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Gonda News: जिला अस्पताल में दिल के डॉक्टर नहीं, पांच की मौत
Sat, 21 Jan 2023 12:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 21 Jan 2023 12:26 AM IST
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गोंडा। कड़ाके की ठंड के बीच जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी दिल के रोगियों पर आफत बनकर टूट रही है। अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ न होने से शुक्रवार को यहां भर्ती पांच लोगों को जान गंवानी पड़ी। वहीं अन्य बीमारियों से दो लोगों की मौत हो गई।
जिला अस्पताल में पिछले तीन सालों से हृदय रोगियों के इलाज की व्यवस्था पटरी से उतरी है। विशेषज्ञ डाक्टर न होने से दिल के मरीजों को गोल्डन ऑवर में इलाज नहीं मिल पा रहा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में भर्ती सैफुननिशा, रंजना, मो. शब्बीर, फूलमती व लल्लन दूबे की हृदयघात के चलते इलाज के दौरान मौत हो गई। जिला अस्पताल में भर्ती चौराजी की सांस फूलने तथा राम बहादुर की शुगर के कारण मौत हो गई। करीब तीन साल पहले जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत होने के बाद से कार्डियोलॉजिस्ट की कुर्सी खाली पड़ी है।
इनसेट
बिना जांच के कंडम हो रहे उपकरण
जिला अस्पताल में करीब दस साल पहले हृदयरोग की जांच के लिए टीएमटी व टू-डी इको मशीनों की खरीद की गई थी। इससे मरीजों की हार्ट बीट मापकर हार्टअटैक का आकलन होना था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते मशीनों को अब तक इंस्टॉल ही नहीं किया जा सका। ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज सिर्फ ईसीजी के सहारे चल रहा है। वर्ष 2021 में तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. घनश्याम सिंह ने जांच से जुड़ी कई मशीनों को कंडम तक घोषित कर दिया था।
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-जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति किए जाने को लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। बीते दिनों ही शासन को पत्र भेजकर हृदय रोग के इलाज से जुड़े डॉक्टर तथा जरूरी जांच मशीनों को उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा मिल सके।
-डॉ. पीडी गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में पिछले तीन सालों से हृदय रोगियों के इलाज की व्यवस्था पटरी से उतरी है। विशेषज्ञ डाक्टर न होने से दिल के मरीजों को गोल्डन ऑवर में इलाज नहीं मिल पा रहा है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में भर्ती सैफुननिशा, रंजना, मो. शब्बीर, फूलमती व लल्लन दूबे की हृदयघात के चलते इलाज के दौरान मौत हो गई। जिला अस्पताल में भर्ती चौराजी की सांस फूलने तथा राम बहादुर की शुगर के कारण मौत हो गई। करीब तीन साल पहले जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत होने के बाद से कार्डियोलॉजिस्ट की कुर्सी खाली पड़ी है।
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बिना जांच के कंडम हो रहे उपकरण
जिला अस्पताल में करीब दस साल पहले हृदयरोग की जांच के लिए टीएमटी व टू-डी इको मशीनों की खरीद की गई थी। इससे मरीजों की हार्ट बीट मापकर हार्टअटैक का आकलन होना था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते मशीनों को अब तक इंस्टॉल ही नहीं किया जा सका। ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज सिर्फ ईसीजी के सहारे चल रहा है। वर्ष 2021 में तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डॉ. घनश्याम सिंह ने जांच से जुड़ी कई मशीनों को कंडम तक घोषित कर दिया था।
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-जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति किए जाने को लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। बीते दिनों ही शासन को पत्र भेजकर हृदय रोग के इलाज से जुड़े डॉक्टर तथा जरूरी जांच मशीनों को उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा मिल सके।
-डॉ. पीडी गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल