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45 साल बाद जिंदा हुआ किसान, खतौनी में नाम दर्ज
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तरबगंज (गोंडा)। तहसील क्षेत्र के एक किसान को गांव के ही कुछ दबंगों ने मृतक दिखाकर उसकी सारी जमीन अपने नाम वरासत कर हड़प ली। 45 साल बाद इस मामले की जानकारी पर किसान ने वाद दायर कर खुद के जीवित होने का प्रमाण दिया। इसके बाद तहसीलदार के आदेश पर उसका नाम खतौनी पर दर्ज कर कागजों पर जिंदा घोषित किया गया।
क्षेत्र के गौहानी निवासी राम आसरे की मौत के बाद उसके बेटे देवकली को भी मृतक दिखाकर वर्ष 1977 में गांव के ही निवासी सुरसरि मिश्रा व कैलाश प्रसाद ने तत्कालीन लेखपाल से साठगांठ कर उसके हिस्से की सारी जमीन को अपने नाम वरासत करा कर हड़प लिया। इसमें से कैलाश प्रसाद ने वरासत के बाद अपने हिस्से के भूमि सेझिया निवासी गंगाजली पत्नी राम लक्षन को बिक्री भी कर दी थी। मामले की भनक पीड़ित को 45 साल बाद लगी। इसके बाद बीती 21 जुलाई को देवकली ने शिकायत कर खुद के जीवित होने का कागजी प्रमाण विभिन्न दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करते हुए खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने का अनुरोध किया।
तहसीलदार डॉ. पुष्कर मिश्रा ने लेखपाल अंकित वर्मा से मामले की जांच कराकर सत्यापन रिपोर्ट मंगाई। जांच रिपोर्ट में पीड़ित किसान के जीवित होने के साक्ष्य मिले। इसके बाद तहसीलदार के आदेश पर खतौनी से सुरसरि प्रसाद व गंगाजली पत्नी राम लक्षन का नाम निरस्त कर देवकली पुत्र राम आसरे का नाम दर्ज कर दिया गया। तहसीलदार तरबगंज पुष्कर मिश्रा ने बताया कि गौहानी गांव के रहने वाले देवकली की भूमि लोगों ने गलत तरीके से अपने नाम वरासत करा ली थी। इसकी जांच के बाद देवकली के नाम से वरासत दर्ज करा दी गई है। (संवाद)
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क्षेत्र के गौहानी निवासी राम आसरे की मौत के बाद उसके बेटे देवकली को भी मृतक दिखाकर वर्ष 1977 में गांव के ही निवासी सुरसरि मिश्रा व कैलाश प्रसाद ने तत्कालीन लेखपाल से साठगांठ कर उसके हिस्से की सारी जमीन को अपने नाम वरासत करा कर हड़प लिया। इसमें से कैलाश प्रसाद ने वरासत के बाद अपने हिस्से के भूमि सेझिया निवासी गंगाजली पत्नी राम लक्षन को बिक्री भी कर दी थी। मामले की भनक पीड़ित को 45 साल बाद लगी। इसके बाद बीती 21 जुलाई को देवकली ने शिकायत कर खुद के जीवित होने का कागजी प्रमाण विभिन्न दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करते हुए खतौनी में अपना नाम दर्ज कराने का अनुरोध किया।
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तहसीलदार डॉ. पुष्कर मिश्रा ने लेखपाल अंकित वर्मा से मामले की जांच कराकर सत्यापन रिपोर्ट मंगाई। जांच रिपोर्ट में पीड़ित किसान के जीवित होने के साक्ष्य मिले। इसके बाद तहसीलदार के आदेश पर खतौनी से सुरसरि प्रसाद व गंगाजली पत्नी राम लक्षन का नाम निरस्त कर देवकली पुत्र राम आसरे का नाम दर्ज कर दिया गया। तहसीलदार तरबगंज पुष्कर मिश्रा ने बताया कि गौहानी गांव के रहने वाले देवकली की भूमि लोगों ने गलत तरीके से अपने नाम वरासत करा ली थी। इसकी जांच के बाद देवकली के नाम से वरासत दर्ज करा दी गई है। (संवाद)
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