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मकर संक्रांति का पर्व आज व कल, स्नान दान के साथ खिचड़ी भोज ृ
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फोटो- 12- गोंडा में मकर संक्रांति पर दुकानों पर खरीददारी करते लोग। संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। स्नान, दान एवं पुण्य के महापर्व मकर संक्रांति की तैयारी पूरी हो गई है। जिले में शुक्रवार और शनिवार को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। गुरुवार की सुबह से लेकर शाम तक बाजार में बाजार में तिल, चूड़ा, लाई, गुड़ आदि सामानों की जमकर खरीदारी हुई। बच्चों ने पतंग आदि खरीदकर घरों में रख लिया।
मकर संक्रांति का त्योहार जिले में शुक्रवार तथा शनिवार को दो दिन मनाया जाएगा। कोलकाता से निकलने वाले राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार शुक्रवार और वाराणसी के पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति शनिवार को शुभ मुहूर्त है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। सुबह-सुबह गंगा स्नान करने और गरीबों व जरुरतमंदों में तिल, खिचड़ी और कपड़े का दान करना चाहिए। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है और नहाने के बाद सूर्य को जल अर्पित करने से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है।
खिचड़ी के इस त्योहार को दान-पुण्य के साथ खाने-पीने के लिए जाना जाता है। सुबह स्नान-ध्यान के साथ ही लोग दान-पुण्य कर खिचड़ी आदि ग्रहण करते हैं। इस दिन दाने और मीठे का भी बड़ा महत्व है।
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मकर संक्रांति पर विद्वानों के दो मत
काजीदेवर निवासी पंडित राकेश दत्त शास्त्री कहतें हैं कि मकर संक्रांति को लेकर दो मत है। कोलकाता से निकलने वाले राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार सूर्य का मकर राशि में परिवर्तन 14 जनवरी को दोपहर दो बजकर 30 मिनट होगा। इस कारण से मकर संक्रांति का पर्व शुक्रवार के दिन ही मनाया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ वाराणसी, उज्जैन, पुरी और तिरुपति से प्रकाशित होने वाले पंचांग के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की रात करीब आठ बजे होगा। सूर्यास्त होने के बाद सूर्य का मकर राशि में परिवर्तन होगा इस वजह से मकर संक्रांति 15 जनवरी, शनिवार के दिन मनाई जाएगी।
शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
सूर्य जब धनु राशि में यात्रा करते हैं तो उस समय खरमास लग जाता है। ऐसे में इस दौरान शुभ कार्य करना वर्जित हो जाता है। ऐसे में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही सभी तरह के मांगलिक कार्यों की शुरुआत दोबारा से होने लगेगी। खरमास के खत्म होते ही शादी, मुंडन संस्कार और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ होने लगते हैं।
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मकर संक्रांति का त्योहार जिले में शुक्रवार तथा शनिवार को दो दिन मनाया जाएगा। कोलकाता से निकलने वाले राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार शुक्रवार और वाराणसी के पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति शनिवार को शुभ मुहूर्त है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। सुबह-सुबह गंगा स्नान करने और गरीबों व जरुरतमंदों में तिल, खिचड़ी और कपड़े का दान करना चाहिए। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिल जाती है और नहाने के बाद सूर्य को जल अर्पित करने से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है।
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खिचड़ी के इस त्योहार को दान-पुण्य के साथ खाने-पीने के लिए जाना जाता है। सुबह स्नान-ध्यान के साथ ही लोग दान-पुण्य कर खिचड़ी आदि ग्रहण करते हैं। इस दिन दाने और मीठे का भी बड़ा महत्व है।
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मकर संक्रांति पर विद्वानों के दो मत
काजीदेवर निवासी पंडित राकेश दत्त शास्त्री कहतें हैं कि मकर संक्रांति को लेकर दो मत है। कोलकाता से निकलने वाले राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार सूर्य का मकर राशि में परिवर्तन 14 जनवरी को दोपहर दो बजकर 30 मिनट होगा। इस कारण से मकर संक्रांति का पर्व शुक्रवार के दिन ही मनाया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ वाराणसी, उज्जैन, पुरी और तिरुपति से प्रकाशित होने वाले पंचांग के अनुसार सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की रात करीब आठ बजे होगा। सूर्यास्त होने के बाद सूर्य का मकर राशि में परिवर्तन होगा इस वजह से मकर संक्रांति 15 जनवरी, शनिवार के दिन मनाई जाएगी।
शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
सूर्य जब धनु राशि में यात्रा करते हैं तो उस समय खरमास लग जाता है। ऐसे में इस दौरान शुभ कार्य करना वर्जित हो जाता है। ऐसे में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही सभी तरह के मांगलिक कार्यों की शुरुआत दोबारा से होने लगेगी। खरमास के खत्म होते ही शादी, मुंडन संस्कार और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य प्रारंभ होने लगते हैं।