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Gonda News: बीमा कंपनी पर 8500 रुपये जुर्माना ठोका
Mon, 08 Jul 2024 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 08 Jul 2024 12:23 AM IST
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गोंडा। पॉलिसी धारक को इलाज के पैसे न देने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्याेरेंस कंपनी को इलाज खर्च के छह लाख, 35 हजार 47 रुपये भुगतान का आदेश दिया है। दावे का निस्तारण न करने पर आयोग ने बीमा कंपनी पर 8500 रुपये जुर्माना भी लगाया है।
शहर के सीतापुर आंख अस्पताल स्टेशन रोड निवासी प्रेम प्रकाश अग्रवाल ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में प्रस्तुत परिवाद में कहा कि उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर यूनाइटेड इंडिया इंश्याेरेंस कंपनी लि. की गोंडा शाखा से पांच लाख रुपये की फेमिली मेडीकेयर बीमा पाॅलिसी ली थी। पाॅलिसी 24 जुलाई 2016 से 23 जुलाई 2017 तक प्रभावी थी। नाक में परेशानी के कारण उन्हें लखनऊ के इंदिरानगर स्थित शालीमार अस्पताल एवं ट्राॅमा सेंटर में भर्ती होना पड़ा। वहां नाक का ऑपरेशन हुआ। अस्पताल ने इलाज पर 35 हजार 47 रुपये का बिल जारी किया। इलाज के दौरान उनके भाई ने बीमा कंपनी को सूचित भी कर दिया। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद बीमाकर्ता कंपनी के समक्ष 35 हजार 47 रुपये का दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने दावे का भुगतान नहीं किया। आयोग के नोटिस पर बीमा कंपनी ने हाजिर होकर कड़ा प्रतिवाद किया।
सुनवाई के दौरान निर्णय सुनाते हुए आयोग के अध्यक्ष रामानंद, सदस्य सुभाष सिंह व सदस्य मंजू रावत ने बीमा कंपनी को एक माह के अंदर परिवादी को इलाज खर्च के 35 हजार 47 रुपये व मानसिक, शारीरिक कष्ट और वाद खर्च के लिए 8500 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। आदेश का अनुपालन न करने पर बीमा कंपनी को सात प्रतिशत ब्याज भी अदा करना होगा।
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शहर के सीतापुर आंख अस्पताल स्टेशन रोड निवासी प्रेम प्रकाश अग्रवाल ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में प्रस्तुत परिवाद में कहा कि उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर यूनाइटेड इंडिया इंश्याेरेंस कंपनी लि. की गोंडा शाखा से पांच लाख रुपये की फेमिली मेडीकेयर बीमा पाॅलिसी ली थी। पाॅलिसी 24 जुलाई 2016 से 23 जुलाई 2017 तक प्रभावी थी। नाक में परेशानी के कारण उन्हें लखनऊ के इंदिरानगर स्थित शालीमार अस्पताल एवं ट्राॅमा सेंटर में भर्ती होना पड़ा। वहां नाक का ऑपरेशन हुआ। अस्पताल ने इलाज पर 35 हजार 47 रुपये का बिल जारी किया। इलाज के दौरान उनके भाई ने बीमा कंपनी को सूचित भी कर दिया। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद बीमाकर्ता कंपनी के समक्ष 35 हजार 47 रुपये का दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने दावे का भुगतान नहीं किया। आयोग के नोटिस पर बीमा कंपनी ने हाजिर होकर कड़ा प्रतिवाद किया।
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सुनवाई के दौरान निर्णय सुनाते हुए आयोग के अध्यक्ष रामानंद, सदस्य सुभाष सिंह व सदस्य मंजू रावत ने बीमा कंपनी को एक माह के अंदर परिवादी को इलाज खर्च के 35 हजार 47 रुपये व मानसिक, शारीरिक कष्ट और वाद खर्च के लिए 8500 रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। आदेश का अनुपालन न करने पर बीमा कंपनी को सात प्रतिशत ब्याज भी अदा करना होगा।
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