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सूखे पड़े आदर्श तालाब

Mon, 11 Apr 2016 11:11 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
अमर उजाला/गोंडा Updated Mon, 11 Apr 2016 11:11 PM IST
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Ideally ponds remain dry
सूखा तालाब - फोटो : अमर उजाला
एंकर : 
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गर्मी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है और तालाबों में बूंद भर पानी नहीं है। ग्रामीण इलाकों में जल संचयन के लिए बनाए गए आदर्श तालाब सूखे पड़े हैं। हालत यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों को भी पानी की तलाश में भटकना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना के तहत बनाए गए 363 तालाबों से भी लोगों की पानी की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इन तालाबों में पानी भरवाने के लिए अधिकारी बजट न होने की बात कहकर समस्या से मुंह मोड़ रहे हैं।
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गर्मी में ग्रामीणों को पानी की समस्या से बचाने के लिए 10 वर्ष पहले जिले में 16 आदर्श तालाबों का निर्माण कराया गया था। शासन की मंशा थी कि इन तालाबों के जरिये ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी को दूर किया जा सकेगा।
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इसके साथ ही इन तालाबों में जल संचित होने से मवेशियों की प्यास भी बुझ सकेगी। इन आदर्श तालाबों में पानी का ठहराव हो सके, इसलिए तालाब के चारों तरफ सीढ़ियों का निर्माण कराया गया था।

इसके अलावा इनकी सुरक्षा के लिए तालाबों को कटीले तारों से घेरकर गेट भी लगवाया गया था। लेकिन इन तमाम कवायदों के बाद भी यह आदर्श तालाब सूखे ही रहे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिले में 363 तालाब और बनाए गए, लेकिन इन तालाबों में भी जल संचयन के कोई उपाय नहीं किये गए।

वर्तमान समय में यह तालाब सूखे पड़े हैं और इनमें बूंद भर भी पानी नहीं है। जिले के अधिकारियों के पास भी सूखे पड़े इन तालाबों में पानी भरवाने के लिए कोई योजना नहीं है। 

विकास खंड बेलसर क ी ग्राम पंचायत चांदपुर में वित्तीय वर्ष 2004-05 में आदर्श तालाब का निर्माण कराया गया था। गांव के अवधेश दूबे व राजू पांडेय का कहना है कि तालाब निर्माण के बाद ग्रामीणों में पानी की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन निर्माण के बाद जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यहां जल संचयन नहीं हो सका। मौजूदा समय में तालाब क ी सुरक्षा के लिए लगाए गए पिलर उखड़ गए हैं और तार जमीन पर पडे़ हैं। तालाब में बूंद भर पानी नहीं है।


मुजेहना की ग्राम पंचायत बेलहरी के मजरा जोतिया में वर्ष 2006-07 में जल संचयन के लिए तालाब का निर्माण कराया गया था, लेकिन यहां भी जल संचयन की व्यवस्था न होने से तालाब सूखा पड़ा है। यहां के रहने वाले भदईराम ने बताया कि तालाब में पानी रहने से खेतों की सिंचाई आसानी से हो जाया करती थी और जानवरों को पीने के लिए पानी मिल जाता था, लेकिन अब सिंचाई तो दूर मवेशियों को भी पानी की तलाश में भटकना पड़ रहा है। 

 
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