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मासूम को घर छोड़ फर्ज निभा रही कोरोना योद्धा मां

Sun, 09 May 2021 08:40 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 09 May 2021 08:40 PM IST
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Leaving home to innocent, Corona warrior mother performing duty
गोंडा। जहां एक तरफ कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर की भयावह स्थित के बारे में सोच कर ही रूह कांप जाती है। वहीं अपने मासूम बच्चों को घर छोड़ मानवता की सेवा में लगी नर्सों के जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। बच्चे की ममता मानवता की रक्षा के आगे छोटी पड़ जा रही है।
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मां को अपने संक्रमित होने से बच्चों पर पड़ने वाले असर का भय सताता रहता है। वहीं अन्य मेडिकल स्टाफ भी इस कोरोना संकट की इस घड़ी में देवदूत साबित हो रहे हैं। ये अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए ड्यूटी के साथ इंसानियत का फर्ज बखूबी निभा रहे हैं। हर कोई इनके जज्बे को सलाम कर रहा है। हर पल खतरों से जूझ रहे ये मेडिकल स्टाफ मानवता की सेवा के लिए खुद की जान जोखिम में डालकर सेवा में डटे हैं।
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जिला अस्पताल के आर्थो वार्ड में तैनात स्टाफ नर्स रिया सिंह अपने दो साल के बच्चे को घर पर छोड़कर ड्यूटी पर आ रही हैं। इन्हें हर वक्त अपने संक्रमित होने से अपने मासूम पर आने वाले खतरे की आशंका बनी रहती है।
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वहीं पुरुष सर्जिकल वार्ड में तैनात पूनम भी 3 साल के बेटे को छोड़कर अस्पताल में ड्यूटी कर रही हैं। जिला अस्पताल के इमेजेंसी कक्ष में काम करने वाले वार्ड बॉय शैलेश यादव, सुधांशु मिश्र व अनिल वर्मा के जज्बे की तारीफ हो रही है।
कोरोना संक्रमण के दौरान वार्ड में मरीजों के बीच काम करने संक्रमित होने का खतरा बढ़ जा रहा है। पता नहीं रहता कि कौन सा मरीज या तीमारदार संक्रमित है। मुझे अपने संक्रमित होने से अपने बच्चे की चिंता सताने लगती है। कि मैं बीमार पड़ गई तो उस मासूम की देखभाल कैसे होगा। लेकिन खतरों के डर से फर्ज का जज्बा कम नहीं हो रहा है।
संभावित कोरोना संक्रमितों के बीच काम करने से लगातार संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। इसलिए अपने दो साल के बच्चे को खुद से अलग रखती हूं। अपने बच्चे को गले लगाने का मन करता लेकिन संक्रमण के डर से नहीं कर पा रही। मानवता की सेवा के लिए समर्पित हूं।

इमरजेंसी कक्ष में इस समय काम करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। मरीज और परिजन सीधे इमरजेंसी कक्ष में आते हैं। जिनके प्रारंभिक इलाज करने में संक्रमण का खतरा बढ़ जा रहा है। लेकिन कोरोना संक्रमण का भय फर्ज निभाने का जज्बा नहीं कम कर सकता।
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