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एनजीटी का चला हंटर, 36 आरा मशीनों के लाइसेंस रद
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गोंडा में डीएफओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते आरा मशीन संचालक।
- फोटो : GONDA
गोंडा। पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर कार्यरत एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने प्रदेश के वन विभाग को करारा झटका दिया है। एनजीटी ने प्रदेश सरकार की तरफ से पिछले वर्ष मार्च में जारी किए गए 1250 आरा मशीनों का लाइसेंस रद कर दिया है। एनजीटी के आदेश के बाद प्रदेश मे संचालित इन आरा मशीनों का संचालन ठप हो गया है। एनजीटी के इस आदेश का असर जिले में चल रही 36 आरा मशीनों पर भी पड़ा है और वन विभाग ने इन आरा मशीनों का संचालन रोक दिया है। मशीनों का संचालन ठप होने से लाइसेंस लेने वाले ठेकेदारों का करोड़ों रुपया फंस गया है।
प्रदेश भर में लकड़ी की अवैध कटान पर लगाम लगाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष आरा मशीन संचालकों को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया अपनायी थी। सरकार ने प्रदेश भर मे 1250 नए लाइसेंस देने की स्वीकृति प्रदान की थी। इसके लिए टेंडर निकालकर आवेदन मांगे गए थे। आरा मशीन लाइसेंस के लिए करीब 14 हजार लोगों ने आवेदन किया था। बड़ी संख्या मे आवेदन देख सरकार ने लॉटरी के जरिए लाइसेंस धारकों का चयन किया था और चयनित लाइसेंस धारकों से पांच वर्ष की रायल्टी के तौर पर उनसे 1.50 लाख रुपये की फीस जमा कराई थी।
रायल्टी लेने के बाद सभी को प्रोविजनल लाइसेंस देकर छह माह के भीतर आरा मशीन स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम मे जिले के 36 आवेदकों को आरा मशीन संचालन का प्रोविजनल लाइसेंस जारी हुआ था। सरकार के इस आदेश के क्रम मे लाइसेंस पाने वाले लोगों ने 25 से 30 लाख रुपये की पूंजी लगाकर मशीन स्थापित कर ली। इसी बीच संवत फाउंडेशन नाम की एक सामाजिक संस्था ने एनजीटी में सपकार के इस फैसले के खिलाफ रिट दायर कर दिया।
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फाउंडेशन ने तर्क दिया कि प्रदेश मे उपलब्ध वन संपदा के आधार पर पहले से ही पर्याप्त लकड़ी आधारित उद्योग संचालित हो रहे हैं। यदि और भी लाइसेंस जारी किया गया तो वह संपदा को क्षति पहुंचेगी और पर्यावरण का संतुलन बिगडे़गा। इस पर एनजीटी ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस नोटिस के जवाब में प्रदेश सरकार ने एनजीटी के समक्ष जो तर्क रखा वह नाकाफी रहा और एनजीटी ने मार्च 2019 मे जारी किए गए आरा मशीनों के सभी लाइसेंस को 18 फरवरी को रद्द करने का आदेश दे दिया।
लाइसेंस की मांग को लेकर आरा मशीन संचालकों ने किया प्रदर्शन
गोंडा। आरा मशीनों का लाइसेंस रद्द किए जाने और संचालन ठप होने से नाराज मशीन संचालकों ने शनिवार को वन विभाग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया और उन्हें परमानेंट लाइसेंस जारी कर मशीनों का संचालन शुरू कराए जाने की मांग की। मशीन संचालकों का नेतृत्व कर रहे संचालक कुंवर उमेश सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष मार्च महीने में वन विभाग ने लॉटरी पद्धति से जिले में 36 मशीनों का लाइसेंस स्वीकृत किया था। विभाग ने सभी संचालकों से पांच वर्ष की रायल्टी फीस लेकर रूप मे 1.50 लीख रुपये जमा कराए थे और सभी को प्रोविजनल लाइसेंस जारी किया था।
उमेश का कहना है कि लाइसेंस मिलने के बाद सभी लोगों ने मशीनें स्थापित कर ली। इसमें प्रत्येक संचालक का करीब 25 से 30 लाख रुपये खर्च हो गया। अब विभाग ने एनजीटी के आदेश का हवाला देकर उनकी मशीनों का संचालन ठप करा दिया है और उन्हें परमानेंट लाइसेंस भी नहीं जारी कर रहा है। विभाग की इस मनमानी से मशीन संचालकों का करोड़ों रुपया फंस गया है और लाइसेंस लेने वाले संचालक सड़क पर आ गए हैं।
आरोप है कि लाखों रुपये का कर्ज लेकर उन्होंने मशीन स्थापित की थी लेकिन अब उनका रुपया डूबने से कगार पर पहुंच गया है। आक्रोशित संचालकों ने लाइसेंस न मिलने पर आत्मदान की चेतावनी दी है। प्रदर्शन करने वालों मे अशोक सिंह, प्रमोद मौर्या, मो हासिम, नवाब अली, संदीप कुमार शुक्ल रामनरेश मिश्र ,सद्गाम हुसैन, कौशल किशोर पांडेय, विजय तिवारी समेत अन्य मशीन संचालक मौजूद रहे।
शासन के आदेश पर लॉटरी के माध्यम से आरा मशीन के लाइसेंस जारी हुए थे। इस पर रोक लगने से स्थाई नहीं किए गए हैं। शासन की ओर से जैसा आदेश जारी होगा आगे की कार्रवाई की जाएगी। -राज कुमार त्रिपाठी, डीएफओ गोंडा
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प्रदेश भर में लकड़ी की अवैध कटान पर लगाम लगाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष आरा मशीन संचालकों को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया अपनायी थी। सरकार ने प्रदेश भर मे 1250 नए लाइसेंस देने की स्वीकृति प्रदान की थी। इसके लिए टेंडर निकालकर आवेदन मांगे गए थे। आरा मशीन लाइसेंस के लिए करीब 14 हजार लोगों ने आवेदन किया था। बड़ी संख्या मे आवेदन देख सरकार ने लॉटरी के जरिए लाइसेंस धारकों का चयन किया था और चयनित लाइसेंस धारकों से पांच वर्ष की रायल्टी के तौर पर उनसे 1.50 लाख रुपये की फीस जमा कराई थी।
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रायल्टी लेने के बाद सभी को प्रोविजनल लाइसेंस देकर छह माह के भीतर आरा मशीन स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम मे जिले के 36 आवेदकों को आरा मशीन संचालन का प्रोविजनल लाइसेंस जारी हुआ था। सरकार के इस आदेश के क्रम मे लाइसेंस पाने वाले लोगों ने 25 से 30 लाख रुपये की पूंजी लगाकर मशीन स्थापित कर ली। इसी बीच संवत फाउंडेशन नाम की एक सामाजिक संस्था ने एनजीटी में सपकार के इस फैसले के खिलाफ रिट दायर कर दिया।
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फाउंडेशन ने तर्क दिया कि प्रदेश मे उपलब्ध वन संपदा के आधार पर पहले से ही पर्याप्त लकड़ी आधारित उद्योग संचालित हो रहे हैं। यदि और भी लाइसेंस जारी किया गया तो वह संपदा को क्षति पहुंचेगी और पर्यावरण का संतुलन बिगडे़गा। इस पर एनजीटी ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस नोटिस के जवाब में प्रदेश सरकार ने एनजीटी के समक्ष जो तर्क रखा वह नाकाफी रहा और एनजीटी ने मार्च 2019 मे जारी किए गए आरा मशीनों के सभी लाइसेंस को 18 फरवरी को रद्द करने का आदेश दे दिया।
लाइसेंस की मांग को लेकर आरा मशीन संचालकों ने किया प्रदर्शन
गोंडा। आरा मशीनों का लाइसेंस रद्द किए जाने और संचालन ठप होने से नाराज मशीन संचालकों ने शनिवार को वन विभाग के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया और उन्हें परमानेंट लाइसेंस जारी कर मशीनों का संचालन शुरू कराए जाने की मांग की। मशीन संचालकों का नेतृत्व कर रहे संचालक कुंवर उमेश सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष मार्च महीने में वन विभाग ने लॉटरी पद्धति से जिले में 36 मशीनों का लाइसेंस स्वीकृत किया था। विभाग ने सभी संचालकों से पांच वर्ष की रायल्टी फीस लेकर रूप मे 1.50 लीख रुपये जमा कराए थे और सभी को प्रोविजनल लाइसेंस जारी किया था।
उमेश का कहना है कि लाइसेंस मिलने के बाद सभी लोगों ने मशीनें स्थापित कर ली। इसमें प्रत्येक संचालक का करीब 25 से 30 लाख रुपये खर्च हो गया। अब विभाग ने एनजीटी के आदेश का हवाला देकर उनकी मशीनों का संचालन ठप करा दिया है और उन्हें परमानेंट लाइसेंस भी नहीं जारी कर रहा है। विभाग की इस मनमानी से मशीन संचालकों का करोड़ों रुपया फंस गया है और लाइसेंस लेने वाले संचालक सड़क पर आ गए हैं।
आरोप है कि लाखों रुपये का कर्ज लेकर उन्होंने मशीन स्थापित की थी लेकिन अब उनका रुपया डूबने से कगार पर पहुंच गया है। आक्रोशित संचालकों ने लाइसेंस न मिलने पर आत्मदान की चेतावनी दी है। प्रदर्शन करने वालों मे अशोक सिंह, प्रमोद मौर्या, मो हासिम, नवाब अली, संदीप कुमार शुक्ल रामनरेश मिश्र ,सद्गाम हुसैन, कौशल किशोर पांडेय, विजय तिवारी समेत अन्य मशीन संचालक मौजूद रहे।
शासन के आदेश पर लॉटरी के माध्यम से आरा मशीन के लाइसेंस जारी हुए थे। इस पर रोक लगने से स्थाई नहीं किए गए हैं। शासन की ओर से जैसा आदेश जारी होगा आगे की कार्रवाई की जाएगी। -राज कुमार त्रिपाठी, डीएफओ गोंडा