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Gonda News: मेडिकल कॉलेज में अब 24 घंटे मिलेंगी दवाइयां
Sun, 20 Aug 2023 10:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 20 Aug 2023 10:53 PM IST
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गोंडा में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय।
गोंडा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी का खाका तैयार किया गया है। अब बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय में छह घंटे की जगह 24 घंटे दवा वितरण की तैयारी की जा रही है। अस्पताल में अलग से इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोलने की कवायद तेज हो गई है। वहीं, दुर्घटना या मारपीट के बाद मेडिको लीगल के लिए अलग से सेल तैयार किए जाएंगे।
अस्पताल में दवा वितरण काउंटर सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक खुला रहता है। इस दौरान ओपीडी में इलाज कराने आए मरीजों को दवा वितरित किया जाता है। इसके बाद मरीजों को दवाएं नहीं मिलतीं। सिर्फ इमरजेंसी में उपचार व जरूरी इंजेक्शन दिया जाता है।
मेडिकल कॉलेेज के नोडल अधिकारी डॉ. कुलदीप पांडेय ने बताया कि अस्पताल में अलग से इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोलने का खाका तैयार किया गया है। जहां मरीजों को 24 घंटे जीवन रक्षक दवाएं मुहैया कराईं जा सकेंगी। आठ-आठ घंटे के तीन पालियों में फार्मासिस्टों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इमरजेंसी में सिर्फ डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ रहेंगे। फार्मासिस्ट ही दवा वितरण का काम करेंगे।
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मेडिकोलीगल के लिए अलग बनेगा सेल
अस्पताल के इमरजेंसी में मेडिकोलीगल बनाने में डॉक्टर को करीब 15 मिनट समय खर्च करना पड़ता है। इस दौरान अन्य गंभीर मरीजों का उपचार बाधित होता है। नई व्यवस्था के अनुसार मेडिकोलीगल के लिए अलग सेल तैयार किया जाएगा। जहां जूनियर डॉक्टरों की टीम मरीजों का मेडिकोलीगल तैयार करेंगी। इमरजेंसी में सिर्फ मरीजों का उपचार किया जाएगा।
हर वार्ड में 24 घंटे तैनात रहेंगे जूनियर डॉक्टर
अस्पताल के विभिन्न वार्डों में मरीजों की देखरेख व उपचार के लिए पैरामेडिकल स्टॉफ मौजूद रहता था। मरीजों की हालत गंभीर होने पर इमरजेंसी से डॉक्टर को बुलाया जाता था अथवा ऑन कॉल डॉक्टर आते थे। लेकिन अब विभिन्न वार्डों में 24 घंटे जूनियर डॉक्टर तैनात रहेंगे। किसी भी मरीज को दिक्कत होने पर वरिष्ठ डॉक्टरों के परामर्श से तुरंत बेहतर उपचार किया जाएगा।
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अस्पताल में दवा वितरण काउंटर सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक खुला रहता है। इस दौरान ओपीडी में इलाज कराने आए मरीजों को दवा वितरित किया जाता है। इसके बाद मरीजों को दवाएं नहीं मिलतीं। सिर्फ इमरजेंसी में उपचार व जरूरी इंजेक्शन दिया जाता है।
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मेडिकल कॉलेेज के नोडल अधिकारी डॉ. कुलदीप पांडेय ने बताया कि अस्पताल में अलग से इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोलने का खाका तैयार किया गया है। जहां मरीजों को 24 घंटे जीवन रक्षक दवाएं मुहैया कराईं जा सकेंगी। आठ-आठ घंटे के तीन पालियों में फार्मासिस्टों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इमरजेंसी में सिर्फ डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ रहेंगे। फार्मासिस्ट ही दवा वितरण का काम करेंगे।
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मेडिकोलीगल के लिए अलग बनेगा सेल
अस्पताल के इमरजेंसी में मेडिकोलीगल बनाने में डॉक्टर को करीब 15 मिनट समय खर्च करना पड़ता है। इस दौरान अन्य गंभीर मरीजों का उपचार बाधित होता है। नई व्यवस्था के अनुसार मेडिकोलीगल के लिए अलग सेल तैयार किया जाएगा। जहां जूनियर डॉक्टरों की टीम मरीजों का मेडिकोलीगल तैयार करेंगी। इमरजेंसी में सिर्फ मरीजों का उपचार किया जाएगा।
हर वार्ड में 24 घंटे तैनात रहेंगे जूनियर डॉक्टर
अस्पताल के विभिन्न वार्डों में मरीजों की देखरेख व उपचार के लिए पैरामेडिकल स्टॉफ मौजूद रहता था। मरीजों की हालत गंभीर होने पर इमरजेंसी से डॉक्टर को बुलाया जाता था अथवा ऑन कॉल डॉक्टर आते थे। लेकिन अब विभिन्न वार्डों में 24 घंटे जूनियर डॉक्टर तैनात रहेंगे। किसी भी मरीज को दिक्कत होने पर वरिष्ठ डॉक्टरों के परामर्श से तुरंत बेहतर उपचार किया जाएगा।