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पांच सालों से नही मना रोजगार दिवस
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गोंडा। मनरेगा से विकास कार्यों की कई योजनाएं संचालित हो रहीं हैं, लेकिन पांच साल से ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस का आयोजन ही नहीं हुआ। जबकि हर ग्राम पंचायत में हर महीने रोजगार दिवस का आयोजन होना चाहिए। जिसमें श्रमिकों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देने के साथ ही कार्य मांगने के लिए प्रेरित करना होता है। रोजगार दिवस का आयोजन नहीं होने से दो लाख से अधिक श्रमिक रोजगार पाने से वंचित हैं। जागरूकता की कमी से जिले में पहले से ही करीब ढाई लाख श्रमिक निष्क्रिय हैं। न तो वह काम मांग रहे हैं और न ही उनके जॉबकार्ड निष्क्रिय हैं।
बीते वित्तीय वर्ष की स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो जिले में 3.93 लाख जॉबकार्ड धारक श्रमिक हैं, लेकिन मनरेगा में काम करने वाले श्रमिक एक लाख 33 हजार ही है। ये संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा नहीं हो पाई है। इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा से मार्च 2023 तक 51 लाख मानव दिवसों का सृजन किया जाना है। मगर ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवसों का आयोजन न होने से मनरेगा श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी ही नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि दो लाख से अधिक श्रमिकों ने मनरेगा में काम ही नहीं मांगा है। ये दो लाख श्रमिक तो ऐसे हैं जो सिर्फ नाम के पंजीकृत हैं। रोजगार दिवसों का आयोजन होता तो इन श्रमिकों को भी योजनाओं की जानकारी होती।
रोजगार दिवस का आयोजन पंचायतों को करना होता है, जिसमें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रोजगार सेवक की है। साथ ही सचिवों को इसके लिए तिथि तय करनी होती है मगर इस समय रोजगार दिवस के आयोजन की रिपोर्ट नहीं मिल रही है। पांच साल से आयोजन नहीं होने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि जुलाई तक गांवों की सोशल ऑडिट होना है। जिसमें रोजगार दिवस का आयोजन नहीं होने की बात सामने आने पर जिम्मेदारी तय होगी।
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शिकायत पंजिका पर नहीं दर्ज है कोई शिकायत
पंचायतों में मनरेगा से जुड़े कार्यों में लापरवाही या फिर रोजगार न मिलने पर शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था है। इसके लिए एक शिकायत पंजिका है, लेकिन पंचायतों की शिकायत पंजिका में कोई भी शिकायत ही नहीं दर्ज है। ऐसा तब है जब ऑनलाइन शिकायतों, जनता दर्शन, तहसील दिवसों में बड़े स्तर पर शिकायतें आ रहीं हैं। दो सौ से अधिक मामलों की जांच हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि पंचायतों में शिकायतों की सुनवाई नहीं हो रही है। रोजगार दिवसों के आयोजन होने पर शिकायतें आतीं और उन पर सुनवाई होती। अब सोशल ऑडिट में इन शिकायत रजिस्टरों का मिलान भी हो रहा है।
मनरेगा पर एक नजर
ग्राम पंचायतें 1,214
क्षेत्र पंचायत 16
श्रमिकों की संख्या 3.93 लाख
सक्रिय श्रमिक 1.33 लाख
निष्क्रिय श्रमिक 2.60 लाख
वार्षिक बजट 173.37 करोड़
मानव दिवस का सृजन लक्ष्य 51,08,925
श्रमिकों को तय भुगतान 104.22 करोड़
सामग्री पर तय खर्च 69. 48 करोड़
मनरेगा से श्रमिकों को अधिक से अधिक रोजगार दिए जाने का अभियान चल रहा है। पंचायतों में तय आयोजनों को कराने के लिए निर्देश दिए गये हैं। संत कुमार, उपायुक्त मनरेगा, श्रम एवं रोजगार
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बीते वित्तीय वर्ष की स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो जिले में 3.93 लाख जॉबकार्ड धारक श्रमिक हैं, लेकिन मनरेगा में काम करने वाले श्रमिक एक लाख 33 हजार ही है। ये संख्या डेढ़ लाख से ज्यादा नहीं हो पाई है। इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा से मार्च 2023 तक 51 लाख मानव दिवसों का सृजन किया जाना है। मगर ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवसों का आयोजन न होने से मनरेगा श्रमिकों को योजनाओं की जानकारी ही नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि दो लाख से अधिक श्रमिकों ने मनरेगा में काम ही नहीं मांगा है। ये दो लाख श्रमिक तो ऐसे हैं जो सिर्फ नाम के पंजीकृत हैं। रोजगार दिवसों का आयोजन होता तो इन श्रमिकों को भी योजनाओं की जानकारी होती।
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रोजगार दिवस का आयोजन पंचायतों को करना होता है, जिसमें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रोजगार सेवक की है। साथ ही सचिवों को इसके लिए तिथि तय करनी होती है मगर इस समय रोजगार दिवस के आयोजन की रिपोर्ट नहीं मिल रही है। पांच साल से आयोजन नहीं होने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि जुलाई तक गांवों की सोशल ऑडिट होना है। जिसमें रोजगार दिवस का आयोजन नहीं होने की बात सामने आने पर जिम्मेदारी तय होगी।
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शिकायत पंजिका पर नहीं दर्ज है कोई शिकायत
पंचायतों में मनरेगा से जुड़े कार्यों में लापरवाही या फिर रोजगार न मिलने पर शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था है। इसके लिए एक शिकायत पंजिका है, लेकिन पंचायतों की शिकायत पंजिका में कोई भी शिकायत ही नहीं दर्ज है। ऐसा तब है जब ऑनलाइन शिकायतों, जनता दर्शन, तहसील दिवसों में बड़े स्तर पर शिकायतें आ रहीं हैं। दो सौ से अधिक मामलों की जांच हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि पंचायतों में शिकायतों की सुनवाई नहीं हो रही है। रोजगार दिवसों के आयोजन होने पर शिकायतें आतीं और उन पर सुनवाई होती। अब सोशल ऑडिट में इन शिकायत रजिस्टरों का मिलान भी हो रहा है।
मनरेगा पर एक नजर
ग्राम पंचायतें 1,214
क्षेत्र पंचायत 16
श्रमिकों की संख्या 3.93 लाख
सक्रिय श्रमिक 1.33 लाख
निष्क्रिय श्रमिक 2.60 लाख
वार्षिक बजट 173.37 करोड़
मानव दिवस का सृजन लक्ष्य 51,08,925
श्रमिकों को तय भुगतान 104.22 करोड़
सामग्री पर तय खर्च 69. 48 करोड़
मनरेगा से श्रमिकों को अधिक से अधिक रोजगार दिए जाने का अभियान चल रहा है। पंचायतों में तय आयोजनों को कराने के लिए निर्देश दिए गये हैं। संत कुमार, उपायुक्त मनरेगा, श्रम एवं रोजगार