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विद्यालयों में नहीं बंटा दूध
अमर उजाला ब्यूरो/ गोंडा
Updated Wed, 15 Jul 2015 10:23 PM IST
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शासन ने परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए मिड-डे मील के मेन्यू में बदलाव किया है। बुधवार से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को मध्याह्न भोजन के साथ दूध दिया जाना था। पर जिले में पहले ही दिन मिड-डे मिल का मेन्यू धराशाई हो गया।
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एक-दो स्कूलों को छोड़ दें तो किसी भी स्कूल में दूध का वितरण नहीं हो सका। इसका प्रमुख कारण गांव में ही दूध का न मिलना है। ग्रामीण भी चाय बनाने के लिए दूध खरीदते हैं। मिड-डे मील का हाल किसी से छिपा नहीं है। करीब 30 प्रतिशत विद्यालयों में मिड-डे मील बनता ही नहीं है, जबकि कई जगह बच्चों की संख्या बढ़ाकर नौनिहालों के भोजन का पैसा चट किया जा रहा है। इसका खुलासा कई बार अधिकारियों के छापे में हो चुका है।
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शिक्षकों ने खड़े किए हाथ
अहिरनपुरवा में 122 बच्चे पंजीकृत हैं। बुधवार को 63 बच्चे उपस्थित थे, जो हाथों में प्लेट लिए चावल-कोफ्ता खाने में मस्त थे। प्रधानाध्यापक अनिल कुमार गौड़ ने बताया कि मीटिंग में तो कहा गया था कि शासनादेश के अनुसार सप्ताह में प्रत्येक बुधवार को 200 मिली. दूध देना है, लेकिन इसके लिए कोई बजट नहीं मिला। प्राथमिक विद्यालय बालपुर में एमडीएम में खाने के लिए चावल-कढ़ी दी गई थी। इस विद्यालय में 157 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें 65 उपस्थित थे। प्रधानाध्यापिका कामिनी तिवारी ने कहा कि दूध के लिए अधिकारी से बात की थी। उन्होंने बजट न होने की बात कही थी।
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जूनियर हाईस्कूल बालपुर में 87 बच्चे पंजीकृत हैं। मौके पर 35 बच्चे उपस्थित मिले। प्रधानाध्यापिका अरूना द्विवेदी ने बताया कि दूध देने के लिए केवल मीटिंग में दिशा-निर्देश दिया गया है। लेकिन इसके लिए अलग से कोई बजट नहीं आया है ऐसी स्थिति में 5.78 रुपये में बच्चों को दूध दे पाना संभव नहीं है।
जूनियर हाईस्कूल रेरूवा में 87 बच्चे पंजीकृत हैं। बुधवार को 39 बच्चे ही विद्यालय में मौजूद थे। प्रधानाध्यापक संजय कुमार वर्मा ने बताया कि बुधवार को मेन्यू हिसाब से कोफ्ता-चावल बना था। दूध प्रत्येक बच्चों को आज की तारीख में दिए जाने की बात अधिकारियों से सुनी थी लेकिन यह योजना सफल नहीं हो पायेगी। कोई भी दूधिया सप्ताह में एक दिन दूध देने के लिए तैयार नहीं होगा।
कनवर्जन कास्ट कम होने से दिक्कत
15 जुलाई से सभी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 200 मिली. दूध प्रति छात्र के हिसाब से दिया जाना था लेकिन इसके लिए शासन ने अलग से कोई बजट नहीं दिया। जिससे बच्चों को दूध नहीं दिया जा सका। प्राधानाध्यापकों ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय में 3.86 रुपये प्रति छात्र और उच्च प्राथमिक विद्यालय में 5.78 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से कनवर्जन कास्ट मिलता है, ऐसे मे इस बजट में बच्चों को दूध दे पाना नामुमकिन है।