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Gonda News: 16 वर्ष से नहीं खुला ओटी का ताला, औजारों में लग गई जंग
Sun, 15 Dec 2024 11:11 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 15 Dec 2024 11:11 PM IST
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रेलवे अस्पताल में बंद ऑपरेशन थिएटर। - संवाद
गोंडा। पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ डिवीजन के अंतर्गत गोंडा स्थित उप मंडलीय दर्जा प्राप्त रेलवे अस्पताल बदहाली का शिकार है। सर्जन न होने से ओटी का ताला ही नहीं खुलता है। ऐसे में रेलकर्मियों व उनके परिजनों को स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रही है। व्यवस्था में सुधार के लिए संगठनों के पदाधिकारियों एवं पेंशनर एसोसिएशन की तरफ से मांग की जा रही है।
गोंडा रेलवे स्टेशन व यार्ड को आदर्श श्रेणी में गिना जाता है। यहां पर स्थित रेलवे अस्पताल डिवीजन में उप मंडलीय दर्जा प्राप्त है। यहां पर करीब पांच हजार रेलकर्मी और उनके परिवार के सदस्यों के साथ ही बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती व बस्ती जनपद के भी रेलकर्मी उपचार कराने के लिए आते रहे हैं। सीनियर सर्जन रहे डॉ. मनोज सिन्हा ने मार्च 2008 को अस्पताल से त्यागपत्र दे दिया था। तब से 16 वर्ष बीत गए। ऑपरेशन थिएटर खुला ही नहीं है। डॉक्टरों व स्टाफ की कमी के कारण रेलवे अस्पताल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। यहां पर समय से दवा भी नहीं मिल पा रही है। सर्जन के साथ ही महिला विशेषज्ञ भी नहीं हैं। इससे रेलकर्मियों व उनके परिजनों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
रेलवे अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज मंडल ने बताया कि कुछ दवाओं की उपलब्धता नहीं है। रेलवे अस्पताल में प्रतिदिन सुधार किया जा रहा है। प्रयास है कि रेलकर्मियों को बेहतर सुविधा मिले।
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पूर्वोत्तर रेलवे पेंशनर्स एसोसिएशन रेलवे अस्पताल में गंभीर बीमारियों में तीन माह की दवा देने तथा जीवनरक्षक उपकरणों को बढ़ाने की मांग लगातार कर रहा है। प्रमुख सचिव व मुख्य चिकित्सा निदेशक को ज्ञापन भी सौंपा गया। रेलवे की महाप्रबंधक को भी पत्र लिखा गया। जिसके बाद महाप्रबंधक सौम्या माथुर ने गंभीर बीमारियों में तीन माह की दवा देने का निर्देश दिया। इस पर रेलकर्मियों व सेवानिवृत कर्मचारियों ने खुशी व्यक्त की है। एसोसिएशन के पदाधिकारी अमिय रमण, जयप्रकाश द्विवेदी, डीएम त्रिपाठी, राधेश्याम सिंह, एके कोहली, सुभाष चौधरी, मुन्नी लाल गुप्ता, भानु प्रकाश नारायण, अशोक सिंह, नजमुद्दीन ने आभार प्रकट किया है।
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गोंडा रेलवे स्टेशन व यार्ड को आदर्श श्रेणी में गिना जाता है। यहां पर स्थित रेलवे अस्पताल डिवीजन में उप मंडलीय दर्जा प्राप्त है। यहां पर करीब पांच हजार रेलकर्मी और उनके परिवार के सदस्यों के साथ ही बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती व बस्ती जनपद के भी रेलकर्मी उपचार कराने के लिए आते रहे हैं। सीनियर सर्जन रहे डॉ. मनोज सिन्हा ने मार्च 2008 को अस्पताल से त्यागपत्र दे दिया था। तब से 16 वर्ष बीत गए। ऑपरेशन थिएटर खुला ही नहीं है। डॉक्टरों व स्टाफ की कमी के कारण रेलवे अस्पताल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। यहां पर समय से दवा भी नहीं मिल पा रही है। सर्जन के साथ ही महिला विशेषज्ञ भी नहीं हैं। इससे रेलकर्मियों व उनके परिजनों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
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रेलवे अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज मंडल ने बताया कि कुछ दवाओं की उपलब्धता नहीं है। रेलवे अस्पताल में प्रतिदिन सुधार किया जा रहा है। प्रयास है कि रेलकर्मियों को बेहतर सुविधा मिले।
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पूर्वोत्तर रेलवे पेंशनर्स एसोसिएशन रेलवे अस्पताल में गंभीर बीमारियों में तीन माह की दवा देने तथा जीवनरक्षक उपकरणों को बढ़ाने की मांग लगातार कर रहा है। प्रमुख सचिव व मुख्य चिकित्सा निदेशक को ज्ञापन भी सौंपा गया। रेलवे की महाप्रबंधक को भी पत्र लिखा गया। जिसके बाद महाप्रबंधक सौम्या माथुर ने गंभीर बीमारियों में तीन माह की दवा देने का निर्देश दिया। इस पर रेलकर्मियों व सेवानिवृत कर्मचारियों ने खुशी व्यक्त की है। एसोसिएशन के पदाधिकारी अमिय रमण, जयप्रकाश द्विवेदी, डीएम त्रिपाठी, राधेश्याम सिंह, एके कोहली, सुभाष चौधरी, मुन्नी लाल गुप्ता, भानु प्रकाश नारायण, अशोक सिंह, नजमुद्दीन ने आभार प्रकट किया है।