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Gonda News: हेल्थ एटीएम के लिए चिप नहीं, लिवर की जांच भी ठप

Sat, 01 Mar 2025 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sat, 01 Mar 2025 11:36 PM IST
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No chip for health ATM, liver testing also stalled
परसपुर(गोंडा)। सीएचसी में इलााज के लिए पहुंचीं आंटा रोहनी पुरवा की कुसुमा उलझन में थीं। वजह भी खास थी। डॉक्टर ने लिवर सहित अन्य जांच कराने के लिए कहा था, लेकिन जब वह जांच कराने के लिए पहुंचीं तो पता चला कि जांच यहां नहीं हो रही है। यह समस्या किसी एक की नहीं, बल्कि सीएचसी आने वाले अन्य मरीजों की भी है।
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सीएचसी पर हर रोज करीब 300 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके बाद भी संसाधनों का अभाव है। जांच के नाम पर सिर्फ हीमोग्लोबिन, शुगर, एचसीबी, एचबीएस एजी, टीबी, मलेरिया, डेंगू की ही जांच हो रही है।
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सबसे बड़ी समस्या बायोकेमिस्ट्री जांच की है। मशीन में तकनीकी समस्या है। इससे लिवर फंक्शन, मैग्नीशियम, टोटल प्रोटीन, कैल्शियम की जांच ठप है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि संबंधित कंपनी को समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन मरम्मत के लिए अभी पहल नहीं की गई। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। एक रुपये के पर्चे पर होने वाली जांच के लिए 500 से लेकर एक हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यही नहीं, हेल्थ एटीएम एक कमरे में बंद पड़ा है। बताया गया कि हेल्थ एटीएम के लिए मात्र 10 चिप ही आई थी, वह भी खत्म हो गई। ऐसे में यह सुविधा भी नहीं मिल रही है। महज पांच मिनट में होने वाली जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।
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अधीक्षक डॉ. लोकेश शुक्ल ने बताया कि बायोकेमिस्ट्री मशीन खराब है। कई बार कंपनी को फोन करके समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन सही नहीं कराया गया है। रसायन आ गया है, इससे सीबीसी जांच शुरू हो गई है। हेल्थ एटीएम के मुद्दे पर वह कन्नी काटते नजर आए।






यह भी है समस्या
सीएचसी पर एलोपैथिक में सिर्फ एक ही चिकित्सक की तैनाती है। पीएचसी भौरीगंज के डॉक्टर को अटैच किया गया है। आयुष से डॉ. रेखा व डॉ. ओपी गुप्ता के साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम है।

डेंटल सर्जन विनीत सिंह की तैनाती है, लेकिन संसाधन नहीं हैं। ऐसे में वह सिर्फ ओपीडी ही करते हैं।

एक्सरे जांच में बिजली का संकट है। बिजली रहने पर ही जांच होती है। जनरेटर से कनेक्शन नहीं है। ऐसे में मरीजों को समस्या होती है।

नेत्र परीक्षण का काम भी सिर्फ तीन दिन होता है। ऐसे में मंगलवार, बृहस्पतिवार व शनिवार को आने वाले मरीजों को वापस होना पड़ता है। वजह नेत्र परीक्षण अधिकारी तीन दिन सीएचसी बेलसर में बैठते हैं।







मरीजों का दर्द
ग्राम चरहुआं निवासी रामावती बीमार हैं। बताया कि डॉक्टर ने खून की जांच लिखी है। अंदर जाने पर बताया गया है यह जांच यहां नहीं हो रही है। इसलिए मजबूरी में बाहर जाना पड़ा।
ग्राम गोरछान पुरवा गजसिंहपुर निवासी खुशबू सिंह ने बताया कि डॉक्टर को दिखाने पर यूरिक एसिड व थायराइड की जांच कराने के लिए कहा गया है, लेकिन जांच बाहर से करानी पड़ी।


ग्राम दुरगोंड़वा निवासी बब्लू बीमार है। सीएचसी पर दिखाने के बाद डॉक्टर ने पीपीडी, एचआईबी, सीबीसी व ईएसआर की जांचें लिखी हैं। बताया कि वह गरीब हैं। अंदर से जांचें न होने के कारण बाहर से कराया गया है।
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