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Gonda News: सरयू के तटवर्ती गांवों में अब संक्रामक रोग का भी संकट
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गोंडा के ऐली परसौली में उफनाई सरयू नदी। - संवाद
गोंडा। सरयू के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से बाढ़ के साथ ही अब संक्रामक रोग फैलने का संकट शुरू हो गया है। नदी का जलस्तर मंगलवार को और घटा है। अब नदी खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। इससे बाढ़ का संकट टला है मगर कटान का खतरा बढ़ गया है।
नदी के तटवर्ती 24 पंचायतों के करीब 200 गांव ऐसे हैं जो कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। बाढ़ का संकट तो है, गांव के किनारे तक पानी पहुंच गया है। इससे संक्रामक रोग भी फैल रहे हैं। नवाबगंज, तरबगंज, करनैलगंज, परसपुर, बेलसर के स्वास्थ्य केंद्रों पर लगातार माझा के बीमार लोग पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने भी स्वास्थ्य टीमों को सक्रिय कर दिया है। जिससे लोगों का परीक्षण कर दवाएं दी जा रही हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर चिक्तिसकों को भी निर्देश दिया गया है कि दवाओं की कमी न रहने पाए। पशुओं में भी रोग बढ़ने की आशंका है। ऐसे में डीएम ने पशुपालन विभाग को टीकाकरण करने का निर्देश दिया है। बाढ़ कार्य खंड की ओर से तटबंधों की निगरानी तेज कर दी गई है।
गांवों में भले ही बाढ़ का संकट न हो मगर खेतों में जलभराव हो गया है। करनैलगंज में तो तटबंध व नदी के बीच के पांच गांवों के करीब एक हजार बीघा खेत कटकर नदी में समा चुके हैं। वहीं तरबगंज तहसील के एक दर्जन से अधिक गांवों में खेत पानी में डूब गए हैं, इससे पशुपालकों को पशुओं के चारे का संकट शुरू हो गया है।
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नदी के तटवर्ती 24 पंचायतों के करीब 200 गांव ऐसे हैं जो कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। बाढ़ का संकट तो है, गांव के किनारे तक पानी पहुंच गया है। इससे संक्रामक रोग भी फैल रहे हैं। नवाबगंज, तरबगंज, करनैलगंज, परसपुर, बेलसर के स्वास्थ्य केंद्रों पर लगातार माझा के बीमार लोग पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने भी स्वास्थ्य टीमों को सक्रिय कर दिया है। जिससे लोगों का परीक्षण कर दवाएं दी जा रही हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर चिक्तिसकों को भी निर्देश दिया गया है कि दवाओं की कमी न रहने पाए। पशुओं में भी रोग बढ़ने की आशंका है। ऐसे में डीएम ने पशुपालन विभाग को टीकाकरण करने का निर्देश दिया है। बाढ़ कार्य खंड की ओर से तटबंधों की निगरानी तेज कर दी गई है।
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गांवों में भले ही बाढ़ का संकट न हो मगर खेतों में जलभराव हो गया है। करनैलगंज में तो तटबंध व नदी के बीच के पांच गांवों के करीब एक हजार बीघा खेत कटकर नदी में समा चुके हैं। वहीं तरबगंज तहसील के एक दर्जन से अधिक गांवों में खेत पानी में डूब गए हैं, इससे पशुपालकों को पशुओं के चारे का संकट शुरू हो गया है।
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