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गोंडा: मोटे अनाज के कारोबार के लिए गांव-गांव पहुंचेंगी मोबाइल आउटलेट
Fri, 10 Feb 2023 11:29 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 10 Feb 2023 11:29 PM IST
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बलरामपुर। तराई को मोटा अनाज के उत्पाद व व्यापार का हब बनाने की तैयारी की जा रही है। पांच हजार हेक्टेयर में होने वाली खेती के बाद मोटा अनाज को बाजार में उतारने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए कृषि विभाग ने छोटे कस्बों में मोबाइल आउटलेट पहुंचाने की योजना बनाई है। इसके तहत वैन को मोबाइल आउटलेट के रूप में तैयार किया जाएगा। गांवों में पहुंचकर वहीं से किसानों से मोटा अनाज खरीदेगी। इसका उद्देश्य है कि किसानों के मोटे अनाज की बिक्री के लिए भटकना न पड़े।
जिले में मुख्यालय के अतिरिक्त तुलसीपुर व पचपेड़वा में भी मंडी है। लेकिन, किसानों को कोई समस्या न हो, इसके लिए यह व्यवस्था की जा रही है। मोबाइल आउटलेट कृषक उत्पादक संगठनों, उद्यमियों व स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किया जाएगा। इसके लिए प्रति इकाई दस लाख रुपये की मदद दी जाएगी। इसमें 75 प्रतिशत मोटा अनाज के उत्पाद के लिए और 25 प्रतिशत मोबाइल आउटलेट के साज सज्जा सहित अन्य के लिए किया जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी आरपी राना ने बताया कि जिले के नौ विकास खंडों में मोटे अनाज की खेती की संभावना है। जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर कृषक अपनी आर्थिक स्थिति में उत्तरोत्तर सुधार ला सकते हैं । हरैया सतघरवा, तुलसीपुर, गैसड़ी व पचपेड़वा के अधिकतर भाग वर्षा आधारित हैं। यह मोटे अनाज के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। इन्हीं चार विकास खंडों में मोटे अनाज के उत्पादन को लेकर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। हरैया सतघरवा के चौधरीडीह के आसपास अभी भी मोटे अनाज की खेती की जाती है।
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जिले में मुख्यालय के अतिरिक्त तुलसीपुर व पचपेड़वा में भी मंडी है। लेकिन, किसानों को कोई समस्या न हो, इसके लिए यह व्यवस्था की जा रही है। मोबाइल आउटलेट कृषक उत्पादक संगठनों, उद्यमियों व स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किया जाएगा। इसके लिए प्रति इकाई दस लाख रुपये की मदद दी जाएगी। इसमें 75 प्रतिशत मोटा अनाज के उत्पाद के लिए और 25 प्रतिशत मोबाइल आउटलेट के साज सज्जा सहित अन्य के लिए किया जाएगा।
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जिला कृषि अधिकारी आरपी राना ने बताया कि जिले के नौ विकास खंडों में मोटे अनाज की खेती की संभावना है। जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर कृषक अपनी आर्थिक स्थिति में उत्तरोत्तर सुधार ला सकते हैं । हरैया सतघरवा, तुलसीपुर, गैसड़ी व पचपेड़वा के अधिकतर भाग वर्षा आधारित हैं। यह मोटे अनाज के उत्पादन के लिए उपयुक्त है। इन्हीं चार विकास खंडों में मोटे अनाज के उत्पादन को लेकर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। हरैया सतघरवा के चौधरीडीह के आसपास अभी भी मोटे अनाज की खेती की जाती है।
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