{"_id":"47bc2b6baccadf42d31e4c26d32aae71","slug":"negligence-of-teachers-funds-to-be-trapped-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षकों की लापरवाही, फंस सकता धन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षकों की लापरवाही, फंस सकता धन
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2015 11:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूनीफॉर्म वितरण में शिक्षक नेताओं की मनमानी के कारण इस बार भी करीब तीन करोड़ रुपया फंस सकता है। इसका एक कारण शिक्षक नेताओं की ओर से यूनीफॉर्म वितरण के लिए पैसा एक साथ मांगा जाना भी है। विभाग ड्रेस वितरण के लिए एक किश्त जारी करने के बाद शेष राशि गुणवत्ता जांच के बाद ही उपलब्ध कराता है। पिछली बार भी उपभोग प्रमाण पत्र उपलब्ध न कराने और यूनिफॉर्म से वितरण न होने पर इतना ही धन वापस हो गया था।
एक तरफ सरकार शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर दे रही है तो यहां शिक्षा की गुणवत्ता को छोड़ हर मुद्दों पर चर्चा जोर है। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा अठ तक पढ़ने वाले तीन लाख 21 हजार बच्चों को नि:शुल्क यूनीफॉर्म वितरण की व्यवस्था है।
प्रति बच्चों को दो यूनीफार्म वितरण के लिए 400-400 रुपये दिए जाते है। शासन के निर्देश पर यूनीफार्म वितरण की दो तिहाई धनराशि करीब नौ करोड़ रुपये विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में दी गई है। शेष धनराशि तीन करोड़ रुपये नियमानुसार व गुणवत्ता पूर्ण यूनीफॉर्म वितरण के बाद विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजी जाएंगी, लेकिन यहां शिक्षक नेता पूरी धनराशि की मांग को लेकर यूनीफॉर्म वितरण का विरोध कर रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले वर्ष समय से यूनीफॉर्म का वितरण न होने और उपभोग प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप पर न उपलब्ध कराने के कारण करीब तीन करोड़ रुपये यूनीफॉर्म वितरण का वापस हो गया था।
अहम बात ये है कि इस बार यदि समय से यूनीफॉर्म का वितरण नहीं हुआ और समय से उपभोग प्रमाण पत्र नहीं जमा किया गया तो इस बार भी यूनीफॉर्म का तीन करोड़ रुपया फंस सकता है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. फतेह बहादुर सिंह ने बताया यूनीफॉर्म वितरण करने व शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के लिए सभी खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन
एक तरफ सरकार शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर दे रही है तो यहां शिक्षा की गुणवत्ता को छोड़ हर मुद्दों पर चर्चा जोर है। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा अठ तक पढ़ने वाले तीन लाख 21 हजार बच्चों को नि:शुल्क यूनीफॉर्म वितरण की व्यवस्था है।
विज्ञापन
प्रति बच्चों को दो यूनीफार्म वितरण के लिए 400-400 रुपये दिए जाते है। शासन के निर्देश पर यूनीफार्म वितरण की दो तिहाई धनराशि करीब नौ करोड़ रुपये विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में दी गई है। शेष धनराशि तीन करोड़ रुपये नियमानुसार व गुणवत्ता पूर्ण यूनीफॉर्म वितरण के बाद विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजी जाएंगी, लेकिन यहां शिक्षक नेता पूरी धनराशि की मांग को लेकर यूनीफॉर्म वितरण का विरोध कर रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले वर्ष समय से यूनीफॉर्म का वितरण न होने और उपभोग प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप पर न उपलब्ध कराने के कारण करीब तीन करोड़ रुपये यूनीफॉर्म वितरण का वापस हो गया था।
अहम बात ये है कि इस बार यदि समय से यूनीफॉर्म का वितरण नहीं हुआ और समय से उपभोग प्रमाण पत्र नहीं जमा किया गया तो इस बार भी यूनीफॉर्म का तीन करोड़ रुपया फंस सकता है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. फतेह बहादुर सिंह ने बताया यूनीफॉर्म वितरण करने व शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के लिए सभी खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।