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मीटर के नाम पर अवैध वसूली
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2015 11:07 PM IST
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शहरी व देहात इलाकों में घर-घर लगाए जाने वाले मीटर के नाम पर लोगों से जमकर वसूली हो रही है। कहीं किसी के घर का मीटर बदलने के लिए किसी से 500 रुपये मांगे जा रहे हैं तो कहीं यही काम 100 रुपये में भी हो जा रहा है। जिसकी शिकायत शहरी व देहात क्षेत्र के लोगों ने अधिशासी अभियंता से भी की है।
सूबे में बिजली की होने वाली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने इन दिनों दो महीने के लिए शहर व गांवों में बिजली चोरी के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। जिसका मुख्य मकसद शहर व गांव में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के घर में उसका खुद का मीटर लगाया जाना है।
ताकि जितनी बिजली का लोग उपभोग करें, उतने का ही पैसा उनसे वसूल किया जाए और जो बिजली चोरी हो रही है, उसपर भी लगाम लग सके। मौजूदा वक्त जिले में होने वाला बिजली का लाइन लॉस (बिजली चोरी के साथ बिजली उपकरणों में खपने वाली बिजली) 45 फीसदी है। जिसे घटाकर 15 फीसदी से भी कम किया जाना है।
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अगर ऐसा करने में प्रदेश सरकार कामयाब हो जाती है तो वह दिन दूर नहीं जब शहरी इलाकों को 20 से 22 घंटे और ग्रामीण इलाकों को 16 से 18 घंटे बिजली मिलने लगेगी। इसके लिए मुख्य सचिव के निर्देश पर शहर व गांवों में मीटर लगाए जाने का अभियान चल रहा है।
जिसमें मीटर बदलने वाले लोग अंधाधुंध कमाई पर उतारू हैं। यह लोग शहरी व देहात इलाकों में अपनी मनमर्जी के मुताबिक मीटर लगाने के नाम पर उपभोक्ताओं से सुविधा शुल्क वसूल रहे हैं। कहीं मीटर लगाने का रेट 500 रुपये है तो कहीं यही काम 100 रुपये में भी चल जा रहा है।
जिसकी शिकायत तमाम उपभोक्ताओं ने एक्सईएन से भी की है। वहीं अधिशासी अभियंता राधेश्याम भाष्कर का कहना है कि मीटर लगाने के एवज में अगर कोई व्यक्ति किसी से पैसा लेता है तो उसे दंडित किया जाएगा।
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सूबे में बिजली की होने वाली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने इन दिनों दो महीने के लिए शहर व गांवों में बिजली चोरी के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। जिसका मुख्य मकसद शहर व गांव में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के घर में उसका खुद का मीटर लगाया जाना है।
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ताकि जितनी बिजली का लोग उपभोग करें, उतने का ही पैसा उनसे वसूल किया जाए और जो बिजली चोरी हो रही है, उसपर भी लगाम लग सके। मौजूदा वक्त जिले में होने वाला बिजली का लाइन लॉस (बिजली चोरी के साथ बिजली उपकरणों में खपने वाली बिजली) 45 फीसदी है। जिसे घटाकर 15 फीसदी से भी कम किया जाना है।
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अगर ऐसा करने में प्रदेश सरकार कामयाब हो जाती है तो वह दिन दूर नहीं जब शहरी इलाकों को 20 से 22 घंटे और ग्रामीण इलाकों को 16 से 18 घंटे बिजली मिलने लगेगी। इसके लिए मुख्य सचिव के निर्देश पर शहर व गांवों में मीटर लगाए जाने का अभियान चल रहा है।
जिसमें मीटर बदलने वाले लोग अंधाधुंध कमाई पर उतारू हैं। यह लोग शहरी व देहात इलाकों में अपनी मनमर्जी के मुताबिक मीटर लगाने के नाम पर उपभोक्ताओं से सुविधा शुल्क वसूल रहे हैं। कहीं मीटर लगाने का रेट 500 रुपये है तो कहीं यही काम 100 रुपये में भी चल जा रहा है।
जिसकी शिकायत तमाम उपभोक्ताओं ने एक्सईएन से भी की है। वहीं अधिशासी अभियंता राधेश्याम भाष्कर का कहना है कि मीटर लगाने के एवज में अगर कोई व्यक्ति किसी से पैसा लेता है तो उसे दंडित किया जाएगा।