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दवाओं का टोटा, मरीज हो रहे परेशान
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गोंडा में जिला अस्पताल परिसर में स्थित औषधि भंडार केंद्र।
- फोटो : GONDA
गोंडा। बाबू ईश्वर शरण सिंह जिला चिकित्सालय में मौजूदा समय में कितनी और कौन कौन सी दवाएं उपलब्ध हैं इसकी सूची नदारत है। अस्पताल में मौजूदा समय में कौन-कौन सी दवा रखी जाती हैं या फिर कितनी उपलब्ध है इसकी जानकारी मरीजों के अलावा स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारियों को होनी चाहिए। काफी दिनों से अस्पताल में मरीजों की जानकारी वाले औषधियों की सूची गायब है। नयी सूची अभी तक नहीं लगाई है। कई बार तो मरीजों को दवाएं लिखते समय चिकित्सकों को भी पता नहीं होता कि अस्पताल के औषधि भंडार में कौन-कौन सी दवा उपलब्ध है। जानकारी न होने से मरीजों का आधी-अधूरी दवाओं से इलाज हो रहा है।
जिला अस्पताल में शासन की ओर से जीवन रक्षक दवाओं के अलावा अन्य दवाओं का भंडार रखने का आदेश है। अस्पताल प्रशासन की ओर से जिला अस्पताल के औषधि भंडार में मौजूदा समय में 167 जीवन रक्षक दवाओं के अलावा 27 अन्य दवाओं के उपलब्धता का दावा किया जा रहा है, लेकिन यह सूची कुछ पन्नों पर लिखी केवल औषधि भंडार के गेट पर लगी है, जबकि स्वास्थ्य निदेशालय की गाइड लाइन के मुताबिक जिला अस्पताल में जो शासन की ओर से अनुमन्य दवाएं हैं जो मरीजों को दी जानी है उसकी सूचना व जानकारी जन सामान्य को भी हो इसके लिए अस्पताल के ऐसे स्थान पर बड़ी सूची लगायी जानी चाहिए। जिस पर सबकी नजर पड़ सके।
बताया जाता है कि जिला अस्पताल के बरामदे पर कुछ समय पहले दवाओं की सूची लगी थी, लेकिन पुरानी हो जाने व भवन की पोताई होने के दौरान उसे निकलवा दिया गया था तब से अस्पताल प्रशासन ने इसे दोबारा लगवाने की जहमत नही उठाई। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से बनाये गये नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। इस बारे में जिला अस्पताल प्रमुख अधीक्षक डॉ. अरूण लाल का कहना है कि जल्द ही दवाओं की सूची लगवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था को एक-एक कर ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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अस्पताल में लगी चिकित्सकों की पुरानी सूची से भी दिक्कत
जिला चिकित्सालय मरीजों को चिकित्सकों व शासन की ओर से संचालित योजनाओं व नयी सुविधाओं की जानकारी अपडेट करने में फेल्योर साबित हो रहा है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की पुरानी सूची लगी हुई है। 27 चिकित्सकों के नाम वाली सूची में 15 ऐसे चिकित्सकों के नाम दर्ज हैं जिनका कई साल पहले गैर जनपद स्थानांतरण हो चुका है। कुछ डॉ. ऐसे हैं जो सेवा निवृत्त हो चुके हैं तो कुछ ऐसे हैं जो जिला अस्पताल से प्रेक्टिस छोड़ चुके हैं वह अभी अस्पताल के आसपास ही अपने निजी व दूसरे निजी चिकित्सालयों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जिला अस्पताल प्रशासन अस्पताल छोड़ चुके चिकित्सकों का अपने कैम्पस व कार्यालय में उनकी सूची लगाकर उनका प्रचार कर रहा है।
चिकित्सकों के नाम पर ठगे जा रहे मरीज तीमारदार
तमाम मरीज व तीमारदार ऐसे हैं जो पहले के चिकित्सकों का नाम सुनकर उन्हें दिखाने आते हैं उनको अस्पताल में पूछने के दौरान ऐसे लोगों पर पहले से ही ओपीडी व इमरजेंसी के आसपास चिकित्सकों के दलाल नजर रखते हैं। मरीजों को वह चिकित्सकों के बारे में बताकर उन्हें बाहर चिकित्सक के घर का रास्ता दिखा देते हैं। चिकित्सक ऐसे मरीजों को जमकर ठगते हैं। अस्पताल प्रशासन इन गलतियों को सुधारने का नाम नहीं ले रहा है।
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जिला अस्पताल में शासन की ओर से जीवन रक्षक दवाओं के अलावा अन्य दवाओं का भंडार रखने का आदेश है। अस्पताल प्रशासन की ओर से जिला अस्पताल के औषधि भंडार में मौजूदा समय में 167 जीवन रक्षक दवाओं के अलावा 27 अन्य दवाओं के उपलब्धता का दावा किया जा रहा है, लेकिन यह सूची कुछ पन्नों पर लिखी केवल औषधि भंडार के गेट पर लगी है, जबकि स्वास्थ्य निदेशालय की गाइड लाइन के मुताबिक जिला अस्पताल में जो शासन की ओर से अनुमन्य दवाएं हैं जो मरीजों को दी जानी है उसकी सूचना व जानकारी जन सामान्य को भी हो इसके लिए अस्पताल के ऐसे स्थान पर बड़ी सूची लगायी जानी चाहिए। जिस पर सबकी नजर पड़ सके।
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बताया जाता है कि जिला अस्पताल के बरामदे पर कुछ समय पहले दवाओं की सूची लगी थी, लेकिन पुरानी हो जाने व भवन की पोताई होने के दौरान उसे निकलवा दिया गया था तब से अस्पताल प्रशासन ने इसे दोबारा लगवाने की जहमत नही उठाई। जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से बनाये गये नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। इस बारे में जिला अस्पताल प्रमुख अधीक्षक डॉ. अरूण लाल का कहना है कि जल्द ही दवाओं की सूची लगवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था को एक-एक कर ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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अस्पताल में लगी चिकित्सकों की पुरानी सूची से भी दिक्कत
जिला चिकित्सालय मरीजों को चिकित्सकों व शासन की ओर से संचालित योजनाओं व नयी सुविधाओं की जानकारी अपडेट करने में फेल्योर साबित हो रहा है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की पुरानी सूची लगी हुई है। 27 चिकित्सकों के नाम वाली सूची में 15 ऐसे चिकित्सकों के नाम दर्ज हैं जिनका कई साल पहले गैर जनपद स्थानांतरण हो चुका है। कुछ डॉ. ऐसे हैं जो सेवा निवृत्त हो चुके हैं तो कुछ ऐसे हैं जो जिला अस्पताल से प्रेक्टिस छोड़ चुके हैं वह अभी अस्पताल के आसपास ही अपने निजी व दूसरे निजी चिकित्सालयों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जिला अस्पताल प्रशासन अस्पताल छोड़ चुके चिकित्सकों का अपने कैम्पस व कार्यालय में उनकी सूची लगाकर उनका प्रचार कर रहा है।
चिकित्सकों के नाम पर ठगे जा रहे मरीज तीमारदार
तमाम मरीज व तीमारदार ऐसे हैं जो पहले के चिकित्सकों का नाम सुनकर उन्हें दिखाने आते हैं उनको अस्पताल में पूछने के दौरान ऐसे लोगों पर पहले से ही ओपीडी व इमरजेंसी के आसपास चिकित्सकों के दलाल नजर रखते हैं। मरीजों को वह चिकित्सकों के बारे में बताकर उन्हें बाहर चिकित्सक के घर का रास्ता दिखा देते हैं। चिकित्सक ऐसे मरीजों को जमकर ठगते हैं। अस्पताल प्रशासन इन गलतियों को सुधारने का नाम नहीं ले रहा है।