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Gonda News: मिठाइयों पर लग रही चांदी की जगह नुकसानदायक एल्युमिनियम की वर्क
Sun, 09 Mar 2025 11:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 09 Mar 2025 11:35 PM IST
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गोंडा में मिठाई की दुकान में खोवा बनाने की प्रक्रिया का निरीक्षण करती खाद्य सुरक्षा टीम। स्रोत:
गोंडा। होली में ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में मिठाई दुकानदार चांदी वर्क की जगह पर हानिकारक एल्युमिनियम की वर्क लगाकर बेंच रहे हैं। बाजार में चमकती मिठाई सेहत के लिए हानिकारक है। असली चांदी वर्क की पहचान के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग जागरूकता अभियान चला रहा है। महीने भर में 10 से अधिक चमकती मिठाइयों के सैंपल लिए जा चुके हैं।
होली के पहले जिले के विभिन्न स्थानों पर मिठाइयों की दुकानें सज गई हैं। चमकदार एवं आकर्षक दिखाने के लिए बर्फी, लड्डू, छेना, गुलाबजामुन आदि मिठाइयों पर सफेद वर्क चढ़ाई जा रही है। दुकानदार इसे चांदी वर्क बताकर बेचते हैं, लेकिन असल में ये एल्युमिनियम की वर्क होती है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि अधिकांश दुकानदार एल्युमिनियम की वर्क लगाते हैं। महीने भर में करीब 10 मिठाइयों का सैंपल लिया गया है। दुकानदार सालिकराम ने बताया कि चांदी वर्क एक पैकेट (150) पीस 630 से 700 रुपये में है, जबकि एल्युमिनियम वर्क 150 रुपये से 200 रुपये में बिकती है। वह सिर्फ चांदी की वर्क ही बेचते हैं। ऐसे में अधिकांश दुकानदार सस्ता एल्युमिनियम वर्क ही खरीदते और बेचते हैं। इसमें उन्हें अधिक मुनाफा मिलता है।
ऐसे करें चांदी वर्क की पहचान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि चांदी वर्क वाली मिठाइयों को खरीदते समय ग्राहक असली चांदी वर्क की पहचान जरूर कर लें। मिठाई से थोड़ा सा वर्क निकालकर हथेली में रगड़े। यदि मसलने पर वर्क बिल्कुल ही समाप्त हो जाता है तो असली चांदी वर्क है। यदि वर्क पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होता तो यह एल्युमिनियम वर्क है। चांदी वर्क बहुत ही नाजुक होता है। एल्युमिनियम वर्क हार्ड होता है।
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मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि एल्युमिनियम का वर्क लगातार सेवन करने से गंभीर रोग होने की अशंका बनी रहती है। लीवर, किडनी व हार्ट पर असर पड़ता है। चर्म रोग हो सकते हैं। फेफड़ों में अधिक वर्क जमा होने से टीबी होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में बिना वर्क वाली मिठाइयों का सेवन करना ही उचित होगा।
बस स्टॉप के पास विभिन्न स्थानों ने आपूर्ति वाले खोया का भाव
कानपुर वाला- 240 रुपये किलो
जरवल वाला - 260 रुपये किलो
नवाबगंज वाला- 280 रुपये किलो
नवाबगंज दानेदार- 300 रुपये किलो
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होली के पहले जिले के विभिन्न स्थानों पर मिठाइयों की दुकानें सज गई हैं। चमकदार एवं आकर्षक दिखाने के लिए बर्फी, लड्डू, छेना, गुलाबजामुन आदि मिठाइयों पर सफेद वर्क चढ़ाई जा रही है। दुकानदार इसे चांदी वर्क बताकर बेचते हैं, लेकिन असल में ये एल्युमिनियम की वर्क होती है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि अधिकांश दुकानदार एल्युमिनियम की वर्क लगाते हैं। महीने भर में करीब 10 मिठाइयों का सैंपल लिया गया है। दुकानदार सालिकराम ने बताया कि चांदी वर्क एक पैकेट (150) पीस 630 से 700 रुपये में है, जबकि एल्युमिनियम वर्क 150 रुपये से 200 रुपये में बिकती है। वह सिर्फ चांदी की वर्क ही बेचते हैं। ऐसे में अधिकांश दुकानदार सस्ता एल्युमिनियम वर्क ही खरीदते और बेचते हैं। इसमें उन्हें अधिक मुनाफा मिलता है।
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ऐसे करें चांदी वर्क की पहचान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि चांदी वर्क वाली मिठाइयों को खरीदते समय ग्राहक असली चांदी वर्क की पहचान जरूर कर लें। मिठाई से थोड़ा सा वर्क निकालकर हथेली में रगड़े। यदि मसलने पर वर्क बिल्कुल ही समाप्त हो जाता है तो असली चांदी वर्क है। यदि वर्क पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होता तो यह एल्युमिनियम वर्क है। चांदी वर्क बहुत ही नाजुक होता है। एल्युमिनियम वर्क हार्ड होता है।
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मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि एल्युमिनियम का वर्क लगातार सेवन करने से गंभीर रोग होने की अशंका बनी रहती है। लीवर, किडनी व हार्ट पर असर पड़ता है। चर्म रोग हो सकते हैं। फेफड़ों में अधिक वर्क जमा होने से टीबी होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में बिना वर्क वाली मिठाइयों का सेवन करना ही उचित होगा।
बस स्टॉप के पास विभिन्न स्थानों ने आपूर्ति वाले खोया का भाव
कानपुर वाला- 240 रुपये किलो
जरवल वाला - 260 रुपये किलो
नवाबगंज वाला- 280 रुपये किलो
नवाबगंज दानेदार- 300 रुपये किलो