रवानगी से पहले जिला निर्वाचन अधिकारी ने मतदान टोलियों से पूरी निष्पक्षता के साथ मतदान कार्य को संपन्न कराने का आह्वान करते हुए अपील की कि इस दौरान पोलिंग पार्टी का कोई भी सदस्य किसी का आतिथ्य स्वीकार नहीं करेगा। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने बताया कि मतदान कर्मियों को रवाना स्थलों पर सुबह आठ बजे से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। सुबह से ही कर्मचारियों एवं उन्हें ड्यूटी के लिए रवानगी स्थल तक छोड़ने के लिए साथ में आने वाले परिजनों का आना शुरू हो गया था। पोलिंग पार्टियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल एवं होमगार्ड भेजे गए हैं। पोलिंग स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अर्द्धसैनिक बल की 100 कंपनी, एक प्लाटून सिविल पुलिस, कई जिलों से आए 520 निरीक्षक व दरोगा, 5441 आरक्षी, 5180 होमगार्ड की ड्यूटी लगाई गई है। मतदान कार्य को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए जिले को 29 जोन और 197 सेक्टर में बांटा गया है। इसके लिए सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में 1661 मतदान केंद्रों में 2918 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं।
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अव्यवस्था से जूझते रहे मतदान कार्मिक
विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण में रविवार 26 फरवरी को जिले की सातों सीटों के लिए होने वाले मतदान कार्य के लिए शनिवार को 2918 मतदेय स्थलों के लिए 12587 मतदान कर्मियों की टोलियों को रवाना किया गया। मतदान कर्मियों एवं उनके साथ निर्धारित संख्या में पुलिस बल को रवाना करने के लिए शहर में एलबीएस के विज्ञान संकाय व शहीदे आजम भगत सिंह इंटर कॉलेज परिसर में व्यवस्था की गई थी। दोनों जगह अव्यवस्थाओं से भी कर्मचारी जूझते दिखाई पड़े। हेल्प डेस्क के संचालन के लिए कोई कर्मचारी मौजूद नहीं दिखा। इसके चलते ही कोविड प्रोटोकाल का अनुपालन पूरी तरह हाशिए पर दिखा। परिसर में अनुमानित संख्या से काफी ज्यादा कार्मिकों की मौजूदगी रही। इनमें मतदान कर्मियों के अलावा सुरक्षाकर्मी, वाहन चालक, हेल्पर के साथ ही इन कर्मियों को परिसर तक छोड़ने के लिए आने वाले परिजन भी शामिल थे। सोशल डिस्टेंसिंग से लेकर मास्क का प्रयोग तक दर किनार दिखा।
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पानी के लिए भटकती रही मतदान टोलियां
तेज धूप के कारण लोगों को पानी के लिए लिए सबसे ज्यादा दिक्कतें हुईं। कहीं पानी के टैंकरों में पानी नहीं था, तो कहीं इसके अलावा पोलिंग पार्टियों के वाहन एवं स्थान को जानने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिला प्रशासन द्वारा यदि दोनों परिसरों में चाय पानी एवं फास्ट फूड के स्टालों की व्यवस्था न कराई गई होती, तो काफी मुश्किल होती। इन स्टालों से पानी आदि खरीद कर लोगों ने किसी तरह काम चलाया।
अंतिम समय तक रही ड्यूटी कटवाने की जोड़-तोड़
मतदान कार्य से अपना नाम हटवाने की जोड़ तोड़ रवानगी से पहले अंतिम समय तक चलती रही। इस दौरान ड्यूटी पर आए कार्मिकों की समस्याओं की सुनवाई करने वाले अधिकारी मौके से घंटों गायब दिखे। सभी का जोर पार्टियों की रवानगी पर दिखा। इसके चलते रवानगी स्थलों पर ड्यूटी कटवाने को लेकर महिलाएं और परिजन परेशानहाल इधर उधर भटकते रहे। इस दौरान तमाम लोगों ने ड्यूटी कटने की आस छोड़ते हुए अपनी पोलिंग पार्टी के साथ मतदान केंद्रों की राह पकड़ना ही बेहतर समझा। रवानगी के दौरान पूरे समय जिलाधिकारी की ओर से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी माइक से गूंजती रही। डीएम डॉ. उज्जवल कुमार ने निरीक्षण करते हुए मतदान कर्मियों से लोकतंत्र में मतदान ड्यूटी को अपना पुनीत कर्तव्य समझते हुए निश्चिंत होकर निष्पक्ष मतदान करवाने का आह्वान भी किया।
रिजर्व कार्मिक भी रहे मौजूद
विधानसभा के सभी 2918 बूथों के लिए पोलिंग पार्टियां भले ही रवाना हो गयी हों, लेकिन रिजर्व पार्टियों को चारों तहसील मुख्यालयों पर रिटर्निंग अधिकारियों की देखरेख में रखा गया। बूथों पर तैनात पोलिंग पार्टियों में से किसी को भी कोई गंभीर चिकित्सीय समस्या होती है, तो इस रिजर्व टीम के सदस्यों को बदल दिया जाएगा।
नेटवर्क फाल्ट से करनी पड़ी मशक्कत
पोलिंग पार्टियों को इकट्ठा करने में पीठासीन व सेक्टर मजिस्ट्रेट को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान मोबाइल नेटवर्क की कमजोर कनेक्टिविटी के कारण पोलिंग पार्टियों को ईवीएम और स्टेशनरी वितरित करने के दौरान टीम को अपने साथियों को ढूंढने में काफी परेशानी हुई। मोबाइल फोन न मिल पाने से मतदान अधिकारी व कर्मचारी अपनी टीम में शामिल सदस्यों को अपनी लोकेशन बताने को लेकर परेशानहाल दिखे।