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सीएमओ सहित चार को आरोप पत्र जारी
अमर उजाला ब्यूरो, गोंडा
Updated Sat, 26 Mar 2016 11:44 PM IST
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एनआरएचएम घोटाले में आरोपित श्रावस्ती जिले के प्रभारी सीएमओ सहित परिवार कल्याण के सीएमओ व दो अन्य डॉक्टरों के खिलाफ शासन ने आरोप पत्र जारी किया है। आरोप है कि वर्ष 2008-09 में हुए एनआरएचएम घोटाले में इन डॉक्टरों की भूमिका दवा खरीद को लेकर संदिग्ध रही है, जिसके तथ्य सीबीआई जांच में सामने आने के बाद शासन ने इन डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर इन्हें आरोप पत्र जारी किया है।
बताया जाता है कि वर्ष 2006-07 से लेकर 2010-11 तक मंडल के चारो जिलों में एनआरएचएम के तहत दवा खरीद में बड़ा घोटाला हुआ है, जिसकी जांच सीबीआई पिछले चार साल से कर रही है। सीबीआई जांच में कांग्रेस के एक बड़े नेता से लेकर दवा लाइजनर, डॉक्टरों से लेकर तमाम बाबुओं की मिलीभगत इस घोटाले में उजागर भी हो चुकी हैं। जबकि इनमें से कई लोग सीबीआई की विशेष अदालत से होते हुए डासना जेल तक की हवा भी खा चुके हैं।
बताते हैं कि श्रावस्ती में वर्ष 2008-09 में हुए ऐसे ही एक घोटाले में आरोपित वहां के चार डॉक्टरों के खिलाफ शासन से पूरे मामले में अपर निदेशक के मार्फत चारों डॉक्टरों को आरोप पत्र जारी किया गया है। जिसमें श्रावस्ती जिले के प्रभारी सीएमओ डॉ. आशीष दास, परिवार कल्याण के सीएमओ रह चुके डॉ. चमन प्रकाश, एडिशनल सीएमओ डॉ. एके संत व डिप्टी सीएमओ डॉ. मुकेश मातनहेलिया का नाम शामिल है।
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अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देवीपाटन मंडल डॉ. उमाकांत वर्मा की मानें तो शासन से चारों डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए आरोप पत्र तैयार किया जा चुका है।
भारत सरकार से संचालित एनआरएचएम (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य योजना) अब एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना) में वर्ष 2006-07 से लेकर 2010-11 तक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पेट में होने वाले कीड़े को मारने के लिए एक बड़े स्तर पर एल्बेेंडाजाल व आईएफए (आयरन फोलिक एसिड) टेबलेट की खरीदारी की गई थी।
साथ ही पुरुषों व महिलाओं में होने वाली तमाम प्रकार की बीमारियों के लिए अलग-अलग प्रकार की दवाएं व स्वास्थ्य उपकरणों की खरीदारी भी की गई थी। लेकिन इस खरीदारी के तहत न तो किसी जिले में दवाएं खरीदी गईं और न ही स्वास्थ्य उपकरण। और जो दवाएं व उपकरण खरीदे भी गए, वह निर्धारित रेट से कई गुना ऊंचे दामों पर, जिसकी जांच पिछले चार साल से सीबीआई कर रही है।
एनआरएचएम घोटाले में आरोपित डॉक्टरों से लेकर बाबुओं तक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शासन ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। सूत्रों की मानें तो अगले तीन से चार दिनों में मंडल के तमाम ऐसे बाबुओं व डॉक्टरों के खिलाफ शासन से विभागीय कार्रवाई का अंदेशा है, जो एनआरएचएम घोटाले की पृष्ठभूमि में शामिल रहे हैं।
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बताया जाता है कि वर्ष 2006-07 से लेकर 2010-11 तक मंडल के चारो जिलों में एनआरएचएम के तहत दवा खरीद में बड़ा घोटाला हुआ है, जिसकी जांच सीबीआई पिछले चार साल से कर रही है। सीबीआई जांच में कांग्रेस के एक बड़े नेता से लेकर दवा लाइजनर, डॉक्टरों से लेकर तमाम बाबुओं की मिलीभगत इस घोटाले में उजागर भी हो चुकी हैं। जबकि इनमें से कई लोग सीबीआई की विशेष अदालत से होते हुए डासना जेल तक की हवा भी खा चुके हैं।
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बताते हैं कि श्रावस्ती में वर्ष 2008-09 में हुए ऐसे ही एक घोटाले में आरोपित वहां के चार डॉक्टरों के खिलाफ शासन से पूरे मामले में अपर निदेशक के मार्फत चारों डॉक्टरों को आरोप पत्र जारी किया गया है। जिसमें श्रावस्ती जिले के प्रभारी सीएमओ डॉ. आशीष दास, परिवार कल्याण के सीएमओ रह चुके डॉ. चमन प्रकाश, एडिशनल सीएमओ डॉ. एके संत व डिप्टी सीएमओ डॉ. मुकेश मातनहेलिया का नाम शामिल है।
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अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य देवीपाटन मंडल डॉ. उमाकांत वर्मा की मानें तो शासन से चारों डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए आरोप पत्र तैयार किया जा चुका है।
भारत सरकार से संचालित एनआरएचएम (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य योजना) अब एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना) में वर्ष 2006-07 से लेकर 2010-11 तक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पेट में होने वाले कीड़े को मारने के लिए एक बड़े स्तर पर एल्बेेंडाजाल व आईएफए (आयरन फोलिक एसिड) टेबलेट की खरीदारी की गई थी।
साथ ही पुरुषों व महिलाओं में होने वाली तमाम प्रकार की बीमारियों के लिए अलग-अलग प्रकार की दवाएं व स्वास्थ्य उपकरणों की खरीदारी भी की गई थी। लेकिन इस खरीदारी के तहत न तो किसी जिले में दवाएं खरीदी गईं और न ही स्वास्थ्य उपकरण। और जो दवाएं व उपकरण खरीदे भी गए, वह निर्धारित रेट से कई गुना ऊंचे दामों पर, जिसकी जांच पिछले चार साल से सीबीआई कर रही है।
एनआरएचएम घोटाले में आरोपित डॉक्टरों से लेकर बाबुओं तक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर शासन ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। सूत्रों की मानें तो अगले तीन से चार दिनों में मंडल के तमाम ऐसे बाबुओं व डॉक्टरों के खिलाफ शासन से विभागीय कार्रवाई का अंदेशा है, जो एनआरएचएम घोटाले की पृष्ठभूमि में शामिल रहे हैं।